CM नीतीश की 'हरित श्रद्धाजंलि', जिसके बारे में किसी ने सोचा तक नहीं

नीतीश कुमार के गांव के लोग उन्हें आज भी मुन्ना के नाम से जानते हैं.

नीतीश कुमार के गांव के लोग उन्हें आज भी मुन्ना के नाम से जानते हैं.

मुख्यमंत्री नीतिश कुमार ने अपने गांव में अपनी निजी जमीन पर घर का पैसा और संसाधन का इस्तेमाल करते हुए कविराज राम लखन सिंह वाटिका की स्थापना की. अपने गांव में वाटिका बनाते वक्त तो खुद नीतीश कुमार ने भी नहीं सोचा था कि धीरे-धीरे यह वाटिका इतना बड़ा स्वरूप ले लेगी.

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पटना. आज विश्व पर्यावरण दिवस है. कोरोना महामारी के इस दौर में लोगों को पर्यावरण संरक्षण की अहमियत समझ में आ रही है. लोग अब पर्यावरण को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो रहे हैं लेकिन अभी भी इसमें बड़े बदलाव की जरूरत है. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में पर्यावरण संरक्षण के दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरफ से पर्यावरण को लेकर पहल केवल सरकार के स्तर पर ही नहीं की गई बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी उन्होंने पर्यावरण को बचाए रखने और पेड़-पौधे लगाने को लेकर एक मुहिम की शुरुआत अपने पैतृक गांव से की. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का गांव कल्याण बिगहा. वही कल्याण बिगहा जहां से निकलकर इस गांव के मुन्ना ने ना केवल बिहार की तस्वीर बदल दी बल्कि देश-दुनिया में उनके नेतृत्व की चर्चा हो रही है. जी हां, हम बात कर रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की. नीतीश कुमार के गांव के लोग उन्हें आज भी मुन्ना के नाम से जानते हैं.

मुख्यमंत्री ने अपने गांव में अपनी निजी जमीन पर घर का पैसा और संसाधन का इस्तेमाल करते हुए कविराज राम लखन सिंह वाटिका की स्थापना की. अपने गांव में वाटिका बनाते वक्त तो खुद नीतीश कुमार ने भी नहीं सोचा था कि धीरे-धीरे यह वाटिका इतना बड़ा स्वरूप ले लेगी. आज इस वाटिका में पर्यावरण प्रेम की अद्भुत तस्वीर देखने को मिलती है. पेड़-पौधे और जड़ी-बूटियों वाली इस वाटिका की चर्चा ना केवल नालंदा वल्कि बिहार भर में होने लगी है. ज्यादातर लोग जानते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पिता स्वर्गीय राम लखन सिंह एक वैध थे. जड़ी बूटियों के सहारे लोगों का इलाज करना उन्हें बखूबी आता था. अपने पिता के साथ नीतीश कुमार ने भी इस गुण को थोड़ा बहुत से सीखा है. यही वजह है कि जब अपने गांव में नीतीश कुमार ने पिता की याद में वाटिका बनाने की सोची तो यहां जड़ी बूटियों के पौधे लगाए गए. आज इस वाटिका में ना केवल उनके पिता बल्कि माता और साथ ही साथ उनकी धर्मपत्नी की प्रतिमा की लगी हुई है. खास मौकों के साथ-साथ अपने माता पिता और पत्नी की पुण्यतिथि के मौके पर नीतीश कुमार यहां आते हैं और पर्यावरण संरक्षण के जरिए उन्हें श्रद्धांजलि भी देते हैं. अपने चाहने वालों के लिए उनके इस दुनिया से चले जाने के बाद पर्यावरण के जरिए श्रद्धांजलि की एक मिसाल नीतीश कुमार ने पेश की है और अब आसपास के इलाके में भी लोग सरकारी संसाधनों का इंतजार किए बगैर खुद पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम आगे बढ़ा रहे हैं.

कल्याण बीघा के महेश सिंह कहते हैं कि नीतीश कुमार के इस अभियान से प्रेरित होकर उनके गांव और आसपास के लोगों ने भी अपने खाली पड़े जमीनों पर बगीचा लगाने का अभियान शुरू कर दिया जिसके बाद आज उनके गांव और आसपास में सैकड़ों बगीचे हैं. कल्याण बीघा के अभिषेक और जयेश कुमार ने कहा की उन्होंने खुद अपनी जमीन पर बगीचा लगाया जिसका लाभ भी उन्हें खूब मिल रहा है. वे अपना पूरा समय बगीचा को देते हैं और पेड़ों की देखभाल करते हैं . गांव के इन युवाओं का यह भी मानना है कि उनके गांव में कोरोना वायरस का खतरा नही है ,इसका एक कारण गाँव की हरियाली भी है.

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