इन कारणों से शिक्षक की नौकरी नहीं पा सकेंगे TET पास बिहार के हजारों अभ्यर्थी !

शिक्षा विभाग के नए नियम के कारण हजारों अभ्यर्थी आने वाले नए वेकेंसी से बाहर हो जायेंगे. प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक के नियोजन के लिए 2019 में नई नियमावली की घोषणा की गई है

News18 Bihar
Updated: July 29, 2019, 2:43 PM IST
इन कारणों से शिक्षक की नौकरी नहीं पा सकेंगे TET पास बिहार के हजारों अभ्यर्थी !
बिहार के प्राइमरी और मीडिल स्कूलों में जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति होनी है
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Updated: July 29, 2019, 2:43 PM IST
बिहार में शिक्षा विभाग के नए नियम के कारण हजारो की संख्या में अभ्यर्थी नियोजन से बाहर होने की कगार पर हैं. शिक्षा विभाग के प्राथमिक शिक्षक नियोजन नियमावली 2019 में किए गए बदलाव के कारण हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटक गया है. अभ्यर्थी विभाग के अधिकारी से लेकर मंत्री तक गुहार लगा रहे हैं पर सुनने वाला कोई नहीं.

तो छंट जाएंगे हजारो अभ्यर्थी !

प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनने का सपना देखने वाले हजारों छात्रों ने बीएड किया. बीएड करने के बाद लगा कि कम से कम शिक्षक बनने का सपना पूरा हो जायेगा लेकिन शिक्षा विभाग के नए नियम ने सारे सपनों पर पानी फेर दिया. शिक्षा विभाग के नए नियम के कारण हजारों अभ्यर्थी आने वाले नए वेकेंसी से बाहर हो जायेंगे. प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक के नियोजन के लिए 2019 में नई नियमावली की घोषणा की गई है. इसके तहत सामाजिक विज्ञान के शिक्षक बनने के लिए स्नातक में इतिहास या भूगोल का विषय होना अनिवार्य कर दिया है पर चौंकाने वाली यह है कि इससे पहले 2011 और 2014 में हुए बहाली में ऐसी कोई बाध्यता नही रखी गई थी.

परीक्षा के वक्त नहीं थी बाध्यता

सरकार ने इतिहास और भूगोल के विषय की अनिवार्यता को शिथिल कर दिया था. सड़क पर उतरने को मजबूर शिक्षक अभ्यर्थियों को पहले से पता था. छात्र जब बीएड कर रहे थे या फिर TET की परीक्षा दे रहे थे उस समय ऐसी बाध्यता नहीं थी. विभाग के अचानक इस निर्णय ने शिक्षक अभ्यर्थियों के पैरों से जमीन खिसका दी है. नई बहाली की घोषणा कर दी गई है. अभ्यर्थी तैयारी भी कर रहे हैं पर विभाग के नए नियमों ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।
ग्राफिक्स -

कब कैसे बनी नियमावली
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शिक्षा विभाग ने 2012 में नियमावली बनाई. 2014 में नियमावली में संशोधन कर अधिसूचना जारी की गई. प्राथमिक शिक्षक के लिए इतिहास और भूगोल की अनिवार्यता ख़त्म की गई और नए नियमों के तहत ही नियुक्ति हुई. 2019 में नई नियमावली जारी की गई लेकिन अब इतिहास और भूगोल को अचानक अनिवार्य कर दिया गया.

हजारों शिक्षक अभ्यर्थी बाहर होने के कगार पर

शिक्षा विभाग के नए नियम के कारण अभ्यर्थियों पर क्या गुजर रही है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है. सालों से टकटकी लगाए शिक्षक अभ्यर्थियों को सुनने वाला कोई नही. कई ऐसे छात्र भी हैं जिनकी आयु सीमा इस साल ख़त्म हो रही है. शिक्षा विभाग के इस नियम से कई सवाल खड़े होते है.

विभाग पर सवाल

नए नियमों से शिक्षा विभाग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. जो सवाल खड़े हो रहे हैं उनमें पहला सवाल है कि आखिर शिक्षा विभाग ने अचानक नियम क्यों बदल लिया. नियम बदलने से पहले छात्रों को जानकारी क्यों नहीं दी गई. क्या नियमो के भेंट चढ़ जायेगा छात्रों का भविष्य. इस मामले में शिक्षा मंत्री क्यों संज्ञान नहीं ले रहे.

रिपोर्ट- रवि एस नारायण

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First published: July 29, 2019, 2:32 PM IST
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