तो क्या 2024 की रणनीति पर चल रहे हैं नीतीश कुमार?

राजनीतिक जानकार कहते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सियासत के माहिर खिलाड़ी हैं और वह राजनीतिक समझ के मामले में पीएम मोदी और अमित शाह से कतई कम नहीं हैं.

Vijay jha | News18 Bihar
Updated: August 13, 2019, 12:11 PM IST
तो क्या 2024 की रणनीति पर चल रहे हैं नीतीश कुमार?
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार क्या 2024 के लोकसभा चुनाव की रणनीति पर काम कर रहे है?
Vijay jha | News18 Bihar
Updated: August 13, 2019, 12:11 PM IST
लोकसभा (Lok Sabha) में खराब प्रदर्शन के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव (Assembly Election) के मद्देनजर लोकप्रियता बढ़ाने के लिए पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) की सेवाएं ली हैं. खास बात यह है कि यह संगठन जेडीयू (JDU) के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर (Prashant kishor) यानी पीके का है. बीजेपी (BJP) की पश्चिम बंगाल ईकाई ने पीके की टीम पर राज्य सरकार के अधिकारियों के कामकाज में हस्तक्षेप करने और वरिष्ठ अधिकारियों पर उनका आदेश मानने के लिए दबाव बनाने का आरोप लगाया है. हालांकि I-PAC ने इन आरोपों से इनकार किया है. सवाल उठ रहा है कि क्या इसका असर बीजेपी-जेडीयू के संबंधों पर भी पड़ेगा? जानकार मानते हैं कि इन आरोपों-प्रत्यारोपों का बहुत असर फिलहाल बीजेपी-जेडीयू पर नहीं पड़ने जा रहा है, लेकिन बीजेपी की चिंता ये जरूर है कि एनडीए में रहते हुए भी जेडीयू नेता बीजेपी की धुर विरोधी ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) का साथ क्यों दे रहे हैं?

दूरदर्शी सोच रखते हैं CM नीतीश
वरिष्ठ पत्रकार कन्हैया भेल्लारी कहते हैं कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार राजनीति के माहिर खिलाड़ी हैं और वो राजनीतिक समझ के मामले में पीएम मोदी और अमित शाह से कतई कम नहीं हैं. हाल में संपन्न लोकसभा चुनाव में जिस तरीके से सीएम नीतीश कुमार ने 2 सीटों से अपनी पार्टी के लिए 17 सीटें हासिल की, वो उनकी दूरदर्शी सोच का ही नतीजा है. वो हमेशा अपने कई विकल्पों को खोल कर रखने में यकीन रखते हैं.

समय अनुसार राजनीतिक गोटी चलते हैं नीतीश कुमार

बकौल कन्हैया भेल्लारी नीतीश कुमार जैसे राजनीतिज्ञ आने वाले आठ-दस साल की राजनीति को भांपते और आंकते हुए अपनी राजनीतिक गोटियां चलते हैं. फिलहाल तो एनडीए में आपको सबकुछ ठीक लग रहा है, लेकिन आने वाले समय में क्या होगा, ये कोई नहीं जानता. नीतीश कुमार ने अपने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष को बीजेपी की प्रबल विरोधी ममता बनर्जी की मदद करने की इजाजत देकर कुछ ऐसे ही संकेत दिए हैं.

Nitish kumar
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि नीतीश कुमार के मन में इच्छा रही है और वे अवसर की तलाश में हैंं.


'नीतीश टाइप पॉलिटिक्स यही है'
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कन्हैया भेल्लारी कहते हैं कि सीएम नीतीश की राजनीति को समझना हो तो हाल में धारा 370 के दौरान उनके दो नेताओं के बयानों को समझिए. पहला उनके मंत्री श्याम रजक ने कहा कि यह काला दिन है. उन्होंने यह बात दूसरे और तीसरे दिन भी दोहराई. दूसरा उनके बेहद करीबी राज्यसभा सांसद आरसीपी सिंह ने कहा कि अब तो कानून बन गया और सबको यह मानना चाहिए. नीतीश टाइप पॉलिटिक्स यही है.

