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CM नीतीश कुमार के इस दांव से 'फेल' हो सकती है RJD की रणनीति, जानिए पूरा मामला

Anand Amrit Raj | News18 Bihar
Updated: February 7, 2020, 11:57 AM IST
CM नीतीश कुमार के इस दांव से 'फेल' हो सकती है RJD की रणनीति, जानिए पूरा मामला
नीतीश कुमार आरजेडी की जीती हुई सीटों पर इस बार उतारेंगे उम्‍मीदवार.

बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में जेडीयू की नजर आरजेडी (RJD) की जीती हुई सीटों पर है. अब समीकरण बदल गए हैं और अब मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) एनडीए का हिस्‍सा हैं. यही वजह है कि जेडीयू की नजर आरजेडी की जीती हुई सीटों पर है.

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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में जेडीयू की नजर आरजेडी (RJD) की जीती हुई सीटों पर है. सूत्र बताते हैं कि जेडीयू के सम्पर्क में आरजेडी के कई विधायक भी हैं. आपको बता दें कि 2015 के विधानसभा चुनाव में आरजेडी के साथ गठबंधन होने की वजह से जेडीयू जहां से उम्मीदवार नहीं उतार पाया था, वहां नीतीश की वजह से तेजस्‍वी यादव की पार्टी की जीत मिली थी. जबकि अब समीकरण बदल गए हैं और मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (Nitish Kumar) एनडीए का हिस्‍सा हैं. यही वजह है कि जेडीयू की नजर आरजेडी की जीती हुई सीटों पर है , जो कि तेजस्‍वी यादव और उनकी पार्टी के लिए घातक साबित हो सकती है.

इस वजह से जेडीयू को है भरोसा
दरअसल, जेडीयू की नजर आरजेडी के साथ 2015 के विधानसभा चुनाव में जीती हुई सीट पर तभी से टिकी है जब से वह महागठबंधन से अलग होकर एनडीए के साथ आयी है. इसके पीछे ठोस वजह भी है कि जेडीयू जब 2015 में महागठबंधन में था, तब उसके खिलाफ बीजेपी थी और जिन सीटों पर जेडीयू हारा वहां अधिकांश सीटों पर बीजेपी का कब्‍जा है. अब जब बीजेपी से गठबंधन है तो सिटिंग गेटिंग का फॉर्मूला लागू हुआ तो जेडीयू चाह कर बहुत ज़्यादा सीट नहीं ले पाएगी. हालांकि कुछ सीट पर अदला बदली जरूर हो सकती है और ऐसे में नीतीश को आरजेडी के विधायकों के साथ संपर्क का फायदा मिल सकता है. सूत्र बताते हैं कि जेडीयू अंदरखाने इस पर काम शुरू भी कर चुका है.

जानकारों को ये है तर्क

बिहार के वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय इसके पीछे तर्क भी देते हैं. उन्‍होंने कहा कि जेडीयू की नजर जिन आरजेडी के सीटों पर है. उस सीट का जो स्वभाव है, चाहे जातीय समीकरण हो या सामजिक बनावट, जेडीयू को यह सब भाता करता है. इसी वजह से जेडीयू की नजर आरजेडी के जीती हुई सीटों पर है.  यही नहीं, महागठबंधन को 2015 में जो जीत मिली थी तब कई सारे फैक्टर बताए गए थे, जिसमें सबसे बड़ी बात आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का आरक्षण की समीक्षा वाला बयान अहम था और इस बात का लालू प्रसाद यादव ने प्रचारके दौरान भरपूर फायदा उठाया. वहीं नीतीश कुमार की छवि भी एक अहम थी और इसी वजह से महागठबंधन को जीत मिली थी.

 
जेडीयू की यहां है नजरजेडीयू को लगता है कि जो सामाजिक समीकरण गठबंधन के समय था वो बदले दौर में ज्‍यादा दमदार साबित हो सकता है. यही वजह है कि वह आरजेडी की जीती हुई सीटों पर नजर गड़ाए हुए है. जेडीयू नेता अजय आलोक कहते हैं कि आरजेडी के पचास प्रतिशत से ज्यादा विधायक 2015 में नीतीश कुमार की मदद से जीते थे और उनमें से अधिकांश उसके संपर्क में हैं.जबकि हर विधायक चाहता है कि चुनाव जीते और इस बात की गारंटी नीतीश के अलावा कौन दे सकता है.

यहां मिली थी आरजेडी को जीत
मुजफ़्फरपुर जिला- आरजेडी का कब्जा 6 सीट पर है
सारण- आरजेडी का कब्‍जा 6 सीट पर है
बेगूसराय-आरजेडी का कब्‍जा 3 सीट पर है.
भोजपुर-आरजेडी का कब्‍जा 5 सीट पर है.
रोहतास-आरजेडी का कब्‍जा 4 सीट पर है.
अरवल-जहानाबाद -आरजेडी का कब्‍जा 3 सीट पर है.
सीतामढ़ी- आरजेडी का कब्‍जा 3 सीट पर है.
वैशाली-आरजेडी का कब्‍जा 4 सीट पर है.
गया-आरजेडी का कब्‍जा 4 सीट पर है.


 
आरजेडी ने कही ये बात
जाहिर है कि कई और ऐसे जिले हैं, जिसमें आरजेडी ने 2015 के विधानसभा चुनावा में कब्जा जमाया था, लेकिन जब 2020 का चुनाव होने वाला है और संभव है कि जेडीयू इन अधिकांश सीटों पर उम्मीदवारों को उतारेगा. हालांकि कुछ सीट और चेहरे बदल सकते हैं, लेकिन आरजेडी की जीती हुई सीटों पर उसकी रणनीति बेहद दमदार नजर आ रही है और वह अंदरखाने का भी शुरू कर चुके हैं. हालांकि आरजेडी के विधायक विजय प्रकाश कहते हैं कि जीतने वाली पार्टी पर तमाम दलों के नेताओं निगाहें टिकी रहती हैं और जेडीयू भी जानती है कि 2015 में जीत लालू यादव की वजह से हुई थी. यही वजह है कि एक बार फिर से हमारे विधायकों पर नजर गड़ाए हुए हैं, लेकिन वो अपने मकसद में सफल नहीं हो पाएंगे.

 

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First published: February 7, 2020, 11:28 AM IST
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