बिहार में 'आयुष्मान भारत' योजना खटाई में, अभी तक 5 फीसदी लोगों को भी नहीं मिला लाभ

बिहार में आयुष्मान भारत योजना के हालात अच्छे नहीं हैं. अभी तक सिर्फ पांच फीसदी लाभुकों को ही इस योजना का लाभ मिल पाया है.

News18 Bihar
Updated: November 9, 2018, 3:59 PM IST
बिहार में 'आयुष्मान भारत' योजना खटाई में, अभी तक 5 फीसदी लोगों को भी नहीं मिला लाभ
फाइल फोटो
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Updated: November 9, 2018, 3:59 PM IST
मोदी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं में से एक 'आयुष्मान भारत' योजना की हालत शुरुआत में ही अच्छी नहीं है. देश के अन्य हिस्सों की तरह बिहार के अधिकांश जिलों में लाभार्थी योजना का लाभ लेने के लिए दर-दर भटक रहे हैं. अस्पतालों की ओर से लाभुकों को तारीख पर तारीख दी जा रही है. लगभग सभी अस्पतालों में अलग से काउंटर खोले जाने के बाद भी राजधानी पटना समेत कई जिलों में रजिस्ट्रेशन की रफ्तार धीमी है. साथ ही प्रदेश के कई जिलों में लाभुकों से योजना का लाभ देने के बदले रिश्वत की भी मांग की जा रही है. सरकारी आकड़ों के मुताबिक, अब तक 5 फीसदी लाभुकों को भी योजना का लाभ नहीं मिल सका है.

बता दें, केंद्र सरकार की इस महत्वकांक्षी योजना की शुरुआत देशभर में  25 सितंबर को हुई थी. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छतीसगढ़ में एक जनसभा के दौरान इस योजना को लॉन्च किया था. सरकार का लक्ष्य है कि 1 करोड़ 8 लाख आर्थिक रुप से कमजोर परिवारों को इस योजना का लाभ मिले. लेकिन सच्चाई यह है कि अभी तक 5 प्रतिशत लाभुकों को भी योजना का लाभ नहीं मिल सका है.

बात यदि पटना जिले की करें तो यहां 5 लाख लोगों को योजना का लाभ मिलना है, लेकिन शहरी और ग्रामीण एरिया में अब तक रजिस्ट्रेशन का काम भी पूरा नहीं हो सका है. पटना के ग्रामीण इलाकों में 3 लाख रजिट्रेशन हुआ है, जबकि शहरी इलाके में महज 1 लाख लाभुकों का ही रजिट्रेशन हो पाया है. हैरानी की बात यह है कि बिहार के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में महज 64 मरीजों का ही रजिस्ट्रेशन हुआ है. इनमें से महज 24 मरीजों का इलाज हो सका है. कहा जा रहा है कि मात्र 6 मरीजों का ही क्लेम दर्ज हुआ है.

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पीएमसीएच के नोडल पदाधिकारी कर्नल अहमद अंसारी का कहना है कि अस्पताल में भर्ती 45 प्रतिशत मरीजों को लाभ देना है, लेकिन यहां 2000 भर्ती मरीजों में मात्र 24 को ही लाभ मिला है. अंसारी खुद मानते हैं कि स्थिति संतोषजनक नहीं है. क्योंकि चंद बीमित मरीजों के अकाउंट खोले जाने के बाद भी अकाउंट में पैसे अब तक नहीं पहुंचे हैं. लगभग, यही हाल पटना के आईजीआईएमएस और एनएमसीएच समेत तमाम बड़े अस्पतालों का है, जहां लाभुकों को लाभ नहीं मिला है.

गया जिले की तस्वीरें भी कुछ ऐसी ही हैं. यहां तो योजना में शुरुआत से ही अनियमितता देखने को मिल रही है. यहां तक कि कार्ड बनाए जाने के नाम पर नजराने मांगे जा रहे हैं. जिले के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों में मात्र 71 लाभुकों का ही गोल्डन कार्ड बन पाया है.

गया के मेडिकल थाना क्षेत्र के रहने वाले उदय कुमार का आरोप है कि जब वे अपने पिता के कार्ड बनाने के लिए शहर के जय प्रकाश नारायण पिलीग्राम अस्पताल में गए तो पहले वहां के कम्प्यूटर ऑपरेटर के द्वारा लिस्ट में नाम नहीं आने की बात कही गई. फिर कार्ड बनाने के लिए 100 रुपए की मांग की गई. लेकिन पैसे नहीं होने की वजह से मरीज मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल चला गया. यहां पर उसके पिता की कार्ड बनवाने की प्रकिया शुरू हुई.
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वहीं, अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल अस्पताल के सहायक अधीक्षक केके अग्रवाल ने योजना की तारीफ करते हुए कहा कि अभी परेशानी है. जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा.

खगड़िया जिले में गोल्डन कार्ड उन्हीं लोगों का बन पाया है जो अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हैं. उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में भी योजना की रफ्तार धीमी है. यहां महज 2 लाभार्थी को ही रोज लाभ मिल पा रहा है. जबकि सभी कागजात और शर्तों को लोग पूरा करने में सक्षम हैं. लोगों को काउंटर से सिर्फ इसलिए लौटाया जा रहा कि बीमार मरीजों को अस्पतालों में भर्ती होने के लिए गोल्डन कार्ड बनाया जाना है.

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योजना के तहत मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल और एसकेएमसीएच में दो काउंटर लाभुकों के लिए खोले गए हैं, जिसके तहत इलाज के लिए गोल्डन कार्ड बनवाने की व्यवस्था की गई है. योजना के लाभ के लिए लाभुकों से राशन कार्ड, आधार कार्ड सहित 5 प्रकार के कागजातों की मांग की जाती है. फिर नाम, पता और आयु के सत्यापन के बाद लाभुकों को गोल्डन कार्ड दिया जाता है. लेकिन पिछले 5 दिनों से मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल से कार्ड बनवाने आए लोगों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है.

इतना ही नहीं, जिन 450 लोगों का रजिस्ट्रेशन मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में किया गया है, उन सभी के गोल्डन कार्ड भी नहीं आए हैं. 20 दिन पहले से ही निबंधन कराने वाले लोगों को बार-बार आयुष्मान भारत के काउंटर से खाली हाथ लौटना पड़ रहा है. आंकड़ों की माने तो मुजफ्फरपुर के सदर अस्पताल में अब तक 6 और एसकेएमसीएच में 66 लोगों का इलाज हुआ है. जबकि 522 लोगों को योजना के तहत रजिस्ट्रेशन किया गया है, जिनमें से 369 लोगों का गोल्डन कार्ड बनाया गया है.

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बात यदि अरवल जिले की करें तो यहां पर आयुष्मान भारत स्कीम से मरीजों को नहीं के बराबर लाभ मिल पाया है. यहां पर भी यह योजना बहुत ही धीमी गति से चल रही है. अरवल सिविल सर्जन की माने तो अब तक जिले में 80 लोगों को इस योजना का लाभ मिल चुका है, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है. कहा जा रहा है कि इस योजना से मात्र तीन लोगों को ही फायदा हुआ है.

वहीं, आयुष्मान भारत योजना को लेकर जब सूबे के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय सफाई देते हुए कहा कि सामाजिक और आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार इस योजना का लाभ उठाने के लिए जो भी लोग योग्य हैं, उन्हें चिन्हित किया गया है और उन्हें हर हाल में लाभ दिया जाना है.

(रजनीश कुमार की रिपोर्ट)
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