स्वास्थ्य मंत्री की शिकायत सुनते ही विभागीय सचिव पर बरसे नीतीश, कहा- नहीं संभलता कोरोना तो छोड़ दीजिए डिपार्टमेंट
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स्वास्थ्य मंत्री की शिकायत सुनते ही विभागीय सचिव पर बरसे नीतीश, कहा- नहीं संभलता कोरोना तो छोड़ दीजिए डिपार्टमेंट
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कोरोना को लेकर समीक्षा बैठक की (फाइल फोटो)

बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने प्रधान सचिव के बारे में शिकायत करते हुए सीएम नीतीश कुमार से कहा कि प्रधान सचिव मेरी बात नहीं सुनते और विभाग में केवल अपनी मनमानी करते हैं.

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पटना. बिहार में कोरोना संक्रमण (Corona Epidemic) का मामला तेजी से बढ़ता जा रहा है. कोरोना से बचाव के सरकारी उपाय को लेकर नीतीश सरकार (Nitish Government) विरोधियों के निशाने पर लगातार आ रही है. सरकार का बचाव सत्ताधारी दल के नेता और प्रवक्ता पूरी शिद्दत से कर रहे हैं लेकिन आखिर बचाव करें भी तो कब तक. लिहाजा विभागीय नाकामी का ठिकरा स्वास्थ्य विभाग के प्रधाव सचिव के माथे फूटा और ऐसा फूटा की सीएम (CM Nitish Kumar) ने उनको सुधर जाने तक का अल्टीमेटम दे दिया.

मंत्री से शिकायत सुनते ही आग बबूला हो गए नीतीश

स्वास्थ्य विभाग के लचर रवैया को लेकर नीतीश कुमार का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब कैबिनेट की बैठक के बाद वो बाढ़ और कोरोना को लेकर राज्य के हालात  जानना चाह रहे थे. इसी दौरान नीतीश के निशाने पर आ गाए स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव उमेश सिंह कुमावात. सीएम ने उनसे वर्तमान हालात की जानकारी ली. जब कुमावत जवाब दे रहे थे तभी स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने नीतीश कुमार से शिकायत कर दी. उनकी शिकायत सुनते ही सीएम ने प्रधान सचिव की जमकर लगाई क्लास लगाई.



सुधार नहीं हुआ तो आप पर कड़ी कार्रवाई तय है
स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे ने प्रधान सचिव के बारे में शिकायत करते हुए कहा कि प्रधान सचिव मेरी बात नहीं सुनते और विभाग में केवल अपनी मनमानी करते हैं. ये सुनना था कि सीएम ने स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव को कड़े लहजे में अल्टीमेटम देते हुए कहा की , RTPC टेस्ट 20 हज़ार प्रतिदिन नहीं हुआ तो आप पर कड़ी कार्रवाई करेंगे. आपसे ये विभाग नही संभलता तो छोड़ दीजिए. सीएम यहीं नहीं रुके. उन्होंने कहा कि अनुमंडल स्तर हॉस्पिटल में 100 बेड की व्यवस्था होनी चाहिए साथ ही हॉस्पिटल भी ऑक्सीजन की भरपूर व्यवस्था होनी चाहिए.

जिला के लोगों का जिला में ही हो इलाज

सीएम ने कहा कि जिला के मरीजों का उनके जिलों में ही इलाज हो साथ ही पटना के हॉस्पिटलों पर अतिरिक्त बोझ नहीं हो इसका भी ख्याल रखा जाए. नीतीश कुमार स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली से इतने नाराज थे कि उन्होंने कहा की जब दिल्ली में रोज 38 हजार जांच हो सकता है तो बिहार में क्यों नही. नीतीश कुमार ने कहा कि पिछले 14 साल में मेरे सामने ऐसे परिस्थिति नहीं आई. नीतीश ने चेतावनी देते हुए कहा कि स्वास्थ्य विभाग की जल्द ही रिव्यू मीटिंग करेंगे और गड़बड़ी करने वालों को छोड़ेंगे नहीं.

विरोधियों के निशाने पर हैं नीतीश

दरअसल बिहार में कोरोना तेजी से बढ़ता जा रहा है जिसकी वजह से विरोधी चुनावी साल में मुद्दा बना कर सरकार पर लहातार हमला बोल रहे हैं और रोजाना फोटो या वीडियो जारी कर के सरकार की नाकामी को चुनावी साल में वोट के माध्यम से भुनाना चाहते हैं.
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