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अपनी प्रतिभा की कद्र नहीं करता बिहार! पटना की सड़कों पर चाय बेच रहा नेशनल लेवल का तैराक

News18 Bihar
Updated: November 22, 2019, 12:16 PM IST
अपनी प्रतिभा की कद्र नहीं करता बिहार! पटना की सड़कों पर चाय बेच रहा नेशनल लेवल का तैराक
पटना के काजीपुर मोहल्ले में अपनी चाय की दुकान पर नेशनल लेवल स्वीमर गोपाल यादव.

पटना के काजीपुर मोहल्ले में चाय की दुकान चला रहे राष्ट्रीय स्तर के तैराक रहे गोपाल यादव एक समय अंतरराष्ट्रीय स्तर के तैराक बनना चाहते थे, लेकिन अब अपनी खराब आर्थिक स्थिति के कारण चाय बेचने को मजबूर हैं.

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  • Last Updated: November 22, 2019, 12:16 PM IST
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पटना. आम तौर पर यह कहा जाता रहा है कि बिहार (Bihar) अपनी प्रतिभाओं की कद्र नहीं करता.  बीते 14 नवंबर को जब गणितज्ञ वशिष्ठ नारायण सिंह (Mathematician Vasistha Narayan Singh) के निधन हुई तो उनकी प्रतिभा का सम्मान नहीं किए जाने की बात सामने आई. अब एक और मामला सामने आया है जिसमें प्रदेश का एक राष्ट्रीय स्तर का तैराक (National level swimmer) पटना की सड़कों पर चाय बेचकर गुजारा कर रहा है. खास बात ये कि उन्होंने अपनी चाय की दुकान का नाम भी 'नेशनल तैराक टी स्टॉल' रखा है.


पटना के काजीपुर मोहल्ले में चाय की दुकान चला रहे गोपाल यादव एक समय अंतरराष्ट्रीय स्तर के तैराक बनना चाहते थे, लेकिन अब अपनी खराब आर्थिक व्यवस्था के कारण चाय बेचने को मजबूर हैं ताकि अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें. चाय की दुकान का नाम 'नेशनल तैराक टी स्टॉल' रखने के बारे में जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने यह नाम क्यों रखा है तो उन्होंने कहा कि यह राज्य के सभी एथलीटों की दुर्दशा बताने के लिए किया है.




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बता दें कि 1987 में गोपाल ने बिहार की तरफ से पहली बार कोलकाता में हुई राष्ट्रीय तैराकी प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लिया था.. इसके बाद 1988 और 1989 में केरल में आयोजित राष्ट्रीय तैराकी प्रतियोगिता में बढ़िया प्रदर्शन किया. 1988 में बीसीए दानापुर में आयोजित राज्य चैंपियनशिप में 100 मीटर बैकस्ट्रोक प्रतियोगिता में पहले नंबर पर आए.



 इसके बाद 1990 में वह डाक विभाग में नौकरी के लिए इंटरव्यू भी दिया, लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिली.

बकौल गोपाल उन्होंने कई जगहों पर नौकरी के लिए आवेदन किया, लेकिन सभी को रिश्वत चाहिए थी, जिसकी वजह से उन्हें नौकरी नहीं मिल पाई.




गोपाल यादव ने अपनी चाय दुकान का नाम नेशनल तैराक टी स्टॉल रखा है.



उन्होंने यह भी बताया कि उनके बच्चे भी तैराकी करना चाहते हैं और उनमें काफी प्रतिभा है, लेकिन उन्होंने मेरी स्थिति देखकर तैराकी छोड़ दी. गोपाल ने बताया कि उन्होंने अपने अंदर के तैराक को जिंदा रखा है, इसलिए अब गंगा नदी में तैराकी सिखा रहे हैं. बहरहाल गोपाल की स्थिति को देखते हुए इस बात का पता चलता है कि देश में एथलिटों की क्या दशा है.


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First published: November 21, 2019, 12:52 PM IST
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