'नीच' शब्द पर आपत्ति जताने वाले बिहार के इस सांसद ने कभी कही थी CM नीतीश कुमार की छाती तोड़ने की बात
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'नीच' शब्द पर आपत्ति जताने वाले बिहार के इस सांसद ने कभी कही थी CM नीतीश कुमार की छाती तोड़ने की बात
फाइल फोटो

तीन साल पहले बिहार प्रदेश बीजेपी कार्यालय मे आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में जहानाबाद सांसद अरूण कुमार ने सीएम को लेकर यह बात कही थी.

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बिहार के जहानाबाद से सांसद अरूण कुमार एक बार फिर से सुर्खियों में हैं. इस बार सुर्खियों में आने की वजह बनी है 'नीच' शब्द को लेकर चल रही राजनीती जिसके कारण वो अपने पुराने साथी और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा के साथ होते दिख रहे हैं. दरअसल केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच ‘नीच’ राजनीति पर जहानाबाद से सांसद अरुण कुमार कुशवाहा के समर्थन में आ गए हैं.

उन्होंने कहा है कि नीतीश कुमार ने अपनी गलत मानसिकता का परिचय दिया है और किसी को ‘नीच’ कहना बिहारी अस्मिता को ठेस पहुंचाना है. दरअसल इस बयान को लेकर भले ही अरूण कुमार ने कुशवाहा का समर्थन किया हो लेकिन उनके और नीतीश कुमार के बीच काफी समय से और पुरानी खुन्नस है. इसी खुन्नस के दौरान साल 2015 के विधानसभा चुनाव में सांसद अरूण कुमार ने सीएम नीतीश कुमार का सीना तोड़ देने तक की बात कही थी.

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इस बयान को लेकर उस समय अगड़ा बनाम पिछड़ा की भी राजनीति हुई थी. तब तीन साल पहले प्रदेश बीजेपी कार्यालय मे आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में जहानाबाद सांसद अरूण कुमार ने सीएम को लेकर यह बात कही थी. अरूण कुमार के छाती तोड़ने वाले बयान पर सीएम नीतीश ने कहा था कि मैं तो उपलब्ध हूं, उन्हें जो करना है, कर लें. नीतीश ने कहा था कि उन्होंने जिस भाषा का प्रयोग किया, वह उनको मुबारक हो.
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तब कुमार कुशवाहा के साथ थे और रालोसपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष थे. अरुण कुमार ने कहा था कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार चेहरा बदलकर अनंत सिंह जैसे दर्जनों लोगों का शोषण अपने लाभ के लिए करते रहे हैं और काम निकल जाने के बाद ऐसे लोगों की उन्हें जरूरत नहीं रह जाती लेकिन उन्हें समझ लेना चाहिए कि यह कौम चूड़ी पहनकर नहीं बैठी है. कुमार का इशारा बिहार की एक उच्च जाति की तरफ था. कुमार ने कहा था कि यह कौम नीतीश कुमार की छाती भी तोड़ सकती है.

ताजा राजनीतिक हालात और एनडीए में रहने-जाने की आशंका के बीच जहानाबाद के सांसद ने कहा कि उपेन्द्र कुशवाहा से उनका मनभेद नहीं है बल्कि मतभेद है. उन्होंने कहा कि अलग-अलग विचारों के कारण वे कुशवाहा से अलग हुए हैं. उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राजनीति किस करवट बैठेगी ये नहीं कहा जा सकता है. उन्होंने आरएलएसपी कार्यकर्ताओं पर हमले को भी अनुचित बताते हुए कहा कि यह अलोकतांत्रिक है.

आपको बता दें कि अरुण कुमार ने उपेन्द्र कुशवाहा से अलग होकर अलग पार्टी बना ली थी. माना जा रहा है कि अरुण कुमार का ताजा बयान उपेन्द्र कुशवाहा के सियासी ‘खीर’ बनने की प्रक्रिया का हिस्सा है. महागठबंधन में अगर कुशवाहा शामिल होंगे तो अरुण कुमार का चेहरा सवर्णों का होगा और कुशवाहा खुद को पिछड़ों का नेता बताएंगे.
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