तो बिहार की सियासत के 'मिस्टर कम्पलसरी' हो जाएंगे नीतीश कुमार !

नीतीश कुमार अपने वोट बैंक लगातार एक्सपैंड करने की कोशिश में हैं. ऐसे में जेडीयू अगर किसी वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है तो वह मुस्लिम वोट ही है.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: July 26, 2019, 12:53 PM IST
तो बिहार की सियासत के 'मिस्टर कम्पलसरी' हो जाएंगे नीतीश कुमार !
बिहार में पिछड़ी, अति पिछड़ी महादलितऔर अल्पसंख्यक वोटों पर फोकस कर रहे हैं नीतीश कुमार
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: July 26, 2019, 12:53 PM IST
बिहार की सियासत के संदर्भ में हाल में तीन खबरों ने सबका ध्यान खींचा है. पहला गुरुवार को जब लोकसभा में तीन तलाक बिल का विरोध करते हुए जेडीयू ने वोटिंग का बायकॉट किया. दूसरा बीते  रविवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आरजेडी के बड़े नेता अब्दुल बारी सिद्दीकी के घर जाकर अकेले में आधे घंटे गुफ्तगू की और तीसरा 28 जुलाई को आरजेडी के अल्पसंख्यक चेहरा माने जाने वाले अशफ अली फातमी के 28 जुलाई को जेडीयू ज्वाइन करने की खबर. राजनीतिक जानकारों की माने तो ये नीतीश कुमार की लंबी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है.

अल्पसंख्यकों को साधने की कोशिश में नीतीश
राजनीतिक जानकारों की मानें तो नीतीश कुमार के निशाने पर अल्पसंख्यक वोटर हैं जिन्हें वे अपने पाले में करना चाहते हैं. वरिष्ठ पत्रकार फैजान अहमद मानते हैं कि चूंकि नीतीश कुमार 14 साल से मुख्यमंत्री हैं, वे लेकिन कोई वोट बैंक नहीं बना है. नीतीश कुमार अपने वोट बैंक लगातार एक्सपैंड करने की कोशिश में हैं. ऐसे में जेडीयू अगर किसी वोट बैंक को अपनी ओर आकर्षित कर सकती है तो वह मुस्लिम वोट ही है.

लालू यादव की गैरमौजूदगी का फायदा

बकौल फैजान अहमद 2019 लोकसभा चुनाव का परिणाम देखें तो साफ है कि मुसलमानों का झुकाव जेडीयू की तरफ हुआ है. दरअसल अल्पसंख्यक समुदाय भी मान रहा है कि लालू यादव की अनुपस्थिति में आरजेडी का वोट बेस कमजोर हुआ है ऐसे में उनके लिए जेडीयू स्वाभाविक विकल्प बनती जा रही है.

Nitish-Lalu
नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव (फाइल फोटो)


ये तीन चुनाव देते हैं संकेत
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फैजान अहमद कहते हैं कि 2010 का विधानसभा चुनाव, 2014 और 2019 का लोकसभा चनाव परिणामों के आधार पर कहा जा सकता है कि यादव वोटों में बिखराव हो रहा है और वह बीजेपी की तरफ शिफ्ट हो रहा है. वहीं, मुस्लिम वोट धीरे-धीरे ही सही, नीतीश के चेहरे पर जेडीयू से जुड़ता जा रहा है.

अल्पसंख्यकों को 'सिग्नल' दे रहे हैं नीतीश
बीते रविवार को अब्दुल बारी सिद्दीकी से मुलाकात पर फैजान अहमद कहते हैं कि ऐसा नहीं है कि सिद्दीकी साहब जेडीयू ज्वाइन करने ही जा रहे हैं. लेकिन यह तथ्य है कि नीतीश का खुद पहल कर दरभंगा स्थित उनके घर पर जाकर मिलना और स्थानीय बीजेपी सांसद को जानकारी तक नहीं देना, एक तरह से अल्पसंख्यकों को आकर्षित करने का ही सिग्नल है.

तेजस्वी यादव की अनुभवहीनता का लाभ
फैजान अहमद मानते हैं कि लालू यादव की अनुपस्थिति और तेजस्वी यादव की अनुभवहीनता से जहां यादव वोटों में बिखराव है, वहीं अल्पसंख्यकों को लग रहा है कि तेजस्वी अपनी जाति को इंटैक्ट नहीं रख पा रहे तो आने वाले समय में उन्हें इसका नुकसान होगा. इसलिए अल्पसंख्यक भी अब आरजेडी से टूटने लगे हैं.

