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बिहार से राज्यसभा की एक सीट पर NDA के कितने दावेदार?

बिहार की राज्यसभा की एक सीट को लेकर किसका दावा कितना मजबूत

बिहार की राज्यसभा की एक सीट को लेकर किसका दावा कितना मजबूत

बिहार (Bihar) की राज्यसभा (Rajya Sabha) की एकमात्र सीट पर अभी तक एनडीए (NDA) की तरफ से किसी भी नाम का एलान नहीं किया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारे में चर्चा है कि बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain), बीजेपी में ही संगठन का काम देख रहे राजेंद्र सिंह (Rajendra Singh), जेडीयू के प्रधान महासचिव केसी त्यागी (KC Tyagi) और जेडीयू नेता सैयद महमूद अशरफ (Mahmud Ashraf) का नाम हो सकता है.

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नई दिल्ली. बिहार (Bihar) और उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की दो राज्यसभा (Rajya Sabha)  सीटों के लिए अगले कुछ दिन में चुनाव होने हैं. इसके लिए 4 अक्टूबर यानी शुक्रवार तक नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख है. उत्तर प्रदेश की राज्यसभा सीट पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण (Arun Jaitley) जेटली के निधन से और बिहार की राज्यसभा सीट जाने-माने वकील और वाजपेयी सरकार में कानून मंत्री रहे राम जेठमलानी (Ram Jethmalani) के निधन से खाली हुई है.

बिहार से राज्यसभा के लिए RJD से चुने गए राम जेठमलानी का कार्यकाल वर्ष 2022 में खत्म होना था, लेकिन हाल ही में उनका निधन हो गया. लिहाजा इस सीट से जो भी नेता राज्यसभा के लिए चुना जाएगा, उसका कार्यकाल तकरीबन तीन साल का ही होगा. राज्यसभा में ऐसा ही नियम है.

राज्यसभा की एकमात्र सीट को लेकर सियासत गर्म

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बिहार के सीएम नीतीश कुमार के साथ डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी बात करते हुए. (फाइल फोटो)


राज्यसभा की एकमात्र सीट को लेकर बिहार के राजनीतिक गलियारे में गहमागहमी शुरू हो गई है. हालांकि हरियाणा विधानसभा चुनाव और बिहार में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए, राज्यसभा की खाली हुई इस सीट के बारे में चर्चा नहीं हो रही है, लेकिन बीजेपी आलाकमान की इस सीट पर पूरी नज़र है. बीजेपी चाह रही है कि इस सीट को हासिल कर वो राज्यसभा में और मजबूत बने.

बीजेपी और जेडीयू के अपने-अपने दावे

हालांकि, अभी तक बीजेपी और जेडीयू में बिहार में बाढ़ के हालात को देखते हुए इस पर चर्चा नहीं हुई है, लेकिन संभावना है कि अगले एक-दो दिन में सहमति बन जाएगी कि यह सीट किसके पाले में जाएगी. बिहार के सियासी गलियारे में चर्चा है कि ये सीट जेडीयू के खाते में जाएगी. इसकी वजह है कि जेडीयू राज्य विधानसभा में बीजेपी से बड़ी पार्टी है. ऐसे में सवाल उठता है कि इस सीट पर जेडीयू के तरफ से किन-किन नेताओं की दावेदारी मजबूत है?

KC Tyagi
जेडीयू नेता केसी त्यागी की दावेदारी काफी मजबूत मानी जा रही है


दूसरा सवाल है कि क्या ये सीट बीजेपी को मिलेगी या फिर जेडीयू इस पर अपना हक जताएगी? दोनों पर्टियों के नेता इस इकलौती सीट को लेकर दावेदारी कर रहे हैं. जानकार मान रहे हैं कि अगर बीजेपी के पाले में ये सीट आती है तो बीजेपी किसी संगठन के आदमी को राज्यसभा भेज सकती है. इसमें जो एक नाम उभरकर सामने आ रहा है वो झारखंड के संगठन प्रभारी मंत्री रहे राजेंद्र सिंह का है. राजेंद्र सिंह राजपूत जाति से आते हैं और उनका संगठन में खासा दबदबा है. हालांकि राजेंद्र सिंह का पक्ष एक कारण से कमजोर हो सकता है, वो ये कि बिहार बीजेपी में पहले से ही राजपूत जाति के कई सांसद और विधायक मौजूद हैं.

