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बिहार: आंदोलन की राह पर 'टॉर्च और टॉर्चर' से परेशान नर्सिंग स्टूडेंट्स, जानें पूरा मामला

News18 Bihar
Updated: November 21, 2019, 10:20 AM IST
बिहार: आंदोलन की राह पर 'टॉर्च और टॉर्चर' से परेशान नर्सिंग स्टूडेंट्स, जानें पूरा मामला
हॉस्टर मे कुव्वयवस्था से नाराज गुरु गोविद सिंह अस्पताल की छात्राएं धरने पर बैठी हैं.

छात्राओं का कहना है कि नर्सिंग (Nursing) में करियर बनाने का सपना लेकर आई 240 छात्राएं यहां पढ़ाई करती हैं, लेकिन घटिया क्वालिटी के भोजन की वजह से हमेशा छात्राएं बीमार ही रहती हैं.

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  • Last Updated: November 21, 2019, 10:20 AM IST
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पटना. पटना सिटी के गुरु गोविंद सिंह अस्पताल (Guru Govind Singh Hospital) के नर्सिंग हॉस्टल की छात्राओं ने हॉस्टल (Students of Nursing hostel) की व्यवस्था में सुधार लाने के लिए कई बार कॉलेज प्रशासन से लेकर सरकार तक गुहार लगाई, लेकिन जब हर फरियाद नहीं सुनी गई तो छात्राएं अब आंदोलन (Protest) पर उतर आई हैं. उन्होंने न सिर्फ क्लास का बहिष्कार कर दिया है, बल्कि धरना पर भी बैठ गईं. छात्राएं मांगें पूरी नहीं होने से पहले पीछे हटने को तैयार नहीं हैं.

छात्राओं का आरोप है कि सरकार ने बेहतर भविष्य का सब्जबाग दिखाकर नर्क में रहने पर मजबूर कर दिया है. यहां मानसिक और आर्थिक रूप से भी छात्राएं टॉर्चर हो रही हैं. यहां की स्टूडेंट श्वेता रानी और पूजा कहती हैं कि जबसे नर्सिंग में डिप्लोमा के लिए यहां के ट्रेनिंग स्कूल में दाखिला लिया, तभी से कुव्यवस्था की मार झेलनी पड़ रही है.

हॉस्टल की कुव्यवस्था से नाराज 

हॉस्टल की हालत ऐसी है कि यहां न तो पीने का शुद्ध पानी मिल रहा है न ही खाने के लिए भोजन. रहने के लिए न तो सही कमरे हैं और न ही पढ़ने के लिए सही क्लासरूम. हॉस्टल में चारों तरफ जहां गंदगी का अंबार लगा है, वहीं कई कमरे और बरामदे में अंधेरा भी पसरा रहता है. सबसे खराब हालत मेस की है जहां गंदगी के बीच भोजन तैयार होता है और उसी में छात्राएं खाना खाती हैं.

घटिया क्वालिटी का खाना देने का आरोप

हॉस्टल में 2 आरओ मशीन भी लगे हैं, लेकिन वे महीनों से खराब पड़े हैं. इसकी वजह से ज्यादातर छात्र खरीद कर पानी पीती हैं. कुछ छात्राओं को महज एक ठीक नल से काम चलाना पड़ता है. स्टूडेंट्स की मानें तो हॉस्टल में रहने के भले ही पैसे नहीं देने पड़ते हैं, लेकिन मेस के लिए छात्राएं 1500 रुपये जमा करती हैं. बावजूद घटिया क्वालिटी का खाना परोसा जाता है.

हॉस्टल में घटिया खाने-पीने की व्यवस्था से नाराज हैं छात्राएं.

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वार्डन पर जबरन वसूली का आरोप 

छात्राओं का आरोप है कि वार्डन का टॉर्चर भी सहना पड़ता है और छुट्टी देने के एवज में भी पैसे की मांग की जाती है. उनका कहना है कि नर्सिंग में कैरियर बनाने का सपना लेकर आई 240 छात्राएं यहां पढाई करती हैं, लेकिन घटिया क्वालिटी के भोजन की वजह से हमेशा छात्राएं बीमार ही रहती हैं. उनका आरोप है कि नर्सिंग छात्राओं को अब तक एकबार भी स्टाइपेंड भी नहीं मिला है.


आंदोलन ही एकमात्र विकल्प

नर्सिंग स्टूडेंट्स का का ये भी आरोप है कि बरामदे में 24 घंटे बिजली नहीं होने की वजह से अंधेरा कायम रहता है. वहीं, क्लासरूम से लेकर कमरे तक की खिड़की के शीशे टूटे पड़े हैं. अपने कमरे में जाने और क्लास रूम तक पहुंचने के लिए भी स्टूडेंट्स को टॉर्च की रोशनी का सहारा लेना पड़ता है. जर्जर भवन के गिरते सीलिंग से भी जान का डर सताता है. छात्राओं का कहना है कि ऐसे में इनके पास आंदोलन ही एक विकल्प बचा है.




बिजली नहीं रहने पर मोबाइल टॉर्च की रोशनी से काम चलाती हैं छात्राएं.



छात्राओं की मांग के साथ प्रिंसिपल

पूरे मामले पर नर्सिंग ट्रेनिंग स्कूल की प्राचार्य कुमारी मंजू भी छात्राओं के आरोप को सही ठहरा रही हैं और फंड की कमी की बात कह रही हैं. प्राचार्य की मानें तो हॉस्टल के लिए मात्र 60 हजार रुपये सालाना फंड मिलते हैं, वह भी 2018 से अब तक फंड नहीं मिला है ऐसे में मेंटेनेंस तक नहीं हो पा रहा है.





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First published: November 21, 2019, 9:51 AM IST
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