Exclusive: बिहार में स्टेडियम घोटाला, करोड़ों खर्च हुए लेकिन बनीं सिर्फ सीढ़ियां

सरकारी कागजों में बिहार के अलग अलग हिस्सों में 100 के करीब स्टेडियम बनकर तैयार है लेकिन जमीन हकीकत कुछ और ही है.

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बिहार में स्टेडियम बनाने के नाम पर करोड़ों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है. प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में कागजों पर करोड़ों रुपए के स्टेडियम तो बन गए लेकिन जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं है.

बता दें कि बिहार में खेल के स्तर को बढ़ाने और खिलाड़ियों को सुविधा देने के लिए सरकार ने 2008 -09 वित्तीय वर्ष में मुख्यमंत्री खेल विकास योजना बनाई थी. इस योजना के तहत हर अनुमंडल और प्रखंड स्तर प्रर आउटडोर स्टेडियम बनाने का निर्णय लिया गया. 2008 -09 से 2013 -14 तक स्टेडियम बनाने के लिए 69 करोड़ 57 लाख 66 हजार रुपए की स्वीकृति दी गई.

विभागीय सूचना के अनुसार, अभी तक कुल 287 स्टेडियम निर्माण की स्वीकृति मिली है. 2017 तक 114 स्टेडियम तैयार भी कर लिया गया जबकि 66 स्टेडियम अभी निर्माणाधीन है और बाकी पर प्रक्रिया चल रही है. बिहार में 100 से ज्यादा स्टेडियम तैयार हैं और खिलाड़ियों के भविष्य संवार रहे हैं. ये हमारा नहीं माननीय मंत्री जी का भी दावा है.



बिहार के कला संस्कृति मंत्री कृष्ण कुमार ऋषि कहते हैं कि मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि बिहार में 100 से ज्यादा स्टेडियम तैयार है और जल्द ही 534 प्रखंडों में स्टेडियम बना लिया जाएगा. जब हमने तसल्ली के लिए पूछ लिया कि क्या आपने देखा है कि वो स्टेडियम है भी या नहीं, मंत्री जी कुछ भी नहीं बोल पाए.
न्यूज़ 18 की टीम ने मंत्री जी के दावों को धरातल पर तलाशना शुरु किया तो हकीकत कुछ और ही सामने आया. बक्सर के ब्रह्मपुर बीएन उच्च विद्यालय में सरकारी दावों के अनुसार 45 लाख रुपये खर्च कर स्टेडियम बनाये जाने की बात कही गयी. जब हमारी टीम यहां पहुंची तो यहां स्टेडियम का नामो निशान नहीं था. स्टेडियम के नाम पर बस 20 फीट लंबी 5 सीढ़ियां थी, जिसका निर्माण आदित्य कंस्ट्रक्शन ने किया था.

इसके बाद जब न्यूज 18 की टीम भोजपुर में बिहिया प्रखंड का +2 उच्च विद्यालय जादोपुर पहुंची तो यहां का नजारा भी हैरान करने वाला था. सरकारी दावों के अनुसार यहां पर 28 लाख रुपये खर्च कर फुटबॉल स्टेडियम का निर्माण कराया गया था, लेकिन यहां स्टेडियम के नाम पर यहां चारों तरफ जंगल के झाड़ थे और एक कोने में यहां भी पांच सीढ़ियां बनायी गयी थी.

कुछ ऐसी ही स्थिति हमे बक्सर के ही केसठ उच्च विद्यालय, कैमूर के कुदरा प्रखंड स्थित निशान सिंह मैदान, नालंदा के नूरसराय स्थित चंडासी मैदान में भी देखने को मिली. ये तो महज कुछ उदारहण हैं, जहां स्टेडियम बनाने के नाम पर पैसे का बंदरबांट हुआ, लेकिन तलाशने पर ऐसे 100 से ज्यादा स्टेडियम मिल जायंगे जहां स्टेडियम बनाने के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ है.

न्यूज़ 18 के पास बिहार में बने तमाम स्टेडियमों का पूरा कच्चा चिट्ठा है जो ये चीख चीख गवाही दे रहा है कि बिहार में खेल के नाम पर कैसे पैसे बनाये गए. सबसे चौकाने वाली बात यह है कि इस योजना के तहत बनाये गए अधिकतर स्टेडियम भवन निर्माण विभाग और ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा बनाये गए है.

ऐसा नहीं है कि स्टेडियम के नाम पर हुए पैसो का खेल के बारे में  कला संस्कृति विभाग को पता नहीं है. पूर्व कला संस्कृति मंत्री शिवचंद्र राम ने बकायदा इसके लिए जांच भी बैठाई, पर हकीकत ये है कि ना तो अधिकारियों ने कोई जांच की और ना ही मामले को सामने आने दिया. इस बारे में शिवचंद्र राम ने कहा कि हमने तो पहले ही जांच की बात थी लेकिन वर्तमान सरकार ने इसको लेकर कुछ नहीं किया.

बिहार में स्टेडियम की हकीकत सबसे सामने है. इन्हीं स्टेडियम की बदौलत सरकार ने पिछले दिनों ऐलान किया था कि ओलंपिक में पदक पाने वाले खिलाड़ी को 2 करोड़ का इनाम देगी. इस स्टेडियम में कौन-से खेल के ओलंपिक खिलाड़ी पैदा होंगे, यह हकीकत आपके सामने है.
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