अल्पसंख्यक इलाकों पर फोकस
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार अशोक कुमार शर्मा कहते हैं कि लोकसभा चुनाव में यह बात साबित हो गयी है कि नीतीश कुमार की पकड़ अल्पसंख्यकों में है. किशनगंज में तीन लाख वोट लाने के साथ महज 37 हजार वोटों से हार और कटिहार की सीट पर जेडीयू उम्मीदवार का जीत जाना, इ, बात की तस्दीक करती है कि उन्हें मुस्लिम समर्थन दे रहे हैं. नीतीश कुमार ने बीते लोकसभा चुनाव में जिस तरह से टिकट बंटवारा किया और मुस्लिम इलाकों पर फोकस किया, यह उनकी आने वाली रणनीति का हिस्सा है.

नीतीश कुमार मुस्लिमों से संबंधित कोई भी कार्यक्रम मिस नहीं करते (फाइल फोटो)


मुस्लिमों को जेडीयू से जोड़ना चाहते हैं नीतीश
बकौल अशोक शर्मा सिद्दीकी से मुलाकात और फातमी के जेडीयू में शामिल होने की खबरों से साफ है कि नीतीश कुमार अल्पसंख्यकों को संदेश दे रहे हैं कि अब आरजेडी छोड़ जेडीयू में शिफ्ट हो जाएं. दरअसल सिद्दीकी साहब अल्पसंख्यक समुदाय ही नहीं बल्कि एक शालीन छवि के नेता हैं, इसलिए अल्पसंख्यक चेहरे से ऊपर भी उनकी पहचान है. ऐसे में नीतीश चाहते हैं कि कोई कद्दावर मुस्लिम चेहरा विधानसभा चुनाव में उनके पास हो तो वह 'अजेय' हो जाएंगे.

नीतीश के पास बड़ा अल्पसंख्यक चेहरा नहीं
अशोक शर्मा मानते हैं कि सिद्दीकी फिलहाल जेडीयू नहीं जाएंगे, लेकिन नीतीश कुमार की पहल एक संकेत है और राजनीति में संकेत का भी महत्व होता है. ऐसे भी नीतीश कुमार बिहार में बिना मजबूत जनाधार के भी बिहार में सबसे बड़े नेता हैं. और, वे इस तमगे को बनाए रखने के लिए लगातार कोशिश भी करते रहते हैं. ऐसे में पूरे प्रकरण में सिद्दीकी का तोड़ क्या है? इस पर भी वह लगातार काम कर रहे हैं.

Nitish kumar
नीतीश कुमार (फाइल फोटो)


मुस्लिमों के लिए मैसेज छोड़ रहे नीतीश
अशोक शर्मा कहते हैं कि 28 जुलाई को अशरफ अली फातमी के जेडीयू ज्वाइन करने के साथ ही नीतीश के पास एक बड़ा मस्लिम चेहरा हो जाएगा. वहीं मधुबनी से पूर्व सांसद शकील अहमद के भी नीतीश के 'टच' में रहने की खबरें आ रही हैं. जाहिर है नीतीश कोशिश कर रहे हैं कि जिनका नाम है, छवि है और असर भी है, अल्पसंख्यक समाज के ऐसे लोग उनके साथ आ जाएं.

तो नीतीश को हराना होगा नामुमकिन
अशोक शर्मा कहते हैं कि लालू यादव के नहीं रहने से आरजेडी के कई सीनियर नेता खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे हैं. ऐसे में नीतीश उन्हें भी साधने की कोशिश में हैं. हालांकि यह तथ्य है कि उनके निशाने पर यादव नेता नहीं हैं. दरअसल नीतीश मानते हैं कि अति पिछड़ा, गैर यादव पिछड़ा वोट, अल्पसंख्यकों का बड़ा हिस्सा और महादलितों का पचास फीसदी साथ उनके साथ आ जाए तो बिहार में उन्हें हराना नामुकिन हो जाएगा. ऐसे में वह आने वाली राजनीति के लिए 'मिस्टर कम्पलसरी' हो जाएंगे.

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First published: July 26, 2019, 12:48 PM IST
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