बीजेपी को सीट मिलने की स्थिति में कौन होगा उम्मीदवार

बिहार बीजेपी से दूसरा नाम पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे सैयद शाहनवाज हुसैन (Shahnawaz Hussain) का है. शाहनवाज हुसैन 2014 लोकसभा चुनाव में भागलपुर सीट से आरजेडी उम्मीदवार से मामूली अंतर से हार गए थे. जबकि लोकसभा चुनाव 2019 में सीट शेयरिंग के तहत ये सीट जेडीयू के हिस्से में चला गया था इसलिए उनकी उम्मीदवारी पर विराम लग गया. पार्टी सूत्रों से जो जानकारी मिल रही है उसमें शाहनवाज हुसैन का नाम भी लिया जा रहा है. हालांकि ये भी कहा जा रहा है कि अगर बीजेपी को ये सीट मिलती है तो कोई चौकाने वाला नाम भी सामने आ सकता है.

बिहार बीजेपी के एकमात्र मुस्लिम चेहरा शाहनवाज हुसैन की भी दावेदारी मजबूत दिख रही है


वहीं जेडीयू में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा पार्टी के मुख्य महासचिव केसी त्यागी के नाम की हो रही है. बीते लोकसभा चुनाव में यह चर्चा चल रही थी कि केसी त्यागी को पश्चिमी यूपी के किसी सीट से एनडीए का प्रत्याशी बनाए जाएंगे, लेकिन बीजेपी के साथ सहमति नहीं बनने के कारण केसी त्यागी चुनाव लड़ नहीं पाए थे. ऐसे में ज्यादा संभावना है कि जेडीयू केसी त्यागी को राज्यसभा भेजे.

जेडीयू के तरफ से कौन-कौन दावेदार

हालांकि, बिहार की राजनीति को करीब से समझने वाले कहते हैं, 'शायद ही केसी त्यागी को नीतीश कुमार राज्यसभा भेजेंगे? इसके पीछे तर्क यह दिया जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार को एक ऐसे नेता की जरूरत है जो मुस्लिम वोट बैंक को अपने पाले में कर सके.

ऐसे में जानकार मान रहे हैं कि जेडीयू अगर अकेले बिहार में चुनाव लड़ना पड़े तो हो सकता है कि नीतीश कुमार अल्पसंख्यक समुदाय से किसी को राज्यसभा भेजने का निर्णय लें. अगर जेडीयू बीजेपी से अलग होती है तो आरजेडी के साथ रहने वाला बहुसंख्यक अल्पसंख्यक समुदाय फिर से जेडीयू का रुख कर सकता है. अली अनवर के पार्टी से जाने के बाद कोई ऐसा बड़ा मुस्लिम चेहरा पार्टी के पास नहीं है जो राज्यसभा में या फिर मीडिया में पार्टी का मजबूती से पक्ष रखे.

बिहार और उत्तर प्रदेश की राज्यसभा की एक-एक सीट के लिए चुनाव आयोग ने नोटिफिकेशन जारी कर दिया है


इस लिहाज से देखें तो किशनगंज से पिछले लोकसभा चुनाव में जेडीयू के उम्मीदवार रहे सैयद महमूद अशरफ राज्यसभा भेजे जा सकते हैं. बिहार में जिन 17 सीटों पर जेडीयू लोकसभा चुनाव लड़ी थी, उनमें से सिर्फ किशनगंज सीट पर ही उसे हार का सामना करना पड़ा था. लेकिन पार्टी के 16 लोकसभा सांसदों में एक भी मुस्लिम नहीं हैं. राज्यसभा में पार्टी की मुस्लिम सांसद कहकशां परवीन का कार्यकाल अगले साल अप्रैल में खत्म होने वाला है. इसके साथ ही जेडीयू की तरफ से पूर्व आईएफएस अधिकारी और पार्टी के नेता पवन वर्मा और बिहार सरकार पूर्व मुख्य सचिव अंजनी कुमार सिंह का नाम भी चल रहा है. अंजनी कुमार सिंह फिलहाल नीतीश कुमार के सलाहकार के तौर पर काम कर रहे हैं.

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