बिहार चुनाव: इस बार के चुनाव में युवाओं के लिए क्‍या है सबसे बड़ा मुद्दा?

Bihar Chunav 2020: बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार कई मुद्दे छाए हुए हैं.
Bihar Chunav 2020: बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार कई मुद्दे छाए हुए हैं.

Bihar Assembly Elections: इस बार के विधानसभा चुनाव में कई मुद्दे छाए हुए हैं. जनप्रतिनिधियों से इसको लेकर सवाल भी पूछे जा रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 22, 2020, 7:46 AM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) के मतदान की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, प्रत्याशियों के चेहरे पर हवाइयां उड़नी शुरू हो गई हैं. खासकर एनडीए (NDA) प्रत्याशियों को अपने ही क्षेत्रों में जनता का जबरदस्त विरोध झेलना पड़ रहा है. नीतीश कैबिनेट (Nitish Cabinet) के कई कद्दावर मंत्री और विधायकों को जनता के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते कई वीडियो संकेत दे रहे हैं कि इस बार का चुनाव कुछ अलग हट कर होने वाला है. शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर बेरोजगार युवक जनप्रतिनिधियों से सवाल ही नहीं पूछ रहे हैं, बल्कि उनसे बहस भी कर रहे हैं. ऐसा भी नहीं है कि सिर्फ सत्ता पक्ष के नेताओं को ही घेरा जा रहा है. विपक्षी पार्टी के नेताओं को भी इसी मुद्दे पर घेरा जा रहा है, लेकिन विरोधी पार्टी के नेता इसका ठीकरा नीतीश कुमार पर फोड़ कर अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. ऐसे में सवाल यह है कि क्या इस चुनाव में एनडीए का '15 साल बनाम 15 साल' या 'जंगलराज' का नारा बेअसर साबित हो रहा है? क्या एनडीए के नेता खासकर नीतीश कुमार उन युवाओं को समझाने में विफल साबित हो रहे हैं, जिनका जन्म साल 1995 से लेकर 2001 के बीच हुआ है?

कहां फंस रहे हैं नीतीश कुमार?
जानकार बताते हैं कि इस चुनाव में नीतीश कुमार की राह आसान नहीं होने वाली है, जितना वह समझ रहे थे. पिछले 15 सालों में शायद पहली बार सत्ता पक्ष के नेताओं को जमीन पर इतना विरोध झेलना पड़ रहा है. बेरोजगार युवक बिहार में शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर नीतीश सरकार को सोशल साइट्स से लेकर मीडिया के माध्यम से भी घेर रहे हैं.

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20 से 25 साल के युवाओं को नीतीश कुमार 'जंगलराज' का मतलब समझा रहे हैं.

किसको 'जंगलराज' का मतलब समझा रहे हैं?


गौरतलब है कि जो युवा इस समय 20 साल से 25 साल के हो गए हैं, वे बिहार में लालू प्रसाद यादव के समय के 'जंगलराज' का मतलब नहीं समझते. ये युवा नीतीश कुमार से शिक्षा और रोजगार के मुद्दे पर सवाल पूछ रहे हैं. लेकिन, एनडीए के नेता इन बेरोजगार युवकों को शिक्षा और रोजगार देने के बजाए 'जंगलराज' का मतलब समझा रही है.

क्या मोदी की चमत्कार पर है निगाहें?
बिहार में पहले चरण के 71 सीटों के लिए 28 अक्‍टूबर को वोट डाले जाएंगे. पहले चरण में जिन-जिन इलाकों में वोट पड़ेंगे वहां पर एनडीए को भीतरघात का भी सामना करना पड़ सकता है. इन इलाकों में सत्ता पक्ष के खिलाफ जबरदस्त नारजगी है. हालांकि, अभी तक इन इलाकों में एनडीए के स्टार प्रचारक पीएम नरेंद्र मोदी की सभा नहीं हुई है. एनडीए के नेताओं को उम्मीद है कि जो कुछ भी थोड़-बहुत असंतोष है वह पीएम मोदी की सभा के बाद दूर हो जाएगा. एनडीए नेताओं का भरोसा है कि ये लोग एनडीए को ही वोट करेंगे.

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नीतीश-सुशील ने लालू प्रसाद यादव और आरजेडी पर जमकर निशाना साधा है.


तेजस्वी की सभा में जुट रही भीड़ वोट में तब्दील होगी?
वहीं, पहले और दूसरे चरण के चुनाव प्रचार को लेकर महागठबंधन के प्रत्याशियों के चेहरे पर उत्साह साफ देखी जा रही है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेजस्वी यादव की सभाओं में जो भीड़ दिख रही है, अगर वह वोट में तब्दील हो जाता है तो नीतीश कुमार और एनडीए के लिए मुश्किल हो जाएगा. महागठबंधन के नेताओं का उत्साह एलजेपी के अलग चुनाव लड़ने से भी बढ़ गया है. महागठबंधन नेताओं को लगता है कि एलजेपी जो भी वोट काटेगी वह एनडीए का ही होगा और इसका सीधा फायदा महागठबंधन को मिलेगा.

क्या कहते हैं जानकार
बिहार की राजनीति को करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकार संजीव पांडेय कहते हैं, 'नीतीश कुमार को लेकर युवकों खासकर बेरोजगार युवकों में जबरदस्त नारजगी है. लॉकडाउन के बाद जिन लोगों की रोजी-रोटी छिन गई, वे लोग भी नीतीश सरकार के रवैये से नाराज हैं. एनडीए को लग रहा था कि वह पिछले चुनावों की तरह इस चुनाव में भी जंगलराज का डर दिखा कर वोट ले आएगी, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है. अब एनडीए को सिर्फ और सिर्फ पीएम मोदी की सभा से उम्मीद बच गई है. बिहार में आज की राजनीतिक परिस्थिति में अगर कोई हवा का रुख मोड़ सकता है तो वह पीएम मोदी ही हैं.'

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गया के अतरी में स्थित टेटुआ की चुनावी सभा में सीएम नीतीश कुमार के मंच की तरफ पत्थर फेंकने वाला आरोपी युवक.


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पांडेय कहते हैं, 'साल 1995 से 2001 के बीच पैदा हुए युवाओं को जंगलराज का मतलब समझ में नहीं आ रहा है. इन युवाओं को नीतीश कुमार के राज में भी अच्छी शिक्षा और रोजगार से वंचित होना पड़ रहा है. इसलिए ये युवा नीतीश कुमार से ही सवाल पूछ रहे हैं. हालांकि, यह कहना थोड़ा जल्दबाजी होगा कि नीतीश कुमार का जबरदस्त विरोध हो रहा है. अभी भी इन युवाओं में एक वर्ग है, जो नीतीश कुमार को काफी पसंद करता है.'
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