नीतीश कुमार बना रहे हैं कैबिनेट विस्तार की योजना, ये हो सकते हैं नए मंत्री

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कैबिनेट विस्तार की योजना बना रहे हैं जिसमें हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी की झलक दिखाई देगी. ये कवायद गुड गवर्नेंस के अलावा सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए की जाएगी.

Alok Kumar | News18 Bihar
Updated: August 11, 2018, 6:27 AM IST
नीतीश कुमार बना रहे हैं कैबिनेट विस्तार की योजना, ये हो सकते हैं नए मंत्री
नीतीश कुमार (File Photo)
Alok Kumar
Alok Kumar | News18 Bihar
Updated: August 11, 2018, 6:27 AM IST
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कैबिनेट विस्तार की योजना बना रहे हैं, जिसमें हाल के राजनीतिक घटनाक्रम और 2019 के लोकसभा चुनाव  की तैयारी की झलक दिखाई देगी. ये कवायद गुड गवर्नेंस के अलावा सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए की जाएगी.

सूत्रों के मुताबिक, नीतीश की कोशिश दलितों में पैठ बढ़ाने और गैर यादव अन्य पिछड़ा वर्ग को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने की है. हाल के दिनों में एससी-एसटी एक्ट को लेकर दलितों ने मोदी सरकार के खिलाफ असरदार आंदोलन किया है.

बिहार में भी दो अप्रैल का भारत बंद असरदार रहा था. इसके अलावा जीतन राम मांझी के महागठबंधन में जाने के बाद नीतीश किसी दलित को कैबिनेट में जगह देकर एक राजनीतिक संदेश देना चाहेंगे. इस लिहाज से श्याम रजक और कांग्रेस छोड़ कर जेडीयू का दामन थामने वाले अशोक चौधरी के नाम सबसे आगे हैं.

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मुजफ्फरपुर बालिका गृह सेक्स स्कैंडल मामले में अपने पति का नाम उछलने के बाद समाज कल्याण मंत्री के पद से इस्तीफा देने वाली मंजू वर्मा की जगह किसी कुशवाहा जाति के ही नेता को मंत्री बनाने की चर्चा है. जिस भावुकता के साथ मंजू वर्मा ने इस्तीफा दिया, उससे इस जाति के भीतर एक हद तक सहानुभूति है. ये संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि आखिर मुजफ्फरपुर कांड के मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के कॉल रिकॉर्ड को सेलेक्टिव तरीके से क्यों लीक किया गया?

कुशवाहा जाति से कई नेता इसके दावेदार हो सकते हैं, जिनमें अभय कुशवाहा और उमेश कुशवाहा शामिल हैं. मंजू वर्मा के जाने से नीतीश कैबिनेट में जेंडर अनुपात भी शून्य हो गया है, क्योंकि कोई और महिला कैबिनेट में नहीं है.

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नीतीश कुमार हमेशा आधी आबादी के प्रति संजीदा रहे हैं और उन्होंने जातीय समीकरण से ऊपर उठ कर महिलाओं में खास वोट बैंक तैयार किया है. साइकल योजना से लेकर शराबबंदी जैसे सख्त कानून बनाते वक्‍त नीतीश ने महिलाओं के हितों को ध्यान में रखा. इस लिहाज से किसी महिला की जगह नए कैबिनेट में तय है. बीमा भारती, रंजू गीता या लेसी सिंह इसके प्रबल दावेदार हैं.

मंजू वर्मा के इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार कैबिनेट में सीएम के अलावा 27 सदस्य है. संवैधानिक व्यवस्था के तहत बिहार में मंत्रियों की अधिकतम संख्या 36 हो सकती है. इस लिहाज से नौ की जगह खाली है.

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नीतीश कुमार के एक बेहद करीबी नेता ने बताया कि तीन-चार पद खाली ही रखे जाएंगे. दरअसल नीतीश नहीं चाहते कि दो को खुश कर चार को नाराज किया जाए. जगह खाली छोड़ देने से उम्मीद बनी रहेगी और विरोध दबा रहेगा.

हालांकि नीतीश कुमार ने इस सिलसिले में बीजेपी नेताओं से कोई चर्चा नहीं की है. अभी बीजेपी के खाते से 14 मंत्री हैं. पार्टी के एक प्रवक्ता ने न्यूज18 से कहा, "इसमें कोई दो राय नहीं है कि नीतीश जी पर कई सामाजिक तबके को प्रतिनिधित्व देने का दबाव है. हो सकता है वो अपनी ही पार्टी से कुछ नए मंत्री बनाएं."
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