95 साल में पहली बार ईद पर सूना दिखेगा पटना का गांधी मैदान, मौलानाओं ने कहा- घर में ही पढ़ें ईद की नमाज

पटना के एक मस्जिद की फाइल फोटो

बिहार में ईद (Eid 2020) की सबसे बड़ी जमात पटना के गांधी मैदान (Patna Gandhi Maidan) में होती है जहां 30 से 40 हज़ार लोग एक साथ ईद की नमाज़ अदा करते हैं और नमाज़ के बाद एक दूसरे से गले मिल कर मुबारकबाद देतें है. गांधी मैदान में सूबे के मुख्यमंत्री भी लोगों से मुलाकात के लिए जाते हैं.

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पटना. बिहार के मुस्लिम संगठनों (Muslim Organisation) ने साफ तौर से एलान किया है की इस बार ईद (Eid 2020) की नमाज़ घरों में पढ़ी जाएगी. ईदगाह और मस्जिदों में ईद की नमाज़ अदा नही की जाएगी. लॉकडाउन (Lockdown) को देखते हुए सरकार की गाइड लाइन को फॉलो किया जा रहा है. मुस्लिम संगठनें जैसे इमार-ए-शरिया बिहार, इदार-ए-शरिया बिहार, जमात-ए-इस्लामी, जमीयत-ए-उलेमा बिहार और शिया मज़हबी लिडरों ने लोगों से अपील की है की ईद की नमाज़ के लिए ईदगाह और मस्जिदों मे जाने की ज़रुरत नहीं है.

गांव के लोगों से विशेष अपील

मुस्लिम संगठनों की तरफ से इस मामले को लेकर पिछले पंद्रह दिनों से लोगों में जागरूकता फैलान की भी कोशिश की गई है. दरअसल शहरों में काफी हद तक मुस्लिम संगठनों की अपील पूरी तरह से कामयाब दिखाई देती है लेकिन गांवों में लोग ना समझी की बुनियाद पर गलती कर बैठते हैं. ऐसे लोगों से अपील की जा रही है की ईद की नमाज़ को लेकर किसी तरह की कोई गलतफहमी नहीं करें और घरों में ही नमाज़ अदा करें.

गांधी मैदान में एक साथ जुटती थी 30-40 हजार लोगों की भीड़

मुस्लिम संगठनों का कहना है कि पूरे रमज़ान लोगों नें अपनी ईबादतें अपने अपने घरों में की है और ईद की नमाज भी वो अपने घरों में ही अदा करेगें. बिहार में ईद की सबसे बड़ी जमात पटना के गांधी मैदान में होती है जहां 30 से 40 हज़ार लोग एक साथ ईद की नमाज़ अदा करते हैं और नमाज़ के बाद एक दूसरे से गले मिल कर मुबारकबाद देतें है.

सीएम भी जाते थे लोगों को मुबारकबाद देने

गांधी मैदान में सूबे के मुख्यमंत्री भी लोगों से मुलाकात के लिए जाते हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ही ये रवायत कायम की है कि हर साल ईद की नमाज में वो गांधी मैदान पहुंच कर लोगों को ईद की मुबारकबाद देतें है. गांधी मैदान को भी ईद के लिए सजाया जाता है और इस मौके पर सुरक्षा का भी खास बंदो बस्त रहता है लेकिन इस बार ऐसा कुछ भी नहीं है.

1925 से शुरू हुई थी परंपरा

लॉकडाउन को देखते हुए गांधी मैदान की ईदैन कमिटी ने गांधी मैदान में ईद की नमाज नही पढ़ने का फैसला पहले ही कर दिया था. इस तरह से ये पैगाम पूरे बिहार को देने की कोशिश की गई की गांधी मैदान में ईद की नमाज नही होगी तो दूसरे ज़िलों में भी लोग ईद की नमाज ईदगाह में नही पढ़ेगें. बताया जाता है की गांधी मैदान में 1925 से ईद की नमाज पढ़ी जा रही है. उस वक्त भी गांधी मैदान में ईद का खास एहतमाम किया जाता था और आज भी ईद का खास इंतज़ाम किया जाता है लेकिन पहली बार ऐसा हुआ है की पूरे देश में ईद की नमाज लोग ईदगाह और मस्जिदों में अदा करने की बजाए अपने अपने घरों मे नमाज़ अदा करेगें.

ईमाम बोले

इसका असर बिहार में भी देखा जा रहा है. पटना के ईमाम मौलाना मशहुद अहमद कादरी नदवी के मोताबिक कोरोना और लॉकडाउन को देखते हुए गांधी मैदान में ईद की नमाज नहीं हो रही है. गांधी मैदान में ईद की नमाज मशहुद कादरी पढ़ाते हैं. मशहुद कादरी ने कहा कि सरकार की गाइड लाइन का पूरा पालन किया जा रहा है. इमारत-ए-शरिया बिहार ने, बिहार, झारखण्ड और उड़ीसा के लोगों के अलावा पूरे देश के लोगों से अपील की है की ईद के दिन किसी भी तरह की भीड़ से परहेज किया जाए.

भाईचारा का पैगाम देने की अपील

ईद की नमाज़ घरों में अदा की जाए और नमाज के बाद लोगों से मिलने जुलने से दुर रहा जाए. सामाजिक दूरी बना कर चंद लोग मिल कर अगर अपने घरों मे ईद की नमाज अदा कर सकते है तो ज़रुर ईद की जमात बना कर ईद की नमाज पढ़ लें. ऑल इंडिया मिल्ली कॉनसिल के उपाध्यक्ष मौलाना अनीसुर्रहमान कासमी ने कहा की ईद भाईचारा का पैगाम देता है लेकिन इस बार ईद के बाद ईद मिलन जैसे प्रोग्राम नही होगें लेकिन फिर भी भाईचारे को मजबूत करने की कोशिशें जारी रहेगी.

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