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पैतृक गांव खोजने मॉरीशस से 166 साल बाद भारत पहुंचा विदेशी दंपति

News18 Bihar
Updated: October 9, 2019, 2:59 PM IST
पैतृक गांव खोजने मॉरीशस से 166 साल बाद भारत पहुंचा विदेशी दंपति
अपने पूर्वजों की तलाश में मॉरीशस से पटना पहुंचा दंपति.

अपने पूर्वज की तलाश में पटना (Patna) पहुंचे हेमानंद ने बताया कि उनके परदादा बद्री वर्ष 1853 में गिरमिटिया मजदूर के रूप में कोलकाता (Kolkata) से मॉरीशस गए थे.

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पटना. अपनी माटी, अपना वतन सबको प्यारा होता है. खासकर अगर जुड़ाव भारत से हो. मातृभूमि और पूर्वजों से प्रेम का कुछ ऐसा ही मामला बिहार (Bihar) में देखने को मिला है. 166 साल के लंबे अंतराल के बाद एक शख्स अपने पूर्वजों की जानकारी लेने और पैतृक गांव का पता लगाने विदेश से भारत पहुंचा. पटना (Patna) के दानापुर पहुंचे इस दंपति ने बताया कि उनके पूर्वज वर्ष 1853 में कोलकाता से मॉरीशस गए थे.

बिहार के रहने वाले बद्री नाम के एक शख्‍स के पैतृक गांव की तालाश में मॉरीशस से रिटायर्ड पुलिस इंस्पेक्टर दंपति फुलवारी थाना पहुंचे. 166 साल बाद भारत आकर पैतृक गांव की उनकी यह तालाश जारी है. पटना के फुलवारीशरीफ थाने में बैठे हेमानंद बद्री और उनकी पत्नी विद्यावति अपने साथ बद्री नाम के पूर्वज की तस्वीर लेकर उनके गांव की तलाश करते फुलवारीशरीफ पहुंचे हैं. हेमानंद मॉरीशस में पुलिस निरीक्षक के पद से रिटायर्ड हैं और उनकी पत्नी विद्यावति भी सरकारी नौकरी करती हैं.

मजदूर बनकर कोलकाता से गए थे पूर्वज

हेमानंद ने बताया कि उनके परदादा बद्री वर्ष 1853 में गिरमिटिया मजदूर के रूप में कोलकाता से मॉरीशस गए थे, लेकिन वह वापस अपने वतन नहीं लौट सके. उन्‍होंने वहीं अपनी दुनिया बसा ली. हेमानंद कहते हैं कि जब उन्हें मॉरीशस में यह पता चला कि उनके पूर्वज भारत से आए थे तो उन्हें अपने पूर्वजों का गांव देखने की जिज्ञासा हुई. इसके लिए उनका दोस्त उन्हें मॉरीशस स्थित महात्मा गांधी गांधी इंस्टीट्यूट की लाइब्रेरी में ले गए. उनको पता चला कि उनके परदादा पटना जिला के फुलवारी परगाना और दीनापुर गांव के थे. इसके वर्तामान में फुलवारीशरीफ से लेकर दानापुर तक होने की संभावना जताई जा रही है. हेमानंद ने बताया कि उन्‍होंने इस गांव को फेसबुक के माध्यम से खोजा मगर पता नहीं चला.

पांचवीं पीढ़ी के हैं बद्री

हेमानंद ने बताया कि वह बद्री के पांचवीं पीढ़ी के वंशज हैं. उनके पिता मोती लाल और उनके पिता शिवानंद, शिवानंद के पिता गुलाबचंद और गुलाबचंद के पिता बद्री हैं. अंग्रेजी, हिन्दी और भोजपुरी के जानकार होने की वजह से उन्‍हें ज्यादा दिक्‍कतों का सामना नहीं करना पड़ रहा था. उनके पास जो कागजात हैं, उसके मुताबिक बद्री वर्ष 1853 को कोलकाता से जुलिया नामक जहाज से मॉरीशस पहुंचे थे. उनके पास बद्री की तस्वीर भी थी. उन्होंने कहा कि अगर मेरे पूर्वजों के परिवार मिल जाएं तो उन्‍हें बड़ी खुशी होगी.

रिपोर्ट- अमरजीत शर्मा
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First published: October 9, 2019, 2:23 PM IST
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