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एड्स दिवस: बिहार में बढ़ रही है HIV पॉजिटिव की संख्या, रोजाना आ रहे 10-15 नए मरीज

Rajneesh Kumar | News18 Bihar
Updated: December 1, 2019, 11:41 AM IST
एड्स दिवस: बिहार में बढ़ रही है HIV पॉजिटिव की संख्या, रोजाना आ रहे 10-15 नए मरीज
बिहार में एड्स पीड़ि‍तों की संख्‍या लगातार बढ़ रही है. (सांकेतिक चित्र)

बिहार में मुख्य रूप से पलायन की वजह से एड्स मरीजों (Aids Patient) के आंकड़ों में कमी नहीं हो रही है. प्रदेश के अधिकांश एड्स पीड़ि‍त मजदूत तबके के होते हैं.

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पटना. एचआईवी एड्स (AIDS) को लेकर केंद्र और राज्य सरकार भले ही जागरूकता अभियान चलाने में पीछे नहीं है, लेकिन बिहार में एड्स मरीजों (HIV Positive) की संख्‍या में लगातार वृद्धि हो रही है. राज्य में एड्स के पंजीकृत मरीजों के आंकड़े बढ़कर 95,325 तक पहुंच गया है. मरीजों की बढ़ती संख्या को लेकर न सिर्फ राज्य सरकार ने जगह-जगह एआरटी सेंटर खुलवाए हैं, बल्कि हाल ही में एड्स मरीजों के लिए 'आशा की किरण' नामक योजना की भी शुरुआत की गई है, जिसके एवज में 23 करोड़ की राशि भी खर्च की जा रही है.

तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश से ज्यादा मरीज

बिहार में एड्स रोगियों के इलाज के लिए राज्य के 20 एआरटी सेंटर में मुफ्त एआरवी दवाइयां भी उपलब्ध कराई गई हैं. एआरटी सेंटर पर राज्य सरकार सालाना 38 करोड़ रुपये खर्च करती है. तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश की तुलना में बिहार में मरीजों की संख्या काफी ज्यादा है. गैर सरकारी आंकड़ों की बात करें तो राज्य में लगभग 1 लाख 27 हजार लोग एचआईवी संक्रमण से जूझ रहे हैं. हालांकि, सरकार की ओर से एड्स मरीजों को आशा की किरण नामक योजना के तहत 1500 रुपये भी प्रदान कर रही है. इसके तहत 21,900 लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जा रहा है.

18 वर्ष से अधिक उम्र के मरीजों की संख्या ज्यादा

आंकड़ों की मानें तो बिहार में कुल 57,815 एचआईवी संक्रमित मरीज एआरवी दवा का सेवन कर रहे हैं. इनमें 18 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों की संख्या 53 हजार 667 है. राज्य में कई जगह मरीजों के लिए काउंसिलिंग सेंटर भी खोले गए हैं, जहां एचआईवी मरीजों की गुप्त रूप से काउंसिलंग कर बेहतर जिंदगी जीने, सरकारी योजनाओं का लाभ लेने और संक्रमण से बचने का उपाय बताया जाता है. काउंसलिंग सेंटर के को-ऑर्डिनेटर जितेंद्र कुमार की मानें तो रोज 150 मरीजों की काउंसिंग कर उन्हें जागरूक किया जाता है.

पलायन बन रहा वजह

एड्स कंट्रोल सोसाइटी के असिस्टेंट प्रोजेक्ट डायरेक्टर अभय कुमार का कहना है कि नैको (NACO) की ओर से अब तक 4 फेज का अभियान पूरा कर लिया गया है. अब स्टेप वाइज संक्रमण की स्थिति को दूर करने का प्रयास चल रहा है. उन्होंने कहा कि बिहार में मुख्य रूप से पलायन की वजह से एड्स मरीजों के आंकड़ों में कमी नहीं हो रही है, क्योंकि ज्यादातर मरीज मजदूर वर्ग के होते हैं. ये लोग बिहार से बाहर काम करते हैं.
बिहार में एड्स
एचआईवी पॉजीटिव मरीज


डॉक्टर बोले

फिजिशियन डॉ दिवाकर तेजस्वी मानते हैं कि बिहार, उत्तर प्रदेश और ओडिशा जैसे राज्यों में मरीजों के आंकड़े लगातार बढ़ रहे हैं. इस बीमारी में आजीवन दवा का उपयोग करना पड़ता है. उन्होंने कहा कि सबसे ज्यादा डर प्रेगनेंट महिलाओं को लेकर होता है. एचआईवी पीड़ि‍त गर्भवती महिलों के बच्‍चे भी संक्रमित हो जाते हैं. डॉ. दिवाकर ने कहा कि बिहार में अभी और जागरुकता अभियान चलाने की जरूरत है, ताकि लोगों में इस बीमारी को लेकर जानकारी बढ़े और संक्रमण कम हो सके.

रोज आ रहे नए मरीज

राज्य सरकार ने गंभीर रूप से बीमार एड्स मरीजों के लिए गुरु गोविंद सिंह अस्पताल में विशेष व्यवस्था कराई है, जिसमें रोज 10 से लेकर 15 मरीज भर्ती हो रहे हैं. इनका मुफ्त में न सिर्फ इलाज हो रहा है, बल्कि काउंसलिंग के साथ उन्‍हें दवाई भी दी जा रही है.

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First published: December 1, 2019, 10:42 AM IST
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