राज्यपाल की मजबूरी! 'जिन्होंने मुझे राज्यपाल बनाया उनको धन्यवाद भी नहीं कह सकता'

News18 Bihar
Updated: August 27, 2019, 4:36 PM IST
राज्यपाल की मजबूरी!  'जिन्होंने मुझे राज्यपाल बनाया उनको धन्यवाद भी नहीं कह सकता'
फागू चौहान (फाइल फोटो)

फागू चौहान ने कहा कि यदि मैं पक्ष के बारे में बोलूं तो लोग कहेंगे कि ये बीजेपी के स्पोक्स पर्सन बन गए. मैं विपक्ष के तरफ बोलूं तो बात कुछ और हो जाएगी.

  • Share this:
राजधानी पटना के बापू सभागार में आयोजित नोनिया, बिंद, बेलदार महासंघ के तत्वाधान में सामाजिक समरसता संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम के दौरान बिहार के राज्यपाल फागू चौहान (Fagu Chauhan)का अभिनंदन भी किया गया. इस मौके पर राज्यपाल (Governer)  ने अपने गरीबी के दिनों को याद करते हुए वर्तमान सफर तक का जिक्र किया. साथ ही उन्होंने अपने पद की मर्यादा के बारे में भी अपनी राय जाहिर की. उन्होंने कहा, मैं संवैधानिक पद (Constitutional post) पर हूं  और मैं किसी तरह का भाषण नहीं दे पाऊंगा. भाषण में या तो पक्ष में बोला जाता है या विपक्ष की आलोचना की जाती है. ये दोनों काम में नही कर पाऊंगा.

जिन्होंने सम्मान दिया उनके साथ रहना चाहिए
फागू चौहान ने कहा कि यदि मैं पक्ष के बारे में बोलूं तो लोग कहेंगे कि ये बीजेपी के स्पोक्स पर्सन बन गए. मैं विपक्ष के तरफ बोलूं तो बात कुछ और हो जाएगी. मेरी तो स्थिति ये है कि मुझे राज्यपाल बनाया गया, लेकिन जिन्होंने मुझे राज्यपाल बनाया उनको धन्यवाद भी नहीं दे सकता, क्योंकि खबर अलग बन जाएगी. उन्होंने कहा कि लेकिन, मेरा मानना है कि जिन्होंने जो किया है उनके साथ रहना चाहिए.

'नोनिया, बिंद और बेलदार को एक मंच पर आना होगा'

राज्यपाल ने कहा कि नोनिया, बिंद, बेलदार अलग-अलग प्लेटफार्म पर है. उन्हें एक प्लेटफार्म पर आना होगा. इस समाज के लोगों को शिक्षित होना होगा. इस समाज के लोगों की समस्या है वो नशाखुरानी का है.लोग मजदूरी करते हैं और शराब पी जाते हैं. बाल विवाह और दहेज को छोड़िए.

'माता-पिता ने कहा- ई चुनाव क्या होता है?'
उन्होंने अपने पुराने दिनों को याद करते हुए कहा, मैं टाटा-बिरला परिवार से नहीं बल्कि बहुत समान्य परिवार से आता हूं.  1985 में कुछ लोगों ने कहा कि आप चुनाव लड़ जाइये. हमने मना कर दिया, लेकिन दलित मजदूर किसान पार्टी से टिकट देने की बात कही.  मां से पैरवी की.  माता-पिता से पूछा कि चुनाव लड़ें? उन्हें यह मालूम भी नहीं था कि ई चुनाव क्या होता है?
Loading...

'सामंतवादियों ने परेशान किया'
राज्यपाल ने बताया कि उनके माता पिता को यही मालूम था कि जो लोग वोट मांगने आते हैं वो भिखमंगी करते हैं.  फिर भी चुनाव लड़ा और जीता. एमएलए बनने के बाद कठिन रास्ता था. सामंतवादियों ने मुझे खूब परेशान किया, लेकिन मैंने संघर्ष करना नहीं छोड़ा. बता दें कि देश के कई राज्यों बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, कर्नाटक, पंजाब, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से भारी संख्या में लोग पटना पहुंचे थे.

इनपुट- बृजम पांडे

ये भी पढ़ें-

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए पटना से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 27, 2019, 4:35 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...