प्रशांत किशोर का नीतीश पर 'प्रहार', बोले- थके और महत्वहीन CM के शासन को तैयार रहे बिहार

प्रशांत किशोर जेडीयू में बड़े पद रह चुके हैं.
प्रशांत किशोर जेडीयू में बड़े पद रह चुके हैं.

नीतीश कुमार (Nitish Kumar) पर चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) ने तंज कसा है. कभी जेडीयू उपाध्यक्ष रहे किशोर ने कहा कि नीतीश भाजपा के मनोनीत मुख्‍यमंत्री और थके हुए नेता हैं.

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  • Last Updated: November 16, 2020, 11:04 PM IST
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नई दिल्ली/पटना. चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) ने सोमवार को बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार (Nitish Kumar) के सातवीं बार शपथ ग्रहण करने के बाद उन पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें भाजपा ने इस पद पर ‘मनोनीत’ किया है. उन्‍होंने कहा कि बिहार को कुछ और सालों तक ‘एक थके हुए और राजनीतिक रूप से महत्वहीन हो गए नेता’ के प्रभावहीन शासन के लिए तैयार रहना चाहिए. आपको बता दें कि कभी नीतीश के करीबी सहयोगी रहे किशोर को जेडीयू उपाध्यक्ष बनाया गया था, लेकिन उनके स्वतंत्र और अक्सर विरोधाभासी विचारों की वजह से दोनों के रिश्तों में खटास आ गयी और उन्हें पार्टी से निकाल दिया गया.

प्रशांत किशोर ने किया ट्वीट
प्रशांत किशोर ने ट्वीट किया, ‘भाजपा मनोनीत मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने के लिए नीतीश कुमार को बधाई. मुख्यमंत्री के रूप में एक थके और राजनीतिक रूप से महत्वहीन हुए नेता के साथ बिहार को कुछ और सालों के लिए प्रभावहीन शासन के लिए तैयार रहना चाहिए. ट्विटर पर बहुत सक्रिय रहने वाले किशोर ने पिछले करीब चार महीने में यह पहला ट्वीट किया है.





आपको बता दें कि नीतीश कुमार ने 7वीं बार सीएम पद की शपथ ली है और वह राज्य के मुख्यमंत्री पद पर सर्वाधिक लंबे समय तक रहने वाले श्रीकृष्ण सिंह के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की ओर बढ़ रहे हैं जिन्होंने आजादी से पहले से लेकर 1961 में अपने निधन तक इस पद पर अपनी सेवाएं दी थीं. कुमार ने सबसे पहले 2000 में प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी लेकिन बहुमत नहीं जुटा पाने के कारण उनकी सरकार सप्ताह भर चली और उन्हें केंद्र में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री के रूप में वापसी करनी पड़ी थी.



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पांच साल बाद वह जेडीयू-भाजपा गठबंधन की शानदार जीत के साथ सत्ता में लौटे और 2010 में गठबंधन के भारी जीत दर्ज करने के बाद मुख्यमंत्री का सेहरा एक बार फिर से नीतीश कुमार के सिर पर बांधा गया. इसके बाद मई 2014 में लोकसभा चुनाव में जेडीयू की पराजय की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया, लेकिन जीतन राम मांझी के बगावती तेवरों के कारण उन्हें फरवरी 2015 में फिर से कमान संभालनी पड़ी थी.
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