Bihar Politics: बिहार की सियासत में अचानक सबकुछ बदलने क्यों लगा है?

हाल के दिनों में बिहार में सियासी संभावनाओं को लेकर काफी कुछ बदल जाने के संकेत मिल रहे हैं.

Changing Politics in Bihar: सियासी माहौल बदल रहा है और सूबे में संभावनाओं की सियासत के द्वार खुले हुए हैं, सियासत की महीन बारीकियों को सटीकता के साथ पढ़ने वाले विशेषज्ञों की मानें तो काफी अहम बदलाव होने जा रहे हैं.

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पटना. कहते हैं सियासत की अपनी चाल होती है और यह सत्ता समीकरण के अनुरूप खुद को ढाल लेती है. संभावनाओं की राजनीति का खेल कुछ ऐसा होता है कि सियासी शतरंजी बिसात की टेढ़ी चाल को हर कोई पढ़ नहीं पाता, लेकिन हर पल राजनीति की बदलती चाल को महसूस जरूर कर पाते हैं. बिहार में अभी ऐसा ही कुछ हो रहा है, क्योंकि यहां सबकुछ बदल रहा है और संभावनाओं की सियासत के द्वार खुले हुए हैं. नीतीश कुमार (Nitish Kumar), आरसीपी सिंह, उपेंद्र कुशवाहा, जीतन राम मांझी (Jitan Ram Manjhi), मुकेश सहनी, लालू यादव ( Lalu Yadav), तेजस्वी यादव, जगदानंद सिंह, तेज प्रताप यादव, चिराग पासवान, शत्रुघ्न सिन्हा इन सभी नामों से जुड़ी सियासत में आपको बदलाव का अनुभव होगा. जाहिर है बिहार की चेंजिंग पॉलिटिक्स में इसका असर होना भी लाजिमी है.

सूबे की बदलती सियासत पर गौर करें तो सबसे बड़ा बदलाव जनता दल यूनाइटेड (JDU) में दिखेगा. पार्टी अध्यक्ष आरसीपी सिंह के केंद्र में मंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार, आरसीपी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा के बीच कन्फ्यूजन की खबरों के बीच गत 18 जुलाई को आरसीपी सिंह सामने आए और जेडीयू के नव मनोनीत प्रदेश पदाधिकारियों की पहली बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी चाहेगी तो अध्यक्ष पद छोड़ दूंगा. जाहिर है इस वक्तव्य के गहरे मायने हैं और जनता दल यूनाइटेड की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम भी हैं, क्योंकि नीतीश ने एक बार फिर बता दिया है कि जदयू के सुप्रीम वही हैं.

कुशवाहा को मिल सकती है जेडीयू की कमान
बता दें कि इसी मीटिंग में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने दावा किया कि पार्टी में सब कुछ सही है. कोई कन्फ्यूजन नहीं है, सब मिलकर काम करेंगे. सीएम ने यह भी कहा कि उपेन्द्र कुशवाहा का पार्टी को नंबर वन बनाने का जो सपना है, वह अवश्य पूरा होगा. जाहिर है नीतीश कुमार ने इशारों में ही सही यह संकेत दे दिया है कि उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी की कमान मिल सकती है और आरसीपी केंद्र की सियासत में जेडीयू का चेहरा होंगे. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि आगामी 31 जुलाई को दिल्ली में JDU राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कुछ बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

बदल रहे मांझी-सहनी के सुर भी !
बिहार की एनडीए सरकार में शामिल हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और मुकेश सहनी के बीच गत 19 जुलाई को हुई गुप्त मीटिंग के सियासी मायने निकाले जा रहे हैं. दरअसल, इस मीटिंग के बाद मांझी ने सीएम नीतीश कुमार की सरकार को ही कठघरे में खड़ा करने की कोशिश की. आईएएस सुधीर कुमार की थाने में प्राथमिकी दर्ज न होने पर मांझी ने कहा कि थाना में कोई दलित या कोई और भी जाता हो उस पर थाने को एक्शन लेना चाहिए. जांच में जो कुछ हो वह आगे का विषय है, उससे पहले एफआईआर होना जरूरी है.

मांझी की बयानों से आहत होते नीतीश?
हाल में ही यह दूसरा मौका है जब मांझी ने नीतीश सरकार पर ही सवाल खड़े कर दिए. इससे पहले नीतीश कुमार के स्टैंड से अलग जाकर मांझी शराबबंदी में छूट की वकालत कर चुके हैं. वहीं, सहनी ने मांझी से मीटिंग के बाद कहा कि हम चाहते हैं कि नीतीश सरकार पांच साल तक चले, लेकिन सामने वाले को भी सोचना होगा. ऐसे भी राजनीति में कब क्या हो जाए कौन जानता है? हमारे पास चार विधायक हैं और इसकी ताकत हम जानते हैं. जाहिर है मांझी-सहनी के सुर का एक साथ बदल जाना सियासी जानकारों की नजर में सूबे के सियासी समीकरण में बदलाव की आहट भी हो सकती है.

लालू-तेजस्वी, जगदानंद-तेज भी बदले
बिहार आरजेडी में तब भूचाल आने वाला था जब अचानक राजद के बिहार अध्यक्ष जगदानंद सिंह के इस्तीफे की खबर फैली थी. तब लालू यादव ने अपने इमोशनल कार्ड के जरिये इसे थाम लिया था. अब खबर यह है कि लालू अब संरक्षक की भूमिका में आकर छोटे बेटे तेजस्‍वी यादव को पार्टी की कमान सौंप देना चाहते हैं. इस क्रम में जगदानंद सिंह की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इस मामले में उन्होंने स्पष्ट संकेत दे दिए हैं कि तेजस्वी यादव ही लालू यादव की जगह बिहार राजद की कमान संभालेंगे. माना जा रहा है कि लालू यादव अपनी पार्टी में किसी भी तरह के विरोध या बगावत को थामने के लिए यह काम जगदानंद सिंह से ही करवाएंगे.

