पीएम की 'भूराबाल' पॉलिटिक्स के जवाब में नीतीश ने फिर से खेला 'पिछड़ा कार्ड'

केंद्र की मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में कुल 58 मंत्रियों ने शपथ ली है और जिनमें से 32 सवर्ण मंत्री हैं. यानि कैबिनेट में पिछड़े, अति पिछड़े और दलित जातियों को 45 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली है.

Amrendra Kumar | News18 Bihar
Updated: June 4, 2019, 12:16 PM IST
पीएम की 'भूराबाल' पॉलिटिक्स के जवाब में नीतीश ने फिर से खेला 'पिछड़ा कार्ड'
पीएम नरेंद्र मोदी के साथ नीतीश कुमार
Amrendra Kumar
Amrendra Kumar | News18 Bihar
Updated: June 4, 2019, 12:16 PM IST
केंद्र में नई सरकार के गठन और सरकार में जेडीयू की भागीदारी नहीं होने के बाद से ही जेडीयू और बीजेपी के बीच प्रेशर पॉलिटिक्स का दौर शुरू हो गया है. इस कड़ी में दोनों दल के नेता एक दूसरे पर अप्रत्यक्ष रूप से ही सही लेकिन निशाना साधने में नहीं चुक रहे. इसकी बानगी बिहार में मंत्रिमंडल के विस्तार के दौरान भी देखने को मिली है. बिहार के सीएम नीतीश कुमार की पहचान एक कुशल राजनेता के साथ-साथ सोशल इंजीनियरिंग के माहिर खिलाड़ी के तौर पर होती है.

कहा जाता है कि नीतीश को ये बात बखूबी पता होती है कि उन्हें कौन सा कार्ड कब खेलना है और समाज के किस वर्ग को कब प्रोमोट करना है. इसकी बानगी हाल के दिन में दो मौकों पर दिखी है. पहला मौका केंद्र की सरकार में शामिल न होने के बाद नीतीश का बयान और दूसरा अपने कैबिनेट विस्तार में समाज के एक हिस्से यानि पिछड़ा वर्ग जिसे नीतीश अपना वोट बैंक भी मानते हैं का 75 फीसदी का प्रतिनिधित्व

विकास बनाम जाति

केंद्र और बिहार की सराकर में मंत्री पद बंटवारे के साथ ही जातिगत राजनीति शुरू हो गई है. बात चाहे केंद्र की सरकार में बिहारी चेहरों को जगह मिलने की हो या फिर नीतीश सरकार में सबकी नजरें इस बात की तरफ आ टिकी है कि मोदी और नीतीश सरकार ने किस बिरादरी या किस वर्ग को मंत्री बनाने में तवज्जो दिया है. लोकसभा चुनाव में 30 मई को पीएम मोदी के शपथ ग्रहण के बाद 31 मई को वापस पटना पहुंचने पर नीतीश ने न केवल सरकार में शामिल नहीं होने का कारण बताया था बल्कि इस बात पर भी जोर दिया था कि बिहार के पिछड़ा और अति-पिछड़ा वर्ग के लोग उनके साइलेंट वोटर है. नीतीश कुमार ने इस दौरान केंद्र सरकार में जातिगत भागीदारी को लेकर भी सवाल उठाया था. नीतीश के इस कमेंट से अंदाजा तो था कि वो फिर से बिहार में पिछड़ा कार्ड खेलने जा रहे हैं लेकिन इतनी जल्दी अपने मंत्रिमंडल में इस फार्मूले को लागू करेंगे ये तय नहीं था.

मोदी का भूराबाल फार्मूला

केंद्र में मोदी सरकार ने अपने मंत्रिमंडल में भूराबाल वाले फार्मूले पर लोगों को जगह दी बिहार से कुल छह चेहरों को कैबिनेट में जगह मिली जिनमें से चार सवर्ण थे जिनमें भूमिहार जाति से गिरिराज सिंह, राजपूत जाति से आरके सिंह, ब्राह्मण बिरादरी से अश्विनी कुमार चौबे और कायस्थ यानी लाला बिरादरी से रविशंकर प्रसाद शामिल हैं. मोदी सरकार में एक ओबीसी और एक दलित को भी जगह मिली जिनके नाम क्रमश: नित्यानंद राय और रामविलास पासवान हैं.

मोदी कैबिनेट में सवर्ण फैक्टर
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केंद्र की मोदी सरकार के मंत्रिमंडल में कुल 58 मंत्रियों ने शपथ ली है और जिनमें से 32 सवर्ण मंत्री हैं. यानि कैबिनेट में पिछड़े, अति पिछड़े और दलित जातियों को 45 प्रतिशत हिस्सेदारी मिली है. दरअसल सवर्णों की नाराजगी का असर पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव में दिखा था जिसके बाद से ही माना जा रहा था कि मोदी सरकार इस बार सवर्णों को खुश करने का कोई मौका नहीं चूकना चाहती

नीतीश का अति पिछड़ा कार्ड

मोदी कैबिनेट के गठन के ठीक तीन दिन बाद ही नीतीश ने अपने तर्ज पर और अपने अंदाज में मोदी के सवर्ण कार्ड का जवाब पिछड़ा-अति पिछड़ा कार्ड से दिया. रविवार को नीतीश कुमार ने अपने मंत्रिपरिषद में आठ नए चेहरों को जगह दी जिनमें से दो सवर्ण थे जबकि अन्य छह पिछड़ी जाति, अति पिछड़ी जाति और दलित. यानि नीतीश ने इस बार 75 प्रतिशत पिछड़ी, अति पिछड़ी और दलित को अपने मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया है.

निगाहें 2020 पर

लोकसभा चुनाव में बंपर जीत हासिल करने के बाद अब एनडीए की निगाहें 2020 की ओर है. हालांकि चुनाव में अभी एक साल से ज्यादा का वक्त बचा है लेकिन साथ होकर भी जेडीयू और बीजेपी कई मुद्दों पर अलग है जिसमें से एक मुद्दा जाति का भी है. बिहार की कास्ट बेस्ड पॉलिटिक्स को देखते हुए नीतीश के इस कदम ने बीजेपी से मनोवैज्ञानिक बढ़त लेने की पुरजोर कोशिश की है.

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First published: June 3, 2019, 3:25 PM IST
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