नीतीश सरकार ने भी माना- अब तक 35 बच्चों की हुई मौत, 84 का चल रहा इलाज

न्यूज 18 की पुख्ता रिपोर्ट सामने आने के बाद बिहार के स्‍वास्‍थ्‍य विभाग के प्रधान सचिव ने AES की चपेट में आने से 35 बच्‍चों की मौत होने की बात स्‍वीकार की है. प्रधान सचिव संजय कुमार ने इस मामले में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई करने की भी बात कही है.

News18 Bihar
Updated: June 12, 2019, 1:51 PM IST
नीतीश सरकार ने भी माना- अब तक 35 बच्चों की हुई मौत, 84 का चल रहा इलाज
नीतीश सरकार ने माना कि इन्सेफेलाइटिस से 35 बच्चों की हुई मौत
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Updated: June 12, 2019, 1:51 PM IST
एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) से अब तक 48 बच्चों की जान जा चुकी है, लेकिन बिहार सरकार इससे इनकार करती रही थी. हालांकि न्यूज 18 की पुख्ता रिपोर्ट सामने आने के बाद अब सरकार ने भी मान लिया है कि 35 बच्चों की मौत हुई है. हालांकि, यह स्वीकारोक्ति वास्तविक आंकड़े (न्यूज 18 की पड़ताल के अनुसार) से 13 कम हैं.

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने स्वीकार किया कि अब तक 35 बच्चों की मौत हुई है. बता दें कि मंगलवार तक स्वास्थ्य विभाग 11 ही बच्चों की मौत ही मान रहा था. बहरहाल, प्रधान सचिव ने यह भी स्वीकार किया कि 84 बच्‍चों का अब भी इलाज चल रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार के 12 जिलों में AES का प्रभाव है.



AES से 12 जिले प्रभावित
प्रधान सचिव ने बताया कि 28 बच्चों की मुजफ्फरपुर के SKMCH और 7 की मौत केजरीवाल अस्पताल में हुई है. 12 प्रभावित जिलों के 222 पीएचसी में इसके इलाज की व्यवस्था की गई है. उन्होंने कहा कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारी और अधिकारियों को चिन्हित कर जल्द ही कार्रवाई की जाएगी.

अश्विनी चौबे का अजब बयान
बता दें कि इससे पहले मंगलवार को केंद्रीय स्वास्थ्य राज्यमंत्री अश्विनी कुमार चौबे ने कहा था कि मुजफ्फरपुर में बच्चों की मौत दुखद घटना है. चुनाव की वजह से अधिकारी चुनाव में व्यस्त हो गए थे, जिसकी वजह से जागरूकता की कमी रह गई. अगर बिहार सरकार केंद्र सरकार से मदद मांगेगी तो केंद्र सरकार पूरी मदद करेगा.

मंगल पांडे ने भी झाड़ा था पल्ला
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सोमवार को बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पाण्डेय ने कहा था कि अभी तक 11 बच्चों के मौत की पुष्टि हुई है, लेकिन इसमें AES यानि इन्सेफेलाइटिस से अभी तक किसी बच्चे की मौत नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि 10 बच्चों की मौत हाईपोगलेसिमिया से हुई है, जबकि एक बच्चे की मौत जापानी इन्सेफेलाइटिस से हुई है. जाहिर है मंत्री जी ने यहां अपने अधूरे ज्ञान का ही प्रदर्शन किया.

AES ग्रुप में आती हैं कई बीमारियां
दरअसल, स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार AES कई बीमारियों का समूह होता है और इसमें ही जापानी इन्सेफेलाइटिस या चमकी बुखार और हाईपोग्‍लेसीमिया दोनों ही आते हैं. इस तरह मंत्री ने अपने बयानों के जरिये उस बड़े विषय को किनारे करने की कोशिश की जिसकी जवाबदेही सीधे तौर पर स्वास्थ्य महकमे और बिहार सरकार की है. बता दें कि बिहार में AES यानि (एक्यूट इन्सेफेलाइटिस) से 12 जिले और 222 प्रखंड प्रभावित हैं.  मुजफ्फरपुर शहर के दो अस्पतालों में अब तक 48 बच्चों की मौत हो चुकी है. बीमारी के कहर को देखते हुए चार ICU चालू किए गए हैं, फिर भी बेड कम पड़ रहे हैं.

इनपुट- अमित कुमार

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