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बिहार में डिजिटल प्रचार से NDA को फायदा, विपक्ष के लिहाज से चौंकाने वाले नतीजों की उम्मीद नहीं: संजय कुमार

बिहार में डिजिटल प्रचार से NDA को फायदा, विपक्ष के लिहाज से चौंकाने वाले नतीजों की उम्मीद नहीं: संजय कुमार

बीजेपी ने चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की है. (सांकेतिक फोटो)

बीजेपी ने चुनाव को लेकर रणनीति तैयार की है. (सांकेतिक फोटो)

संजय कुमार (Sanjay Kumar) का कहना है कि यह सही है कि नीतीश की लोकप्रियता पहले जैसे नहीं रही. उसमें गिरावट आई है. आज से 10 साल पहले नीतीश के साथ गठबंधन से भाजपा को फायदा होता था.

    नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar assembly elections 2020) की तिथियों की घोषणा हो गई है. कोरोना संकट (Corona crisis) के कारण इस बार डिजिटल प्रचार के इर्द-गिर्द पूरा चुनाव लड़ा जा रहा है. विपक्ष में अपेक्षाकृत ज्यादा बिखराव नजर आ रहा है. इन्हीं बिंदुओं पर पेश हैं ‘सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज’ (सीएसडीएस) के निदेशक संजय कुमार (Sanjay Kumar) से ‘भाषा’ के पांच सवाल और उनके जवाब.

    सवाल: बिहार में चुनाव की घोषणा हो गई है और ऐसे में आपका क्या आकलन है?
    जवाब: मेरे लिए चौंकाने वाला नतीजा यही होगा कि राजग 200 सीटों के पार चला जाए. विपक्ष के लिहाज से चौंकाने वाले नतीजे की उम्मीद मुझे नजर नहीं आती. अगर विपक्ष एकजुट होगा तो चुनौती होगी, लेकिन यह चुनौती इतनी बड़ी नहीं होगी कि राजग को जीतने में मुश्किल हो. अगर चिराग पासवान भी विपक्ष के साथ आ जाएं तो शायद थोड़ा टक्कर वाला मुकाबला हो, लेकिन नतीजा नहीं बदलेगा.

    सवाल: कोरोना संकट के समय डिजिटल चुनाव प्रचार को लेकर कुछ छोटी पार्टियों ने आपत्ति जताई है. क्या इन पार्टियों को नुकसान का डर है?
    जवाब: निश्चित तौर पर छोटी पार्टियों और विपक्ष को इसका नुकसान होगा. भाजपा को डिजिटल और प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल वाले चुनाव में महारत हासिल है. 2014 के चुनाव से ही भाजपा ने डिजिटल चुनाव प्रचार की पहल शुरू कर दी थी. इसीलिए बिहार के चुनाव में डिजिटल प्रचार से राजग को फायदा मिलता नजर आ रहा है.

    सवाल: विपक्ष में बिखराव भी अपेक्षाकृत ज्यादा नजर आ रहा है, इसका क्या कारण है और क्या यह उसकी मुश्किलें बढ़ाएगा ?
    जवाब: बिखराव की कई वजह हैं. सबसे बड़ी वजह आत्मविश्वास की कमी है. अगर यह भावना आ जाए कि चुनाव जीतने के लिए नहीं, बल्कि हार-जीत के अंतर को कम करने के लिए लड़ना है तो ऐसी स्थिति में छोटी-छोटी पार्टियों के नेता चाहेंगे कि वे उस गठबंधन की तरफ जाएं जो जीतने की स्थिति में हैं. विपक्ष में आत्मविश्वास की जो कमी दिख रही है, उसकी एक वजह यह है कि उसके पास कोई कद्दावर नेता नहीं है या फिर बहुत सारे नेता हैं जो खुद को कद्दावर नेता के तौर पर पेश करते हैं. तालमेल का भी अभाव है और इसको लेकर भी सहमति नहीं है कि नेतृत्व किसके पास होगा. विपक्ष के मतों में जितना ज्यादा बिखराव होगा, हार-जीत का अंतर भी उतना ही बड़ा होगा.

    सवाल: क्या नीतीश कुमार की लोकप्रियता पहले की तरह बरकरार है और उन्हें तेजस्वी यादव का चेहरा कितनी बड़ी चुनौती देता नजर आ रहा है?
    जवाब: यह सही है कि नीतीश की लोकप्रियता पहले जैसे नहीं रही. उसमें गिरावट आई है. आज से 10 साल पहले नीतीश के साथ गठबंधन से भाजपा को फायदा होता था. उसमें अब बदलाव आया है. अब नीतीश को गठबंधन की जरूरत है. तेजस्वी के लिए दिक्कत यह है कि उनके खिलाफ विरोध नहीं, लेकिन उनकी पार्टी के खिलाफ विश्वास की कमी है. उनकी छवि पर उनके पिता लालू प्रसाद की छवि और 15 साल के शासन वाली छवि भारी पड़ जाती है. इससे उन्होंने बाहर निकलने की कोशिश की और माफी भी मांग ली. वह नयी तरह की राजनीति करने की भी कोशिश कर रहे हैं. वैसे, एक निवर्तमान मुख्यमंत्री की लोकप्रियता दूसरे नेताओं के मुकाबले अक्सर ज्यादा होती है. अनुभव के लिहाज से भी नीतीश और तेजस्वी में काफी फर्क है. दूसरी तरफ, जदयू की छवि जनता के बीच राजद से बेहतर दिखाई देती है. ऐसे में फिलहाल तेजस्वी का चेहरा उतनी बड़ी चुनौती पेश करता नजर नहीं आ रहा जिसकी विपक्ष को जरूरत है.

    सवाल: श्रमिकों का सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलना, कोरोना संकट, बाढ़ और कुछ अन्य हालिया ज्वलंत मुद्दों का बिहार चुनाव में कितना असर होगा?
    जवाब: इन मुद्दों का प्रभाव क्षणिक था. उस समय लोगों का गुस्सा नीतीश कुमार के प्रति ज्यादा था, लेकिन जैसे-जैसे लोग कामकाज की दिनचर्या में चले जाते हैं तो उनका गुस्सा कम हो जाता है. चार-पांच महीने हो गए और लोगों का गुस्सा दब गया. अगर लोग मान भी लें कि लोग नीतीश कुमार को वोट नहीं देंगे तो फिर उन्हें लगता है कि किसे दें. जैसे राष्ट्रीय स्तर के चुनाव में होता है. तुलनतात्मक रूप से विकल्प के नहीं होने से भी नीतीश कुमार की लोकप्रियता बरकरार नजर आती है.

    Tags: Bihar assembly elections 2020, Bihar NDA, Bihar News, PATNA NEWS

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