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बिहार: अपने ही कर्मचारियों और पदाधिकारियों को प्रोमोशन नहीं दे रही सरकार

बिहार में कर्मचारियों व पदाधिकारियों के प्रोमोशन पर लगी रोक से असंतोष, नीतीश कुमार व अन्य (फाइल फोटो)
बिहार में कर्मचारियों व पदाधिकारियों के प्रोमोशन पर लगी रोक से असंतोष, नीतीश कुमार व अन्य (फाइल फोटो)

Patna News-बिहार सरकार ( Bihar Government) सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में केस लड़ रही है, लेकिन इस मामले में न्यायालय की तरफ से किसी तरह की कोई रोक नहीं लगाई गई है.

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पटना. बिहार में सभी तरह के कर्मचारियों और पदाधिकारियों को प्रोन्नति देने पर नीतीश सरकार (Nitish Government) ने रोक लगा रखी है. इस कारण बगैर प्रोन्नति के पिछले 2 साल में करीब 250 कर्मचारी और अधिकारी सेवानिवृत्त हो गए हैं. कर्मचारियों में इस बात को लेकर जहां असंतोष है, वहीं प्रोन्नति (Promotion) नहीं मिलने से सभी स्तर के कर्मचारियों पर काम का अतिरिक्त बोझ बढ़ा है. बिना प्रमोशन रिटायर होने वालों में बिहार प्रशासनिक सेवा (Bihar Administrative Service) के करीब 100 पदाधिकारी, जबकि बिहार सचिवालय सेवा के 150 कर्मचारी शामिल हैं.

इतनी बड़ी संख्या में सभी स्तर के कर्मचारियों के बिना प्रोन्नति सेवानिवृत्त होने की मुख्य वजह राज्य में 2019 से ही प्रोन्नति की प्रक्रिया पर रोक लगना है. वैसे इस मामले को लेकर राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट में केस लड़ रही है, लेकिन इस मामले में न्यायालय की तरफ से किसी तरह की कोई रोक नहीं लगाई गई है. वहीं, राज्य सरकार को अपने स्तर पर फैसले लेकर प्रोन्नति देने की छूट भी मिली हुई है.





दरअसल, राज्य सरकार ने सभी तरह के प्रोमोशन पर सुप्रीम कोर्ट के स्तर पर अंतिम फैसला आने तक रोक लगा दी है. इस वजह से राज सरकार के सभी स्तर के कर्मियों को परेशानी हो रही है. अपनी समस्या को लेकर राज्य के सभी कर्मचारी संघों ने एक महासंघ बना रखा है. महासंघ ने हाल के दिनों में सामान्‍य प्रशासन विभाग समेत सभी अधिकारियों से प्रोन्नति की समस्या को तत्काल प्रभाव से दूर करने की मांग रखी है, लेकिन इस मामले में अभी तक कुछ हुआ नहीं है.
प्रोन्नति नहीं मिलने से बिहार प्रशासनिक सेवा में प्रोन्नति से भरे जाने वाले विशेष सचिव के 23, अवर सचिव के 22, संयुक्त सचिव के 143 और एडीएम के 150 और उपसचिव रैंक के 81 पद खाली पड़े हुए हैं. इसी तरह बिहार सचिवालय सेवा के भी संयुक्त सचिव रैंक के 15, उपसचिव रैंक में 100, अवर सचिव स्तर पर 293 और प्रशाखा पदाधिकारी रैंक में करीब 600 पद खाली पड़े हुए हैं.

बिहार शिक्षा सेवा, बिहार स्वास्थ्य विभाग बिहार वित्त सेवा समेत कई विभागों में भी यही हाल है. बिहार सचिवालय सेवा संघ के महासचिव अशोक सिंह की मानें तो इस दिशा सरकार की उदासीनता कर्मचारियों पर भारी पड़ रही है. यह मामला जहां बिहार सरकार को कठघरे में खड़ा करता नजर आ रहा है. वहीं, सत्ता पक्ष इस मामले में सरकार की गंभीरता और तेजी से कार्रवाई करने की दुहाई दे रहा है.

कांग्रेस नेता प्रेमचन्द मिश्रा ने सरकार की मंशा पर स्वाल खडा करते हुए इसे कर्मचारियों के हित के विपरीत बताया. वहीं सत्तापक्ष भजपा के नेता मृत्युंजय झा की मानें तो सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है. बहरहाल बिहार में कर्मचारियों की प्रोन्नति का यह मामला काफी संवेदनशील है और देखना होगा सरकार इस मामले को लेकर समय रहते कितना कारगर कदम उठाती है.
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