प्रेशर पॉलिटिक्स के माहिर हैं CM नीतीश
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार रवि उपाध्याय कहते हैं कि यह प्रेशर पॉलिटिक्स का भी हिस्सा हो सकता है. दरअसल आने वाले 2020 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों ही पार्टियां अपनी रणनीति बना रही हैं. इसमें बड़ा भाई कौन होगा इसको लेकर अभी बात होनी है. ऐसे में सीएम नीतीश कुमार पहले से ऐसा माहौल बनाए रखना चाहते हैं कि बीजेपी को हमेशा ये लगे कि इनका साथ हमारे लिए जरूरी है. ऐसे में सीटों की बारगेनिंग (मोलभाव) में इसका असर हो सकता है.

असहज स्थिति से बचने की रणनीति
बकौल रवि उपाध्याय नीतीश कुमार की राजनीति हमेशा ही बीजेपी के साथ रहने के बाद भी उनसे दूरी बनाए रखने की रही है. यह सिलसिला आज से नहीं बल्कि वर्ष 1996 से चला आ रहा है. हाल में संसद में धारा 370 के खिलाफ वोटिंग के समय उनकी पार्टी का बायकॉट करना भी इसी रणनीति का हिस्सा है. दरअसल यह उस बात का भी संकेत है कि आने वाले समय में अगर राजनीति में कुछ परिवर्तन हो तो नीतीश के लिए किसी भी तरह से असहज स्थिति न हो.

Mamta benarji-cm nitish
जानकार मानते हैं कि जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर को ममता बनर्जी के लिए काम करने की इजाजत देकर सीएम नीतीश ने बीजेपी के लिए मुश्किल स्थिति पैदा कर दी है.


तो क्या RJD से तालमेल करेगी JDU?
वरिष्ठ पत्रकार प्रेम कुमार नीतीश कुमार की राजनीति की थोड़ी और गहराई से व्याख्या करते हैं. वो कहते हैं कि आने वाले विधानसभा चुनाव में अगर बिहार में बीजेपी बड़ा भाई बनने की कोशिश करेगी तो हो सकता है कि नीतीश कुमार अलग भी हो जाएं. ऐसा कहते हुए वो आरजेडी के नेताओं से नीतीश कुमार की बढ़ती नजदीकियों की बात करते हैं. दरअसल हाल में ही शिवानंद तिवारी ने कहा था कि लालू भी चाहते थे कि नीतीश कुमार पीएम पद के दावेदार हों.

JDU-RJD के अलग होने से BJP को फायदा
बकौल प्रेम कुमार ऐसे संकेत इसलिए भी दिए जा रहे हैं कि लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हार चुकी आरजेडी घुटनों के बल आ चुकी है. वो भी चाहती है कि नीतीश कुमार उसके साथ आ जाएं तो एक बार फिर वो बिहार की राजनीति में अपनी अच्छी दखल बना सकती है. ऐसे भी जेडीयू और आरजेडी का कोर वोट बैंक (पिछड़ा समाज और मुस्लिम) एक ही रहा है. दोनों के लिए इस वोट बैंक का डिविजन ही बीजेपी को फायदा पहुंचाता है.

कांग्रेस की पहल पर नीतीश आएंगे आगे?
प्रेम कुमार कहते हैं कि देश की राजनीति में बड़ी दावेदारी (प्रधानमंत्री पद) पेश करने की इच्छा नीतीश कुमार के सीने में वर्षों से दबी पड़ी है. वहीं, कांग्रेस में नेतृत्वहीनता की स्थिति नीतीश कुमार के लिए एक और अवसर पैदा करने जा रही है. सोनिया गांधी का अंतरिम अध्यक्ष बनाने के बाद यह भी उम्मीद की जा रही है कि विपक्षी दलों की एकता के लिए वो बड़ी भूमिका निभा सकती हैं. ऐसे में 2024 के आम चुनाव के लिए विपक्षी खेमे का नेतृत्व के लिए वो नीतीश के चेहरे को भी आगे कर सकती हैं.

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First published: August 13, 2019, 10:57 AM IST
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