बिहार सरकार के 100% विद्युतीकरण के दावे पर CAG ने उठाए सवाल

कैग ने अपनी रिपोर्ट में बिहार सरकार के उस दावे को गलत बताया है, जिसमें 100 फीसदी विद्युतीकरण की बात कही गई थी. (File)

कैग ने अपनी रिपोर्ट में बिहार सरकार के उस दावे को गलत बताया है, जिसमें 100 फीसदी विद्युतीकरण की बात कही गई थी. (File)

बिहार सरकार के 100 फीसदी विद्युतीकरण के दावे पर सवाल उठ रहे हैं. कैग (CAG) की रिपोर्ट में सामने आया है कि 100 फीसदी क्या, बिहार में 70 फीसदी विद्युतीकरण भी नहीं हुआ है. सरकार ने डीपीआर के आधार पर 100 फीसदी विद्युतीकरण का दावा कर दिया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2021, 5:02 PM IST
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पटना. बिहार सरकार (Bihar Government) ने साल 2019 के मार्च में दावा किया था की पूरे बिहार में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण कर दिया गया है. तब के सरकारी दावे के अनुसार, राज्य के हर गांव तक बिजली पहुंच गई और गांव के हर एक घर में बिजली का कनेक्शन कर दिया गया था, लेकिन सीएजी की रिपोर्ट (CAG Report) में बिहार सरकार के दावे को सच नहीं माना गया है. रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि जिस वक्त बिहार सरकार ने 100 फीसदी विद्युतीकरण का दावा किया था, उस समय बिहार में विद्युतीकरण का केवल 70.61 फ़ीसदी ही काम हो पाया था.

CAG ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सरकार के दावे में कोई दम ही नहीं है. हालांकि सीएजी ने जो रिपोर्ट दी है उससे संबंधित सभी मामले 2019 मार्च के पहले के हैं. सच तो यह है कि बिहार सरकार ने केवल DPR के आधार पर ही 100 फीसदी विद्युतीकरण का दावा कर दिया था, लेकिन सीएजी की माने तो 2011 की जनगणना के आंकड़ों और डीपीआर के आंकड़ों की तुलना में सही मायने में ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित घरों का विद्युतीकरण 70.61% से 68.68% के बीच ही था. यही नहीं घरों की कुल संख्या और विद्युतीकरण हो चुके घरों की संख्या में भी काफी अंतर पाया गया है. साथ ही गरीबी रेखा के नीचे के घरों के मामले भी बिजली प्रदान करने के डीपीआर लक्ष्य का मात्र 41.19% ही था.

सच तो यह है कि DPR वास्तविक क्षेत्र सर्वेक्षण के आधार पर तैयार नहीं हुए थे. लिहाजा डीपीआर में जो दावा किया गया था और धरातल पर जो काम हुए थे उसकी मात्रा में काफी अंतर था. RGGVY और DDUGJY योजना के तहत परियोजनाओं के दोषपूर्ण अनुबंध, प्रबंधन निगरानी की कमी और अक्षम निष्पादन के कारण देरी हुई थी. कार्य का आवंटन भी अयोग्य ठेकेदारों को सौंपा गया था. लंबे समय में डिस्कॉम की वित्तीय स्थिरता भी जोखिम पूर्ण है.
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