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मुजफ्फरपुर शेल्टर होम: CM नीतीश के मंत्री का बड़ा बयान, बोले- दोषियों को मिले कड़ी सजा

समाज कल्याण मंत्री का दावा, अब नहीं होगी ऐसी घटना.
समाज कल्याण मंत्री का दावा, अब नहीं होगी ऐसी घटना.

बिहार के समाज कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह (Minister Ramsevak Singh) ने मुजफ्फरपुर शेल्टर होम (Muzaffarpur Shelter Home) पर बड़ा बयान दिया है. उन्‍होंने कहा कि मामले में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले, ताकि फिर ऐसा करने की कोई सोचे भी ना.

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पटना. बिहार सरकार के समाज कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह (Minister Ramsevak Singh) ने न्‍यूज़ 18 से बातचीत में भरोसा दिलाया है कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम (Muzaffarpur Shelter Home) जैसी घटना बिहार में फिर कभी नहीं होगी. इस मामले में जिन लोगों पर आरोप लगे हैं, अगर वे दोषी साबित हुए तो उन्हें किसी भी कीमत पर बख़्शा नहीं जाएगा. उन्‍होंने आगे कहा कि मुजफ्फरपुर शेल्टर होम मामले में दोषियों को ऐसी सजा मिले, जिससे कोई भी चाहे कितना भी रसूख वाला हो, ऐसा घिनौना काम करने की सपने में भी नहीं सोचे. आपको बता दें कि शेल्टर होम मामले में समाज कल्याण विभाग की भूमिका पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया था. जब शेल्टर होम में रहने वाली लड़कियों के साथ बलात्कार करने की घटना और कुछ लड़कियों को जान से मारने की बातें सामने आई थीं. घटना के राजनीतिक तूल पकड़ने के बाद मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी. यही नहीं, इस मामले में तत्‍कालीन समाज कल्याण मंत्री मंजू वर्मा को अपना पद छोड़ना पड़ा था.

सीबीआई ने सौंपी जांच रिपोर्ट
इसी घटना की जांच करने के बाद सीबीआई ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी है, जिसमें 25 तत्कालीन डीम और 71 अधिकारियों को दोषी ठहराते हुए कार्रवाई की बात कही गई है. सीबीआई ने बिहार सरकार के कई अधिकारियों का हलफनामे में नाम शामिल किया है. बिहार के 17 शेल्टर होम को भी दोषी बताया गया है. जाहिर है इसी वजह से समाज कल्याण विभाग के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी आ गई है कि दुबारा ऐसी घटना ना हो और उसकी का भरोसा समाज कल्याण मंत्री दिला रहे हैं.

आरजेडी ने नीतीश पर साधा निशाना
समाज कल्याण मंत्री रामसेवक सिंह की दलील के बावजूद विरोधी दल सीधा हमला नीतीश कुमार पर कर रहे हैं. आरजेडी के वरिष्ठ नेता रघुवंश सिंह आरोप लगा रहे हैं कि इतनी बड़ी घटना घट गई. कई डीएम की भूमिका संदेह में आ गई. जबकि सीएम नीतीश कुमार ही डीएम की पोस्टिंग करते हैं, तो उनकी भी ज़िम्मेदारी बनती है. उन्‍हें नैतिकता के नाम पर इस्तीफा दे देना चाहिए. साथ ही इस मामले में किसी नेता का नाम ना होना भी संदेह खड़ा करता है, क्योंकि इतनी बड़ी घटना घट जाए और किसी नेता की मिली भगत ना हो, ऐसा हो ही नहीं सकता. जरूर सीबीआई इस मामले में दबाव में है.



 

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