उत्तराखंड के बाद बिहार की जमीन पर दावा ठोक रहा नेपाल, उधर चीन ने हड़प ली उसकी 36 हेक्टेयर जमीन!

नेपाल ने अब बिहार की पूर्वी चंपारण की जमीन पर भी दावा ठोक दिया है.
नेपाल ने अब बिहार की पूर्वी चंपारण की जमीन पर भी दावा ठोक दिया है.

चीन (China) ने धीरे-धीरे नेपाल (Nepal) के गांवों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है. यही वजह है कि वहां की ओली सरकार अपनी इसी नाकामी को छिपाने के लिए भारत से मतभेद की बातों को हवा दे रही है.

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पटना. बीते कुछ महीनों में नेपाल और भारत (Nepal and India) के संबंध सामान्य नहीं दिख रहे हैं. उत्तराखंड के लिपुलेख, लिम्या धूरा और कालापानी को अपने नक्शे में दिखाने के बाद नेपाल ने बिहार के पूर्वी चंपारण (East Champaran) जिले की 500 मीटर जमीन पर नेपाल ने अचानक अपना दावा पेश कर दिया. दरअसल, जिस इलाके में एक बांध का निर्माण कराया जा रहा है, उसे नेपाली सेना ने रुकवा दिया है. नेपाल का कहना है कि यह बांध लालबकेया नदी पर पहले से ही है. तटबंध के पुनर्निर्माण को लेकर नेपाल के लोगों के बदले रुख से भारतीय क्षेत्र के ग्रामीण आक्रोशित हैं.

दूसरी ओर नेपाल की जनता और नेपाल सीमा प्रहरी के बदले तेवर से सीमावर्ती बलुआ गुआबारी के ग्रामीणों में आक्रोश है. न्यूज 18 से बात करते हुए बलुआ गुआबारी के मुखिया अतिकुर रहमान बताते हैं कि जब से होश संभाला है, नेपाल के लोगों में ऐसा बदलाव कभी नहीं देखा है. मुखिया बताते हैं कि नेपाल के लोगों के साथ सदियों से बेटी रोटी का संबंध रहा है.

विदेश मामलों के जानकार भी हैरत में पड़ गए कि जब नेपाल और भारत के बीच सदियों से मैत्री संबंध रहे हैं तो अचानक क्या हुआ जो नेपाल इतना अटैकिंग मोड में आ गया है और अपना नक्शा तक बदलकर भारत के इलाकों लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा (Lipulekh, Kalapani and Limpiyadhura) पर दावा कर दिया. इसके बाद अब वह बिहार से सटे इलाके में भारत की जमीन पर भी अपना दावा ठोक रहा है.



जानकार मानते हैं कि ऐसा इसलिए कि केपी शर्मा ओली की सरकार ने भारत के प्रति आक्रामक रुख अख्तियार कर अपनी नाकामी छिपाना चाहती है. ये बात सही भी साबित होती लग रही है, क्योंकि अब जाकर नेपाल की उस करतूत का कच्चा चिट्ठा खुलता नजर आ रहा है, जिसमें उसने चीन के हाथों अपनी जमीन गंवा दी है. दरअसल, नेपाल सरकार भारत विरोध की आड़ में उन कमियों को छिपाना चाह रही है जो उसने कर दी है और जिस कारण वह अब चीन की ग्रिप में फंसता नजर आ रहा है.
नेपाल के गांवों पर कब्जा करता जा रहा चीन
चीन ने धीरे-धीरे नेपाल के गांवों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है. यही वजह है कि वहां की कम्युनिस्ट पार्टी की ओली सरकार अपनी इसी नाकामी को छिपाने के लिए भारत से मतभेद की बातों को हवा दे रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो हाल में चीन ने नेपाल के जिस गांव में लाल झंडे गाड़ दिए हैं, वो नेपाल के उत्तरी गोरखा क्षेत्र का रुई गांव है.

दस्तावेजों में अब भी नेपाल का हिस्सा है रूई गांव
कहा जा रहा है कि गोरखा इलाके का रुई गांव अब तिब्बत के अधीन हो चुका है. वहां चीनी राष्ट्रपति के पोस्टर तक लगाए जा चुके हैं. हालांकि, हकीकत यही है कि यह गांव अभी भी नेपाल के नक्शे में शामिल है. पर जानकारी मिल रही है कि चीन ने गांव के निशान वाले सारे पिलर उखाड़ फेंके हैं, जिससे कि वह अपने गैर-कानूनी कब्जे की बात को दबा सके.