तेज प्रताप को मनाने में लग गए जगदा बाबू!
गौरतलब है कि जगदानंद सिंह ने 19 जुलाई को दिल्ली में लालू से मिलने के बाद कहा कि तेजस्‍वी ही बिहार के भविष्य के नायक हैं. इसके साथ ही उन्होंने तेज प्रताप यादव से नाराजगी से इनकार करते हुए अपने इस्‍तीफे के प्रकरण पर प्रतिक्रिया देते हुए तेज प्रताप यादव को अनुशासित युवक बताया. उन्होंने कहा कि तेज प्रताप मुझे 'चाचा' कह कर नाराजगी की परवाह कर रहा है, तब कैसी नाराजगी? वह तो खुद भी कहता है कि कल के महाभारत का सेनापति तेजस्वी होगा. फिर कैसा मतभेद और कैसी नाराजगी? जाहिर है जगदानंद सिंह ने तेजस्वी को कमान देने की जुगत भी लगा दी है और तेज प्रताप के भावी बगावत की आशंका को देखते हुए इसे पहले से थामने की तैयारी भी कर ली है.

'रिश्तों' पर बदल रहा चिराग का नजरिया
लोक जनशक्ति पार्टी में संकट का सामना कर रहे चिराग पासवान ने भाजपा के साथ अपनी पार्टी के रिश्‍ते पर सोच बदलने के संकेत दिए हैं. हाल में ही उन्होंने दिल्‍ली में राजद के वरिष्‍ठ नेता श्याम रजक ने उनसे मुलाकात की थी. इससे पहले वे राजद के एक विधायक से भी मिल चुके थे. उन्‍होंने यह भी कहा कि भाजपा और एनडीए के साथ गठबंधन पर अब चुनाव के वक्‍त विचार किया जाएगा. बता दें कि लोजपा में टूट पर भाजपा के रवैये से आहत चिराग पासवान को तेजस्‍वी यादव पहले ही महागठबंधन के साथ आने का न्‍योता दे चुके हैं. साफ है कि चिराग पासवान का अब भाजपा से मोहभंग हो चुका है और आने वाले समय में यह स्पष्ट तौर पर दिखेगा भी.

चिराग-भाजपा के बीच बढ़ गई दूरी
बता दें कि चिराग पासवान खुद को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हनुमान बताते रहे हैं. उन्‍होंने हमेशा खुद को केंद्र में एनडीए का अनन्‍य सहयोगी बताया है. बिहार विधानसभा चुनाव में वे भाजपा-जदयू-वीआइपी-हम के गठबंधन से अलग होकर चुनाव लड़े थे, लेकिन भाजपा के साथ हमेशा संबंध बनाए रखने की बात कही थी. लेकिन, बदले माहौल में अब चिराग साफ तौर पर कह रहे हैं कि चुनाव के वक्‍त भाजपा से रिश्‍ते तय होंगे. जाहिर है एक बदलाव का संकेत भी है क्योंकि एक ओर चिराग और भाजपा के बीच रिश्तों में बदलाव है तो दूसरी ओर चिराग और तेजस्वी की नजदीकियां दिख रही हैं. ऐसे में आने वाली सियासत बदल रही सियासी संभावनाओं से भरी हुई है.

क्या बिहारी बाबू भी बदल रहे?
पूर्व सांसद व कांग्रेस नेता शत्रुघ्न सिन्हा उर्फ बिहारी बाबू आजकल अपने बयानों को लेकर एक बार फिर सुर्खियों में हैं. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने से लेकर बिहार कांग्रेस की कमान मिलने तक के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि शॉटगन के नाम से मशहूर बिहारी बाबू ने हाल में ही पीएम मोदी की तारीफ वाला ट्वीट किया था. इसके बाद से ही उनकी भाजपा से फिर नजदीकियों के कयास लगने शुरू हो गए थे. हालांकि शत्रुघ्न सिन्हा ने घर वापसी की संभावना से इनकार किया है, लेकिन हाल में ही जनता दल यूनाइटेड (जदयू) प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद से उनकी मुलाकात ने एक बार फिर सियासी शिगूफों को जन्म दे दिया है.

क्या चाहते हैं शॉटगन?
हालांकि राजीव रंजन प्रसाद ने इस मसले पर यही बताया कि 19 दिसंबर 2021 को दिल्ली में आयोजित होने वाली वर्ल्ड कायस्थ कांफ्रेंस की तैयारियों के संबंध में ही उनकी  शत्रुघ्न सिन्हा से मुलाकात हुई. पर सियासी जानकार बताते हैं कि दरअसल वे कांग्रेस में जिस आकांक्षा के साथ वे गए थे वह पूरी नहीं हुई. शायद वे कांग्रेस में असहज भी महसूस कर रहे हैं. यही वजह है कि वे सीएम नीतीश कुमार से नजदीकियां बढ़ाना चाहते हैं ताकि भाजपा में न सही, लेकिन पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए में ही उनकी एंट्री हो जाए. हालांकि इस खबर में कितनी सच्चाई है यह तो आने वाला वक्त बताएगा, पर इतना जरूर है कि बिहार की सियासत में बदलाव की बयार है और उलट-पुलट की राजनीति की हवा गर्म है.

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