NRC के मामले पर सुशील मोदी बोले- बीजेपी के लिए देश पहले है

News18 Bihar
Updated: September 4, 2019, 10:45 PM IST
NRC के मामले पर सुशील मोदी बोले- बीजेपी के लिए देश पहले है
बिहार के उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी

उपमुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि 1979 में असम के छात्रों ने घुसपैठियों के विरुद्ध व्यापक आंदोलन कर केंद्र सरकार को समस्या का समाधान निकालने के लिए बाध्य किया था.

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पटना. नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन यानी (NRC) के मुद्दे को लेकर बिहार (Bihar) में सियासत लगातार जारी है. इस कड़ी में बिहार के उपमुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी (Sushil Kumar Modi) ने कहा कि बीजेपी के लिए देश पहले है. हम राजनीति में नेशन फर्स्ट के सिद्धांत को जीते हैं.

सुशील मोदी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और असम ऐसे सीमावर्ती राज्य हैं, जहां कांग्रेस सरकारों की लापरवाही के चलते कई दशकों तक पड़ोसी देशों से बड़े पैमाने पर घुसपैठ जारी रहने से इन राज्यों की संस्कृति पर बुरा असर पड़ा. स्थानीय लोगों को रोजगार के मौके गंवाने पड़े और देश की सुरक्षा को गंभीर चुनौतियां मिलने लगीं.

उपमुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि 1979 में असम के छात्रों ने घुसपैठियों के विरुद्ध व्यापक आंदोलन कर केंद्र सरकार को समस्या का समाधान निकालने के लिए बाध्य किया था. एनडीए सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एनआरसी को अपडेट करने में लगी है. सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में घुसपैठियों की पहचान के लिए एनआरसी की जो सूची तैयार की गई है, उसकी कमियों को दूर करने के लिए कई स्तरों पर विकल्प भी दिए गए हैं. दुर्भाग्यवश, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद-370 और असम में एनआरसी के मुद्दे पर कांग्रेस और आरजेडी जैसी पार्टियां राजनीतिक स्वार्थ से ऊपर नहीं उठ पा रही हैं.

दूसरे ट्वीट में सुशील कुमार मोदी ने कहा कि केंद्र सरकार घुसपैठियों की बड़ी संख्या को देश के विभिन्न हिस्सों में अलगाववाद, आतंकवाद, उग्रवाद और तस्करी जैसे कई गंभीर अपराधों की जड़ के रूप देखती है. इसलिए घुसपैठ की समस्या से निपटने के लिए राजनीतिक नफा-नुकसान की चिंता किए बिना सख्ती से काम कर रही है. जिनके लिए सबसे पहले दल, परिवार, सत्ता और संपत्ति है, वे एनआरसी के मुद्दे को वोटबैंक के नजरिए से देख रहे हैं. लेकिन बीजेपी के लिए देश पहले है. हम राजनीति में नेशन फर्स्ट के सिद्धांत को जीते हैं.

बिहार में लगातार जारी है बयानबाजी
गौरतलब है कि बिहार में नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन यानी एनआरसी के मुद्दे को बीजेपी लगातार उठाते हुए इसे प्रदेश में लागू करने की मांग कर रही है लेकिन जेडीयू ने साफ कर दिया है कि बिहार में एनआरसी की जरूरत नहीं है. इस मुद्दे पर आरजेडी का स्टैंड अलग है और उसने इस मसले को लेकर बीजेपी पर वोट बैंक की राजनीति करने का आरोप लगाया है. हालांकि सवाल ये है कि जब असम में एनआरसी की फाइनल लिस्ट पर बीजेपी में भी एकमत नहीं है तो बिहार में इसपर सियासत क्यों शुरू हो गई.

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First published: September 4, 2019, 10:07 PM IST
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