नीतीश दूसरी बार संभालेंगे JDU के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष की जिम्‍मेदारी, सामने हैं ये चुनौतियां

2005 के चुनाव में जेडीयू को 55 सीटें मिली थी.

मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) दूसरी बार जेडीयू (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले हैं. उनकी ताजपोशी विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) की आहट से पहले हो रही है. हालांकि हाल ही में हुए उपचुनाव में हार के बाद नीतीश के नेतृत्व पर सवाल भी उठ रहे हैं. इसी वजह से उनकी चुनौतियों काफी बढ़ गई हैं.

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पटना. बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) दूसरी बार जेडीयू (JDU) के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने वाले हैं. इस बार ताजपोशी विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) की आहट से पहले हो रही है. इसी वजह से नीतीश के लिए चुनौतियों काफी बढ़ गई हैं. जबकि हाल ही में हुए उपचुनाव परिणाम आने के बाद से बिहार में जहां महागठबंधन का मनोबल बढ़ गया है, तो नीतीश कुमार की अगुवाई में चुनाव लड़ने के बाद मिली हार ने एनडीए की परेशानी बढ़ा दी है. यही नहीं, हार के बाद नीतीश के नेतृत्व पर सवाल भी उठ रहे हैं.

नीतीश के सामने ये हैं चुनौतियां
उपचुनाव में करारी हार के बाद नीतीश कुमार दूसरी बार जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभाल रहे हैं, लेकिन इसके साथ ही सवाल भी उठ रहा है कि क्या नीतीश कुमार के लिए इस बार राह आसान होगी? क्‍या वह अपने सामने आने वाली इन चुनौतियों से पार पा सकेंगे?

1-उपचुनाव में हार की बड़ी वजह जमीनी स्तर पर बीजेपी और जेडीयू कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल की कमी झलकना रही. नीतीश कुमार के ऊपर बड़ी जिम्मेदारी है कि वह दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल ठीक करें.

2- अगला विधानसभा चुनाव नीतीश कुमार की अगुवाई में होगा. भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष अमित शाह की इस घोषणा के बाद नीतीश कुमार की जिम्‍मेदारी बढ़ गई है.

3-बिहार विधानसभा चुनाव के पहले बिहार में NRC, जनसंख्या नियंत्रण और तीन तलाक़ जैसे मुद्दे के गर्माने के पूरे आसार हैं. इन मुद्दों को कैसे हैंडल करेंगे नीतीश कुमार, ये खास बात होगी.

4-गिरिराज सिंह जैसे नेताओं के बयान पर जेडीयू नेताओं को कंट्रोल करना भी नीतीश कुमार के लिए चुनौती होगी.

5-उपचुनाव के परिणाम के बाद महागठबंधन की तरफ से चुनौती बढ़ गई है. वह इस चुनौती से कैसे पार पाते हैं, यह देखने वाली बात होगी.

6-बिहार में लॉ एंड ऑर्डर के हालत लगातार खराब हो रहे हैं. NCRB की रिपोर्ट के बहाने विरोधी नीतीश के USP पर पर सवालिया निशान रहे हैं.

7-सुशासन और विकास के सहारे चुनाव जीतने वाले नीतीश कुमार से विकास को लेकर ही सवाल पूछे जा रहे हैं.

8-2020 में एनडीए में टिकट बंटवारा एक बड़ा मुद्दा होगा.

9-जेडीयू को राष्ट्रीय पार्टी बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी. इसके लिए जेडीयू कई राज्यों में चुनाव लड़ रही है. बेहतर परिणाम के लिए नीतीश कुमार को ध्यान देना होगा.

10-मोदी मंत्रिमंडल में जेडीयू शामिल होगी या नहीं इसका फैसला भी जल्द से जल्द लेना होगा. हालांकि सूत्र बताते हैं कि जेडीयू के कई नेता केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल होना चाहते हैं.

11-नीतीश कुमार सामाजिक कार्यों के जरिए जनता के बीच पैठ बढ़ाना चाहते हैं. सात निश्चय से लेकर जल जीवन हरियाली जैसी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाना बड़ी चुनौती है.

12- नीतीश कुमार ने दो बार गठबंधन को छोड़ा है. एक बार बीजेपी का साथ छोड़ा तो दूसरी बार महागठबंधन का साथ. नीतीश कुमार को लेकर बिहार की सियासत में अभी भी सवाल खड़े होते हैं कि नीतीश कुमार किसके साथ रहेंगे. इस सवाल का जवाब भी नीतीश को मजबूती से देना होगा.

विरोधियों ने यूं साधा निशाना
बहरहाल, विरोधी भी नीतीश कुमार के दूसरी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद बधाई के साथ-साथ चुनौती भी बताने से परहेज नहीं कर रहे हैं. राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि नीतीश कुमार पहले बीजेपी से सावधान रहें, क्‍योंकि विकास तो कर नहीं पा रहे हैं और ऊपर से बीजेपी भी उन्हें झटका देने वाली है. जबकि हम प्रवक्ता बिजय यादव ने कहा कि नीतीश कुमार विकास की राह से भटक अपनी सत्ता बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं, लेकिन बीजेपी उन्‍हें झटका देगी. वह इस झटके के लिए तैयार रहें.

जेडीयू ने कही ये बात
जबकि जेडीयू नीतीश कुमार के दूसरी बार राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने पर उत्साहित है. हालांकि नीतीश के सामने जेडीयू को राष्ट्रीय पार्टी बनाने और अपना नाम राष्ट्रीय पटल पर चमकाने की चुनौती है. जेडीयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने कहा कि नीतीश कुमार की अगुवाई में एनडीए पिछली बार से भी ज्यादा सफल रहेगा. वह हर चुनौती से निपटने का दम रखते हैं.

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