क्या तेजस्वी को उनके अपने ही अनुभवहीन और रणछोड़ साबित करने पर तुले हैं?

आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने जिस ताम-झाम के साथ छोटे बेटे तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकार सौंपा था, आज उसी तेजस्वी यादव के सितारे बेहद गर्दिश में हैं.

Deepak Priyadarshi | News18 Uttar Pradesh
Updated: June 21, 2019, 5:37 PM IST
क्या तेजस्वी को उनके अपने ही अनुभवहीन और रणछोड़ साबित करने पर तुले हैं?
चुनाव परिणाम ने तेजस्वी के न सिर्फ बढ़ते कदम को थाम लिया बल्कि अपना पैर पीछे खींचने तक को मजबूर कर दिया.
Deepak Priyadarshi
Deepak Priyadarshi | News18 Uttar Pradesh
Updated: June 21, 2019, 5:37 PM IST
आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव ने जिस ताम-झाम के साथ छोटे बेटे तेजस्वी यादव को अपना उत्तराधिकार सौंपा था, आज उसी तेजस्वी यादव के सितारे बेहद गर्दिश में हैं. 23 मई को लोकसभा चुनाव के परिणाम में आरजेडी को शून्य पर आउट कराने के बाद जो तेजस्वी यादव बिहार से निकले, उसके बाद से लेकर आज तक वे नहीं दिखे. किसी को नहीं मालूम कि वे कहां हैं.

महागठबंधन के नेता से लेकर खुद उनकी पार्टी के नेता उन्हें ये कहते हुए खोज रहे हैं कि AES के विकट समय में उन्हें बिहार में होना चाहिए था, लेकिन वे नहीं हैं. उनकी ही पार्टी के नेता उन पर तंज करने लगे हैं कि हो सकता है वे इंग्लैंड में क्रिकेट वर्ल्ड कप देखने गए हों! तो क्या उनके अपने ही तेजस्वी को अनुभवहीन और रणछोड़ साबित करने पर तुले हैं.

लोकसभा चुनाव में महागठबंधन के नेता थे तेजस्वी

2019 के लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव महागठबंधन के नेता थे, लेकिन कई पार्टियों के समूह से बना महागठबंधन भी उनके नेतृत्व में बुरी तरह हारा. सिर्फ एक सीट कांग्रेस ने जीती. आरजेडी तो एक सीट पर नहीं जीत सकी. इस हार ने पूरी आरजेडी को बुरी तरह हिलाकर रख दिया. सबसे अधिक झटका तो तेजस्वी यादव को लगा, जिन्होंने नेता से बडे़ नेता बनने के रास्ते पर अपने पैर बढ़ाए थे.

चुनाव परिणाम ने उनके न सिर्फ बढ़ते कदम को थाम लिया बल्कि अपना पैर पीछे खींचने तक को मजबूर कर दिया. हार से बौखलाए सहयोगी दलों ने भी कोई कोर कसर नहीं छोड़ी. हार का मंथन करने के लिए बैठक बुलाई गई लेकिन इसमें कांग्रेस नहीं आई. साफ संदेश था कि कांग्रेस तेजस्वी के नेतृत्व और फैसलों से नाराज थी. खुद रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे आरजेडी के बड़े नेता ने कहा कि पूरे चुनाव में उन जैसे नेताओं को दरकिनार रखा गया. इसके बाद तेजस्वी जो बिहार से निकले, आज तक नहीं लौटे हैं. वे कहां है, किसी को नहीं मालूम.



अभी बिहार में मुजफ्फरपुर में AES यानी एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम का महाकहर बरस रहा है, और उसके कहर से तकरीबन डेढ़ सौ से अधिक नौनिहालों ने दम तोड़ दिया. लोकसभा की जीत से लबरेज नीतीश कुमार के नेतृत्व में एनडीए सरकार संकट में आ गई है. AES का प्रकोप ऐसा बरसा कि सीएम और डिप्टी सीएम तक के मुंह पर ताला लग गया है.
Loading...

ऐसे में सभी को यह महसूस होने लगा कि विपक्ष के रूप में आरजेडी के लिए फिर से वापसी का यह सबसे बढ़िया मौका है. आरजेडी के नेता अपने नेता को तलाशने लगे कि तेजस्वी आएंगे और आंदोलन का शंखनाद करेंगे. लेकिन फिर वहीं सवाल....तेजस्वी यादव कहां हैं? आरजेडी नेताओं को समझ में नहीं आ रहा कि वे करें तो क्या करें. सरकार मौन है यह तो समझ में आ रहा लेकिन विपक्ष भी मौन है, यह लोगों की समझ से परे है.

तेजस्वी का अज्ञातवास अब आरजेडी नेताओं को भी खलने लगा है. रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे नेता तो अब उन पर तंज करने लगे हैं कि वे कहां हैं, उन्हें नहीं पता, लेकिन हो सकता है कि वे क्रिकेट वर्ल्ड कप देखने इंग्लैंड गए हों. यह अपने आप में बड़ा बयान है कि पार्टी के नेता भी मानने लगे हैं कि नेता प्रतिपक्ष के रुप में तेजस्वी असफल साबित हुए हैं.

जीतनराम मांझी का तंज

चुनाव परिणाम आने के बाद तेजस्वी को भविष्य में अपना नेता मानने से इंकार करने वाले जीतनराम मांझी ने तो यहां तक कह दिया कि चुनाव में वे 200 सभाएं करके थक गए हैं. साथ ही वे यह भी कहने में नहीं चूके कि तेजस्वी में वो अनुभव कहां? जो उनमें और लालू प्रसाद यादव में है. यानी चुनाव से पहले तक तेजस्वी यादव को अपना नेता बताने वाले अब उन्हें अनुभवहीन और असफल साबित करने पर तुले हैं.



कांग्रेस ने भी तेजस्वी यादव के गायब रहने पर सवाल खड़े करते हुए कह दिया है कि बिहार के यह विकट समय है. ऐसे समय में उन्हें रहना चाहिए था क्योंकि नेता प्रतिपक्ष की बड़ी भूमिका होती है. यानी कांग्रेस भी मानने लगी है कि नेता प्रतिपक्ष की बड़ी भूमिका के लिए तेजस्वी उपयुक्त नहीं हैं.

बहरहाल, तेजस्वी यादव कब लौटेंगे, किसी को पता नहीं. लेकिन जून महीने के अंतिम सप्ताह में शुरू हो रहे बिहार विधानमंडल के सत्र में शायद वे लौटें, सदन में AES पर जमकर हंगामा हो, सदन की कार्यवाही भी बाधित हो और AES पर सदन से सड़क की लड़ाई की घोषणा भी हो. लेकिन सवाल यह है कि आज सड़क पर यह मामला नहीं आया तो सदन में इसे उठाने और सदन की कार्यवाही बाधित कर विरोध जताने का क्या औचित्य?

ये भी पढ़ें:

बंगला विवाद: नीतीश सरकार ने सुशील मोदी के आरोपों को किया खारिज, तेजस्वी को दी क्लीन चिट

तीन तलाक बिल का विरोध करेगी JDU, केसी त्यागी बोले- नाजुक मसले पर NDA में कभी नहीं हुई चर्चा
First published: June 21, 2019, 4:18 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...