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नीलगाय पकड़ने से पहले लेनी होगी मुखिया की अनुमति, जानें क्या है नीतीश सरकार का नया फैसला

नीलगाय पकड़ने से पहले लेनी होगी मुखिया की अनुमति, जानें क्या है नीतीश सरकार का नया फैसला

बिहार में नीलगायों की धरपकड़ को लेकर सरकार ने मुखिया को विशेष जिम्मेदारी सौपी है (सांकेतिक फोटो)

बिहार में नीलगायों की धरपकड़ को लेकर सरकार ने मुखिया को विशेष जिम्मेदारी सौपी है (सांकेतिक फोटो)

Nilgay Rule In Bihar: बिहार में बड़ी आबादी कृषि कार्य करती है और कृषि ही उनका मुख्य पेशा है लेकिन हर साल किसानों को नीलगाय और जंगली सुअर जैसे जानवरों की वजह से काफी क्षति उठानी पड़ती है. किसानों की फसल नष्ट करने के मामले बड़े पैमाने पर सामने आते रहते हैं, ऐसे में इन मामलों में मुखिया को नए अधिकार दिए गए हैं.

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पटना. बिहार सरकार राज्य के सभी नवनिर्वाचित मुखिया (Mukhia) को एक नई जिम्मेवारी सौंपने जा रही है. सरकार ने किसानों की फसल और बागान नष्ट करने के साथ ही मानव जीवन को हानि पहुंचाने वाले जंगली जानवरों को पकड़ने की जिम्मेवारी नवनिर्वाचित मुखिया (Bihar Newly Elected Mukhia) को देने का फैसला लिया है. वन एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारी मुखिया से अनुमति लेकर ही नीलगायों (Nilgay) और सूअरों को पकड़ने का अभियान चलाएंगे. दरअसल वन एवं पर्यावरण विभाग की तरफ से इसको लेकर पंचायती राज विभाग को एक पत्र लिखा गया था.

इस पत्र के माध्यम से पंचायती राज विभाग से सहमति मांगी गई थी. पंचायती राज मंत्री सम्राट चौधरी ने इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि विभाग की ओर से सहमति प्रदान कर दी गई है. पंचायती राज मंत्री की मानें तो जंगली जानवरों में नीलगाय और सुअरों द्वारा किसानों की फसलों को बड़े पैमाने पर क्षति पहुंचाई जाती है, साथ ही मानव जीवन को भी इससे काफी हानि पहुंचता है. ऐसे में राज्य के सभी 8 हजार से अधिक पंचायतों के मुखिया को यह अधिकार दिया गया है कि वह फसल को नुकसान पहुंचाने वाले जंगली जानवरों को पकड़ने की अनुमति देंगे. पंचायती राज मंत्री ने इस बात की भी जानकारी दी है कि ग्रामीणों द्वारा जंगली जानवरों से फसलों की क्षति या मानव जीवन की क्षति पहुंचाने पर आवेदन मुखिया के पास भेजा जाएगा.

मुखिया की अनुमति मिलने के बाद ही वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा इन पंचायतों के जंगली जानवरों को पकड़ने के लिए कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी. किसानों को अगर फसल से काफी क्षति पहुंचती है तब पंचायती राज विभाग की अनुमति मिलने के बाद वन एवं पर्यावरण विभाग द्वारा आसानी से जंगली जानवरों को पकड़ा जा सकेगा. गौरतलब है कि जंगली जानवरों के द्वारा किसानों की फसल नष्ट करने के मामले बड़े पैमाने पर सामने आते रहते हैं. इन जंगली जानवरों में नीलगाय और सूअर सबसे ज्यादा फसलों को क्षति पहुंचाते हैं.

किसान अक्सर नीलगाय के खेत में जाने से फसल की खेती की बात स्वीकार करते हैं. इससे किसानों को बड़े पैमाने पर फसल का नुकसान सहना पड़ता है. ऐसे में अब मुखिया को बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. वन एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारी इस काम को करेंगे और निश्चित तौर पर मुखिया की इसमें अहम भूमिका होगी.

Tags: Bihar News, PATNA NEWS

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