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ग्राम पंचायत की मुखिया ने बढ़ाई नीतीश सरकार की मुश्किलें, इस मामले को लेकर कोर्ट में घसीटा
Patna News in Hindi

Rajnish Kumar | News18 Bihar
Updated: February 26, 2020, 11:55 PM IST
ग्राम पंचायत की मुखिया ने बढ़ाई नीतीश सरकार की मुश्किलें, इस मामले को लेकर कोर्ट में घसीटा
ग्राम पंचायत ने मुखिया ने बढ़ाई सरकार की मुश्किलें

पटना में शिक्षकों पर कार्रवाई का आदेश देने को लेकर मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) के गायघाट के सुस्ता पंचायत की मुखिया ने सरकार को हाईकोर्ट में चुनौती दी है. मुखिया ने सरकार पर पंचायती राज के अधिकार में दखलंदाजी का आरोप लगाया है.

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  • Last Updated: February 26, 2020, 11:55 PM IST
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पटना. मुजफ्फरपुर के गायघाट के सुस्ता पंचायत की मुखिया गीता देवी ने सरकार के 3 विभागों के प्रधान सचिव यानि शिक्षा विभाग, पंचायती राज और नगर विकास विभाग के खिलाफ हाईकोर्ट (High Court) में रिट याचिका दायर कर पंचायती राज के अधिकार में दखलंदाजी का आरोप लगाया है. मुखिया गीता देवी का आरोप है कि हड़ताली शिक्षकों पर कार्रवाई के लिए सरकार क्यों आदेश जारी कर रही है, जबकि नियोजन ईकाई में सरकार को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है.

सरकार पर लगाया हस्तक्षेप का आरोप
याचिकाकर्ता के वकील नलिन कुमार ने भी कहा कि सरकार द्वारा नियोजन ईकाई को आदेश देना और हस्तक्षेप करना पंचायती राज कानून का उल्लंघन है. उन्होंने कहा कि जिन तीनों विभाग के खिलाफ रिट याचिका दायर हुई है, उन्होंने नियोजन ईकाई को पत्र जारी किया था. उन्होंने ये भी कहा कि आरटीई के तहत ये भी नियम है कि मूल्यांकन और परीक्षा ड्यूटी में भी उन्हें नियोजित शिक्षकों के डेपुटेशन का अधिकार नहीं है, ऐसे में रिट याचिका दायर कर मुखिया ने सरकार को चुनौती दी है.

शिक्षक संघ ने किया याचिका का स्वागत



इस बाबत परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष ने भी सरकार के खिलाफ दायर याचिका का स्वागत किया है. उन्होंने कहा कि आश्चर्य है कि प्रधान सचिव के पद पर बैठे लोग कैसे असंवैधानिक रूप से आदेश पारित कर रहे हैं. अब रिट याचिका का सरकार के पास जवाब नहीं होगा क्योंकि जब नियोक्ता नियोजन ईकाई है तो सरकार आदेश देनेवाली कौन होती है.

ऐसे बढ़ रही है सरकारी की मुश्किलें
उल्लेखनीय है कि राज्य में 17 फरवरी से हड़ताल पर गए नियोजित शिक्षकों की वजह से शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह बेपटरी हो गई है. जहां स्कूलों में पढाई ठप है वहीं मैट्रिक की परीक्षा में भी सरकार को काफी फजीहतों का सामना करना पड़ा और अब इंटर के मूल्यांकन भी प्रभावित हो रहे हैं. सरकार की ओर से हड़ताली शिक्षकों पर कार्रवाई को लेकर लगातार नियोजन इकाईयों को पत्र लिखा गया है लेकिन नियोजन ईकाईयों ने ना तो निलंबन किया और ना शिक्षकों को बर्खास्त किया. अब सरकार की कार्यशैली पर ही नियोजन ईकाईयों ने सवाल खड़ा कर दिया है.

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First published: February 26, 2020, 10:21 PM IST
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