Bihar Assembly Elections: इस बार चुनाव से पहले जनता मंत्रियों और विधायकों को रही खदेड़, क्या हैं इसके मायने

सीएम नीतीश कुमार ने राज्यसभा में विपक्ष के हंगामें को गलत बताया है. (फाइल फोटो)
सीएम नीतीश कुमार ने राज्यसभा में विपक्ष के हंगामें को गलत बताया है. (फाइल फोटो)

Bihar Assembly Elections: हाल के दिनों में नीतीश सरकार (Nitish Gov.) के कई मंत्रियों (Ministers) और विधायकों (Mla's) ने मारपीट का आरोप लगाया है. एनडीएए (NDA) के ये विधायक और मंत्री आरजेडी (RJD) समर्थकों पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हैं, लेकिन हकीकत में माजरा कुछ और ही है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 11:25 PM IST
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नई दिल्ली. बिहार विधानसभा चुनाव 2020 की सुगबुगाहट के बीच नेताओं के साथ मारपीट की घटनाओं में भी तेजी आ गई है. नीतीश सरकार (Nitish Government) के कई मंत्रियों और विधायकों (Ministers and Mla's) को बिहार के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ रहा है. आरजेडी (RJD) के भी कई विधायकों के साथ इस तरह की घटनाएं हो रही हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार की जनता इस बार इतना उग्र क्यों है? बिहार में अगर विकास हुआ है तो फिर मंत्रियों और विधायकों का जनता विरोध क्यों कर रही है? क्यों इस बार का बिहार विधानसभा चुनाव बदला-बदला सा नजर आ रहा है? बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा अब किसी भी वक्त हो सकती है. इधर जनता के बढ़ते विरोध से एनडीए गठबंधन में खासी घबराहट हो गई है.

मंत्रियों और विधायकों के विरोध के मायने
बता दें कि विकास के मुद्दे पर बिहार की जनता तीखे सवालों से परहेज करती रही है, क्योंकि बिहार में हमेशा से ही विकास की नहीं जाति पर बात होती है, लेकिन इस बार जनता सत्ताधारी दल के विधायकों और मंत्रियों से विकास पर ही सवाल पूछ रही है. सोशल साइट्स पर एनडीए विरोधी गतिविधियों ने बीजेपी को सकते में डाल दिया है.

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विकास के मुद्दे पर बिहार की जनता तीखे सवालों से परहेज करती रही है. (फाइल फोटो)

एक दर्जन से भी ज्यादा मंत्रियों और विधायकों का हुआ विरोध


हाल के दिनों में नीतीश सरकार के कई मंत्रियों और विधायकों ने मारपीट का आरोप लगाया है. एनडीए के ये विधायक और मंत्री आरजेडी समर्थकों पर इसका ठीकरा फोड़ रहे हैं, लेकिन हकीकत में नजारा कुछ और ही है. पिछले दिनों बिहार के औरंगाबाद जिले के गोह विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक मनोज शर्मा और बिहार सरकार के मंत्री और बीजेपी नेता प्रेम कुमार का गोह के एक गांव में ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया. मंच पर बैठे विधायक और मंत्री के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई. इस सभा में सीएम नीतीश कुमार के खिलाफ भी जमकर नारेबाजी हुई.



लोगों का यह आरोप
इसी तरह कुछ दिन पहले ही बिहार के ग्रामीण विकास मंत्री शैलेश कुमार को उनके विधानसभा क्षेत्र जमालपुर में लोगों ने विरोध किया. एक दिन पहले ही शिवहर के जेडीयू एमएलए सरफुद्दीन का वीडियो तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. इस वीडियो में जनता विधायक जी खदेड़ रही है. लोगों का आरोप है कि पांच साल तक विधायक जी नहीं आए अब चुनाव है तो कह रहे हैं कि पिछले पंद्रह सालों से यहां विकास की गंगा बह रही है.

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चुनाव नजदीक आया है तो वोट मांगने पहुंच गए हैं. (फाइल फोटो)


विपक्षी दलों के विधायकों को भी खदेड़ा जा रहा है
बिहार में सत्ताधारी दलों के विधायकों और मंत्री को खदेड़ने का सिलसिला लगातार जारी है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ सत्ताधारी दलों के ही विधायकों को खजेड़ा जा रहा है. आरजेडी के भी कई विधायकों को जनता खदेड़ने के साथ-साथ तीखे सवाल पूछ रही है.

लॉकडाउन और कोरोना ने खेल बिगाड़ दिया?
बिहार को करीब से जानने वाले वरिष्ठ पत्रकार संजीव पांडेय कहते हैं, 'कोरोना महामारी और लॉकडाउन ने बिहार के विकास की पोल खोल दी है. बिहार के 50 प्रतिशत से भी ज्यादा युवाओं के पास रोजगार नहीं है. 2005 मे नीतीश कुमार ने दावा किया था कि राज्य में इतना विकास करेंगे कि राज्य के लोग दूसरे राज्यों में रोजगार के लिए नहीं जाएंगे, लेकिन 15 सालों के बाद स्थिति और खराब हो गई है. दूसरे राज्यों में काम कर रहे लाखों मजदूर लॉकडाउन का शिकार हो गए हैं. लॉकडाउन का खामियाजा बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है. लाखों प्रवासी मजदूरों की रोजी-रोटी छिन गई है. ऐसे में अगर बिहार में पिछड़े, अति पिछड़े और दलित जातियों का विकास हुआ तो ये दूसरे राज्यों में रोजगार की तलाश में क्यों गए?'

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पांडेय कहते हैं, 'बिहार का विकास का दावा करने वाली नीतीश सरकार को ये प्रवासी मजदूर ही राज्य के विकास में अपना योगदान देते रहे हैं. ज्यादातर प्रवासी बिहारी हर महीने 3 से 4 हजार रूपया अपने घर भेजता है. घर के सदस्य इस पैसे को बाजार में खर्च करता है, इससे राज्य के विकास में गति आती है. दूसरे राज्यों में कामकाजी बिहारी अपने राज्य में सलाना 30 हजार करोड़ रुपया भेजता है. यही नहीं बिहार के बहुत सारे लोग खाडी के देशों में भी श्रम कर रहे हैं. बाहरी मुल्कों में काम करने वाले बिहारी सलाना अपने राज्य में लगभग 7 हजार करोड़ रुपये भेज रहे हैं, लेकिन कोरोना और लॉकडाउन की मार इसपर भी पड़ी है.'
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