नेपाल के पास पर्याप्त सबूत भी, पर नहीं मानता चीन
वहीं, सही तथ्य ये है कि गोरखा जिले के राजस्व दफ्तर में वह गांव आज भी नेपाल का है और रुई के लोगों ने सरकार को जो लगान दिए हैं, उसका भी पूरा रिकॉर्ड है. नेपाल मामलों के विशेषज्ञों की मानें तो तिब्बत से सटी नेपाल की उत्तरी सीमा की हालत बहुत ही खराब है. चीन इस इलाके के कई इलाकों में नदियों की धाराएं भी बदल रहा है, जिससे उन खास इलाकों को चीन का दिखाया जा सके.

नेपाल की 36 हेक्टेयर जमीन पर हो चुका चीन का कब्जा
जानकारों की मानें तो तिब्बत क्षेत्र में नेपाल की सीमा चीन से मिलती है. देशों के बीच पूर्व से पश्चिम तक कई ऐसे पहाड़ हैं जो दोनों देशों के बीच प्राकृतिक सीमा का काम करते हैं. इसी की आड़ में चीन अपनी सीमा बदले की कोशिश करता रहता है. फिलहाल दोनों देशों के बीच छह चेक पोस्ट हैं, जिनके जरिए व्यापार होता है. सर्वे डिपार्टमेंट ने कहा है कि 11 नदियों के रास्ता बदलने से पहले ही नेपाल 36 हेक्टयर जमीन खो चुका है.

नेपाल देखता रहा और 11 इलाकों में गड़ गए चीनी झंडे
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार दरस्तावेज बताते हैं कि चीन ने नेपाल से सटे करीब 11 इलाकों पर कब्जा कर लिया है जो इलाके नेपाल ने खोए हैं उसके अनुसार नेपाल के हुमला जिले के भागडेर खोला के 6 हेक्‍टेयर और इसी जिले के करनाली नदी की 4 हेक्‍टेयर जमीन. रसुवा जिले के सिनजेन खोला की 2 हेक्‍टेयर, भुरजुक खोला के एक हेक्‍टेयर, लमडे खोला और जंबू खोला की तीन हेक्‍टेयर जमीन नेपाल चीन के हाथों खो चुका है.

इसके अलावा सिधुपलचोक जिले के खरने खोला की 7 हेक्‍टेयर, भोटसे कोसी की 4 हेक्‍टेयर जमीन भी नेपाल ने गंवा दिया है. वहीं, संखुआसभा जिले के समझुंग खोला की 3 हेक्‍टेयर, कम खोला की 2 हेक्‍टेयर और अरुन नदी की 4 हेक्‍टेयर जमीन पर चीन ने कब्जा कर लिया है.

भारत विरोधी प्रचार से नाकामी छिपा रही नेपाल की सरकार
जानकारों की माने तो दरअसल नेपाल की ओली सरकार इस बात से भी डरी हुई है कि अगर नेपाल की जनता के सामने ये तथ्य आ गए तो वह सड़कों पर उतर आएगी. यही वजह है कि नेपाल ने देश की जनता का ध्यान हटाने के लिए पिछले दिनों एक नया नक्शा जारी कर भारत के कुछ हिस्सों पर अपना दावा ठोका था. वहीं अब नेपाली एफएम स्टेशन लगातार भारत के खिलाफ दुष्प्रचार कर रहे हैं.

... तो नेपाल के अस्तित्व पर ही आ जाएगा खतरा!
हालांकि जानकार बताते हैं कि भले ही ओली सरकार चीन सरकार की तरफादारी करते हुए अपने देश में भारत विरोध का झंडा बुलंद कर रही है, लेकिन यह उसकी ऐतिहासिक भूल साबित होने जा रही है क्योंकि आर्थिक तौर पर चीन का गुलाम बनता जा रहा नेपाल अब अब अपनी जमीन भी खोता जा रहा है और जल्द ही नेपाल की सरकार नहीं चेती तो तिब्बत की तरह ही नेपाल के एक अलग देश कहलाए जाने पर ही खतरा पैदा हो जाएगा.

 
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