सुप्रीम कोर्ट में नीतीश सरकार ने माना- स्वास्थ्य सुविधाओं में फिसड्डी है बिहार

नीतीश सरकार ने अपने एफिडेविट में माना है कि ने माना है कि राज्य स्वास्थ्य विभाग में सभी स्तरों पर कम से कम 50 प्रतिशत पद रिक्त हैं. डॉक्टरों की 47 प्रतिशत कमी है, वहीं 71 प्नतिशत नर्सों के पद खाली हैं.

News18 Bihar
Updated: July 2, 2019, 6:23 PM IST
सुप्रीम कोर्ट में नीतीश सरकार ने माना- स्वास्थ्य सुविधाओं में फिसड्डी है बिहार
नीतीश सरकार ने माना- स्वास्थ्य क्षेत्र मेंकाफी पीछे है बिहार
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Updated: July 2, 2019, 6:23 PM IST
एक्यूट इन्सेफेलाइटिस सिंड्रोम (AES) यानी चमकी बुखार पर लगातार सवालों के घेरे में रही बिहार सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा देकर घिर गई है. बिहार में 174 से अधिक बच्चों की मौत मामले पर हुए मुकदमें में सरकार ने जो हलफनामा दाखिल किया है उसमें सरकार ने स्वास्थ्य व्यवस्था में खामी स्वीकार की है. सरकार ने माना है कि बिहार में स्वास्थ्य विभाग के लिए तय मानदंडों के अनुसार उपलब्ध मानव संसाधनों की कमी है.

नीतीश सरकार ने माना 47 प्रतिशत डॉक्टर कम
नीतीश सरकार ने अपने एफिडेविट में माना है कि ने माना है कि राज्य स्वास्थ्य विभाग में सभी स्तरों पर कम से कम 50 प्रतिशत पद रिक्त हैं. डॉक्टरों की 47 प्रतिशत कमी है, वहीं  71  प्नतिशत नर्सों के पद खाली हैं. बिहार सरकार ने कोर्ट के सामने भारी अफसोस जताया कि वो इस मामले में चाहते हुए नवजात बच्चों को बचा नहीं पायी है.

सरकार बोली- सीएम की इस मामले पर नजर

सरकार ने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा कि पूरे मामले में व्यक्तिगत रूप से मुख्यमंत्री की नजर थी. जानलेवा एईएस बीमारी को नियंत्रित करने और इसका इलाज करने के तरीकों को खोजने के लिए सीएम सक्रिय रूप से लगे हुए हैं.  सामाजिक और आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर बेहतर पोषण मुहैया कराने का आदेश सरकार ने दिया है. बता दें कि इसी हफ्ते सुप्रीम कोर्ट इस मामले में आगे की सुनवाई करेगा.

इनपुट- सुशील कुमार पांडे
First published: July 2, 2019, 6:23 PM IST
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