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Opinion: सीएम नीतीश कुमार के शराबबंदी वाले 'ड्रीम प्रोजेक्ट' को कौन कर रहा है कमजोर ?

Opinion: सीएम नीतीश कुमार के शराबबंदी वाले 'ड्रीम प्रोजेक्ट' को कौन कर रहा है कमजोर ?

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने पिछले दिनों ही शराबबंदी कानून की राज्यव्यापी समीक्षा की है (फाइल फोटो)

बिहार के सीएम नीतीश कुमार ने पिछले दिनों ही शराबबंदी कानून की राज्यव्यापी समीक्षा की है (फाइल फोटो)

Bihar Liquor Ban Policy: बिहार में सख्ती के साथ लागू शराबबंदी कानून के बावजूद तस्करी का दो मॉडल काम कर रहा है. शहरों में जहां हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, झारखंड जैसे राज्यों से विदेशी शराब चोरी छिपे लाकर बेची जा रही है वहीं ग्रामीण इलाकों में देशी शराब बनाकर वहीं से इसकी सप्लाई की जाती है.

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पटना. बिहार के सीएम नीतीश कुमार (Nitish Kumar) समाज सुधार अभियान पर निकलने वाले हैं. उनकी यात्रा का मुख्य बिंदु शराबबंदी को लेकर लोगों में फिर से जागरुकता फैलाना भी है. शराबबंदी (Bihar Liquor Ban) सीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट है. इसको सफल बनाने के लिेए नीतीश कुमार पूरी ताकत झोंके हुए हैं लेकिन राज्य में शराब की आपूर्ति पूरी तरह से रुकी नहीं है. श्मशान घाट से लेकर कॉलेज के हॉस्टल तक से शराब की बरामदगी हो रही है. आखिर कहां चूक हो रही है कि तमाम प्रयासों के बावजूद शराब माफिया अपना जाल फैलाने में सफल हो जा रहे हैं.

नेता,पुलिस और तस्कर का नापाक गठजोड़

शऱाबबंदी को सफल बनाने की अहम जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन पर है लेकिन चंद पैसों की खातिर सरकारी मुलाजिम शराब तस्करों के मददगार बन जा रहे हैं. आए दिन शराब तस्करों से पुलिस की मिलीभगत की खबर सुर्खियों में आती है. बीते रविवार को ही समस्तीपुर के विभूतिपुर थाना में कार्यरत ASI अरुण पटेल को शराब माफिया से सांठगांठ के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया. कुछ दिन पहले गोपालगंज के कटैया थाना के ASI चंद्रमा राम को शराब पीने के जुर्म में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. और तो और जिस विभाग पर शराब के अवैध धंधे की रोकथाम का जिम्मा है यानि उत्पाद विभाग के अधिकारी के ठिकानों पर भी छापे पड़े हैं. पिछले दिनों पूर्वी चंपारण के उत्पाद अधीक्षक अविनाश प्रकाश के तीन ठिकानों पर स्पेशल विजिलेंस यूनिट (एसवीयू) की टीम ने छापेमारी की तो करोड़ों की अवैध संपत्ति का पता चला. आंकड़े बताते हैं कि शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक 700 से ज्यादा पुलिसकर्मियों पर विभागीय कार्रवाई हुई है. कुछ जनप्रतिनिधि भी शराब माफिया को फायदा पहुंचा रहे हैं. हाल ही में सीवान में सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन और आरजेडी नेता रामायण चौधरी को पुलिस ने शराब तस्करों की निशानदेही पर गिरफ्तार किया.

बेरोजगार युवा बना रहे करियर

रोजगार के अभाव में युवा शराब तस्करों के झांसे में आ जा रहे हैं. बेरोजगार युवा कुछ कमाई के लालच में शराब माफिया का करियर बनकर शराब की होम डिलीवरी करते हैं. एक बार अगर वे इस धंधे में आ जाते हैं तो इससे निकलना फिर उनके लिए मुश्किल हो जाता है क्योंकि शराब माफिया उन्हें डरा धमका कर फिर से काम करने के लिए मजबूर कर देते हैं. आर्थिक तौर पर कमजोर तबके के लोग इनके सॉफ्ट टारगेट होते हैं. लालच देकर इन लोगों ने बच्चों और महिलाओं को भी अपने गैंग में शामिल कर लिया है. खास कर थोड़ी दूरी पर शराब की डिलीवरी में शराब तस्कर महिलाओं और बच्चों का इस्तेमाल करते हैं.

नीतीश सरकार की शराबबंदी पर उनके विरोधी और सरकार के सहयोगी भी सवाल खड़े करते रहते हैं (फाइल फोटो)

खुली सीमा होने से निगरानी में परेशानी
नेपाल से खुली सीमा होने के कारण सीमावर्ती जिले पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण और मधुबनी के ग्रामीण इलाकों में शराब की तस्करी बड़े पैमाने पर होती है. यहां तक कि नेपाल के सुस्ता से नाव के जरिए कच्ची शराब लाई जाती है. सीमा खुली होने के कारण लोग आसानी से नेपाल में शराब पीकर वापस लौट जाते हैं. एक अनुमान के मुताबिक केवल रक्सौल बॉर्डर से रोजाना दो हजार से अधिक लोग शराब पीने नेपाल जाते हैं. नेपाल के सीमावर्ती इलाके वीरगंज, रौतहट, सर्लाही, परसा और मुसहरवा में पिछले पांच साल में शराब की कई दुकान खुल गयी हैं. यही वजह है कि इंडो-नेपाल बार्डर को शराब के तस्करों का सेफ जोन माना जाता है.

शराब तस्करी के दो मॉडल

मोटे तौर पर बिहार में शराब तस्करी का दो मॉडल काम कर रहा है. शहरों में जहां हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश, झारखंड जैसे राज्यों से विदेशी शराब चोरी छिपे लाकर बेची जा रही है वहीं ग्रामीण इलाकों में देशी शराब की सप्लाई की जाती है. देशी शराब स्थानीय स्तर पर स्प्रिट, महुआ जैसी चीजों से बनाई जाती है. यही शराब ज्यादा नशीली बनाने के चक्कर में बहुतों बार जहरीली हो जाती है जिसके कारण आए दिन मौत की खबरें सामने आती है. अवैध शराब की तस्करी में एक तिहाई से अधिक हिस्सेदारी देसी शराब की है.

सरकार और सामाजिक संगठन अपने स्तर पर शराबबंदी को सफल बनाने के लिए तमाम कदम उठा रही है लेकिन सरकार अकेले अपने दम पर कुछ नहीं कर सकती. लोगों को भी खुद ब खुद आगे आना होगा और अच्छे नागरिक की भूमिका निभानी होगी.साथ ही भ्रष्ट सरकारी बाबूओं पर भी कठोर कार्रवाई करनी होगी ताकि शराब माफिया अपने नापाक इरादे को पूरा नहीं कर पाएं. हरियाणा, झारखंड और पंजाब जैसे राज्यों से शराब की खेप लगातार पकड़ी जा रही है. इन राज्यों की सरकारों से सहयोग के बिना शराब की आमद को रोकना मुश्किल है. बिहार सरकार को इन राज्यों से भी व्यापक सहयोग की जरूरत है.

Tags: Bihar Liquor Smuggling, Bihar News, Liquor Ban, Nitish kumar, PATNA NEWS

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