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बिहार में मरीजों के साथ-साथ अब 'सिस्टम' को भी चुनौती दे रहे एडिस मच्छर

Rajneesh Kumar | News18 Bihar
Updated: October 21, 2019, 11:06 AM IST
बिहार में मरीजों के साथ-साथ अब 'सिस्टम' को भी चुनौती दे रहे एडिस मच्छर
पटना में एक साथ इतनी बड़ी संख्या में डेंगू के मरीज मिलने से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है.

पटना (Patna) स्थित पीएमसीएच (PMCH) के चिकित्सा पदाधिकारी भी मानते हैं कि पिछले साल की तुलना में इस बार मरीजों के आंकड़ों में इजाफा हुआ है जिसको लेकर प्लेटलेट्स की भी खपत काफी गुणा बढी है.

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पटना. डेंगू (Dengue) का डंक बिहार (Bihar) में लगातार जानलेवा बनता जा रहा है और लोग दहशत के साये में जीने को मजबूर हैं. आलम यह है कि अब तक डेंगू ने एक बच्चे समेत चार लोगों की जान भी ले ली है लेकिन स्वास्थ्य विभाग मौत की पुष्टि करने से बच रहा है. डेंगू ने पिछले साल का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है जहां 2018 में मरीजों (Dengue Patient) की संख्या 1835 थी वहीं इस बार अबतक मरीजों की संख्या बढ़कर 2215 तक पहुंच चुकी है.

पटना में सबसे ज्यादा खतरा

सबसे ज्यादा मरीज पटना जिले में डेंगू के शिकार हुए जहां 1625 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है तो भागलपुर में 125 और नालंदा में भी 54 लोग डेंगू के शिकार हुए हैं. हैरानी की बात तो ये है कि अक्टूबर माह खत्म होने को है लेकिन एडिस मच्छर का प्रभाव कम नहीं हो रहा है और पूरे सरकारी तंत्र को मच्छर चुनौती देने में लगा है. चाहे सरकारी अस्पताल हो या फिर निजी अस्पताल, एलोपैथ चिकित्सा हो या फिर आयुर्वेद पद्धति हर जगह डेंगू मरीज ही नजर आ रहा है और बिहार में डेंगू नासूर बनता जा रहा है.

रोजाना मिल रहे नए मरीज

हर रोज राज्य में 100 से 150 नए मरीजों में डेंगू पुष्टि हो रही है और आंकड़ों में जरा भी गिरावट नहीं हो रही है. सबसे ज्यादा मरीज पीएमसीएच में भर्ती हैं तो राज्य के सदर अस्पतालों और निजी अस्पतालों में भी डेंगू मरीजों से बेड फुल है. सबसे बड़ी बात है कि डेंगू मरीज सिर्फ एलोपैथिक इलाज पर निर्भर नहीं हैं बल्कि आयुर्वेदिक चिकित्सा यानि देशी चिकित्सा के जरिए भी डेंगू का इलाज करवा रहे हैं. बिहार आयुष चिकित्सा संघ के अध्यक्ष डॉ सुनील कुमार दूबे का दावा है कि प्लेटलेट्स बढाने के लिए पपीते के पत्ते से बनी दवा कैरिपिल और प्लेटेंजा देने से डेंगू मरीजों की हालत में सुधार हो रहा है यही वजह है कि आयुर्वेदिक अस्पतालों में भी डेंगू के मरीज बड़ी संख्या में भर्ती हो रहे हैं.

आयुर्वेदिक दवा मददगार

मरीज के परिजन भी मानते हैं कि आयुर्वेदिक दवा से भी मरीज की हालत में सुधार हो रहा है. पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ राजीव रंजन प्रसाद का कहना है कि अक्टूबर माह में डेंगू मरीजों में कमी आनी चाहिए थी लेकिन माह खत्म होने को है लेकिन मच्छर प्रभावी है वजह देर तक जलजमाव रहना. जलजमाव की वजह से ही एडिस प्रभावी बना है क्योंकि अधिकतम तापमान घटकर 28 डिग्री तक पहुंच गया है बावजूद आंकड़े कम नहीं हो रहे. पीएमसीएच में भर्ती कई ऐसे मरीज हैं जिनके परिवार के सभी सदस्य डेंगू से पीड़ित हैं और पीएमसीएच में इलाज करवा रहे हैं.
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पटना में बढ़ गई प्लेटलेट्स की खपत

डेंगू से खासकर राजेंद्र नगर,कंकड़बाग,शिवपुरी,बोरिंग रोड.दीघा समेत कई इलाके प्रभावित हैं जहां जलजमाव के बाद लोगों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है. पीएमसीएच के चिकित्सा पदाधिकारी भी मानते हैं कि पिछले साल की तुलना में इस बार मरीजों के आंकड़ों में इजाफा हुआ है जिसको लेकर प्लेटलेट्स की भी खपत काफी गुणा बढी है. पीएमसीएच में भर्ती मरीजों में 30 प्रतिशत मरीजों को प्लेटलेट्स चढाना पड़ रहा है. स्वास्थ्य विभाग की ओर से डेंगू से बचाव को लेकर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और ब्लीचिंग पाउडर के साथ फॉगिंग भी तेजी से किया जा रहा है लेकिन आंकड़ों में कमी नहीं आ सकी है.

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First published: October 21, 2019, 10:54 AM IST
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