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भ्रष्टाचार पर वारः पुलिसवालों से ही उगाही करते थे IPS अफसर, नीतीश सरकार ने किया सस्पेंड

भ्रष्टाचार पर वारः पुलिसवालों से ही उगाही करते थे IPS अफसर, नीतीश सरकार ने किया सस्पेंड

मुंगेर के पूर्व डीआईजी शफीउल हक को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया.

मुंगेर के पूर्व डीआईजी शफीउल हक को भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित किया गया.

Action Against Corruption in Police: आर्थिक अपराध इकाई द्वारा जांच के बाद इस साल निलंबित किए जाने वाले शफीउल हक तीसरे आईपीएस अधिकारी हैं. इसके पहले भी बालू माफियाओं से सांठगांठ कर अकूत संपत्ति अर्जित करने के आरोप में आइपीएस अधिकारी और औरंगाबाद के तत्कालीन एसपी सुधीर पोरिका के अलावा भोजपुर के पूर्व एसपी राकेश दुबे को निलंबित कर दिया गया था. राज्य सरकार के इस कदम से पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों में खलबली मची हुई है.

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पटना. इस बार सत्ता संभालने के बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस का डंडा घुमा रहे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सरकार की कार्रवाई लगातार जारी है. यह डंडा नीचे से ऊपर तक ‘भ्रष्टों’ पर लगातार चल रहा है. बिहार सरकार ने अब एक बड़ी कार्रवाई करते हुए मुंगेर में डीआईजी रहे आईपीएस अधिकारी मोहम्मद शफीउल हक को निलंबित कर दिया है. बुधवार की रात गृह विभाग ने निलंबन से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी.

मोहम्मद शफीउल हक पर आरोप है कि मुंगेर में डीआईजी के पद पर तैनाती के दौरान वे अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों से पैसे की उगाही करते थे. 2007 बैच के आईपीएस अधिकारी मोहम्मद शफीउल हक अभी पुलिस मुख्यालय में पदस्थापना की प्रतीक्षा में थे.

आर्थिक अपराध इकाई को मिले थे काफी सबूत

बता दें कि आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट में उनके खिलाफ गृह विभाग को साक्ष्य पेश कर करते हुए उसे तमाम चीजों की जानकारी दी थी. इसी रिपोर्ट के आधार पर गृह विभाग ने आईपीएस अधिकारी शफीउल हक के अलावा उनके सहायक अवर निरीक्षक मोहम्मद उमरान एवं एक निजी व्यक्ति को लेकर तमाम बिंदुओं पर समीक्षा की थी. इन् दोनों के माध्यम से शफीउल हक मुंगेर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई मातहत पुलिस अधिकारियों और कर्मियों से लगातार अवैध राशि की उगाही किया करते थे.

ऐसे चली गृह विभाग की कार्रवाई

आर्थिक अपराध इकाई ने अपनी जांच में यह भी पाया है कि मोहम्मद इमरान के गलत काम संज्ञान में होने के बावजूद बतौर डीआईजी शफीउल हक ने किसी तरह की कोई निरोधात्मक कार्रवाई इनके खिलाफ नहीं की. इससे यह स्पष्ट हो गया था कि पूरे मामले में बतौर डीआईजी उनकी सहभागिता थी. गृह विभाग ने मामला संज्ञान में आने के बाद विभागीय कार्रवाई शुरू की कर दी थी. इस दौरान आईपीएस अधिकारी के खिलाफ साक्ष्यों और गवाहों की सूची भी जारी की गई. मामले की गंभीरता को देखते हुए बिहार सरकार ने शफीउल हक को निलंबित करने का फैसला लिया है. इस दौरान उनका मुख्यालय पटना रेंज के आईजी का कार्यालय होगा. निलंबन अवधि में मोहम्मद शफीउल हक को केवल जीवन निर्वाह भत्ता ही राज्य सरकार की तरफ से देय होगा.

निलंबित होने वाले शफी तीसरे ‘भ्रष्ट’ IPS

इस साल निलंबित किए जाने वाले शफीउल हक तीसरे आईपीएस पदाधिकारी हैं. इसके पहले भी बालू माफियाओं से सांठगांठ कर अकूत संपत्ति अर्जित करने के आरोप में आइपीएस अधिकारी और औरंगाबाद के तत्कालीन एसपी सुधीर पोरिका के अलावा भोजपुर के पूर्व एसपी राकेश दुबे को निलंबित कर दिया गया था. राज्य सरकार के इस कदम से भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों में खलबली मची हुई है.

नीतीश कुमार का भ्रष्टाचार के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’

दरअसल, नीतीश सरकार शुरू से ही भ्रष्टाचार को लेकर जीरो टॉलरेंस की बात करती रही है. इस बार सत्ता संभालने के बाद पिछले 1 साल में जिस तरीके से विभिन्न एजेंसियों ने भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की है ऐसे मैं अकूत संपत्ति अर्जित करने वाले भ्रष्टाचार में लिप्त अफसरों की मुसीबत लगातार बढ़ती जा रही है.

Tags: Anti corruption branch, Bihar Government, Bihar News, CM Nitish Kumar, Corruption news, PATNA NEWS

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