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जनता के मुद्दों से 'बेशर्म बेफिक्री'! बिहार विधान सभा में 32 लाख खर्च कर पूछा गया महज एक सवाल

News18 Bihar
Updated: November 27, 2019, 2:36 PM IST
जनता के मुद्दों से 'बेशर्म बेफिक्री'! बिहार विधान सभा में 32 लाख खर्च कर पूछा गया महज एक सवाल
बिहार विधान सभा की कार्यवाही में एक दिन का खर्च आठ लाख रुपये होता है, लेकिन बीते चार दिनों में एक ही सवाल पूछा गया है.

सत्ता पक्ष का कहना है कि सवाल नहीं पूछे जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्ष की ओर से हंगामा शुरू किया जा रहा है. विधान सभा के पोर्टिको में पहुंचकर विपक्षी नेता जमकर नारेबाजी करते हैं.

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पटना. बिहार विधान सभा का शीतकालीन सत्र ( Winter session of Bihar Legislative Assembly ) एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ रहा है. पिछले चार दिनों में से विधान सभा (Legislative Assembly proceedings) की कार्यवाही हंगामे के कारण बाधित हो रही है. सत्ता पक्ष सदन नहीं चलने को लेकर विपक्ष पर आरोप लगा रहा है जबकि विपक्ष सत्तापक्ष को घेरने में लगा है.
चार दिनों में सिर्फ एक ही सवाल पूछा गया

बिहार विधान सभा के शीतकालीन सत्र के दौरान सवाल पूछे जाने का हाल यह है कि पिछले 4 दिनों से चल रही कार्यवाही में अभी तक सिर्फ अभी तक एक सवाल ही पूछा जा सका है. बुधवार को बीजेपी नेता मिथिलेश तिवारी ने ग्रामीण विकास विभाग से पूछा गया सवाल ही पटल पर आ सका, जिसका जवाब ग्रामीण विकास मंत्री ने दिया.



BJP नेता ने पूछा चार दिन में पहला सवाल 

मिथिलेश तिवारी ने सवाल किया कि केंद्र और बिहार के योजनाओ का लाभ लेने के लिए सामाजिक सुरक्षा योजनाओ में जिन लोगों के नाम छूट गए हैं, ऐसे सारे लोगों के नाम शामिल किए जाएं. ग्रामीण विकास मंत्री ने सदन में आश्वासन देते हुए कहा कि जल्द से जल्द वैसे सारे लोगों के नाम शामिल किए जाएंगे जिनके नाम छूट गए हैं.

कार्यवाही शुरू होते ही होने लगता है हंगामा

सवाल नहीं पूछे जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही विपक्ष की ओर से हंगामा शुरू किया जा रहा है. विधान सभा के पोर्टिको में पहुंचकर विपक्षी नेता जमकर नारेबाजी करते हैं और बढ़ते अपराध और भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए सदन की कार्यवाही नहीं चलने दे रहे हैं. अगर किसी तरह सदन के अंदर कार्यवाही शुरू होती भी है तो आरजेडी और कांग्रेस के नेता वेल में पहुंच जा रहे हैं और जमकर नारेबाजी कर रहे हैं.




विधान सभा भवन के पोर्टिको में प्रदर्शन कर रहे विपक्षी विधायक.



एक दिन सदन चलाने में 8 लाख होते है खर्च

जाहिर है इस हंगामे और शोर के बीच सवाल ये है कि जनता के सवालों से जुड़े मुद्दों पर नेता बेफिक्र क्यों हैं? जबकि एक सत्ता और विपक्ष के आपसे हंगामे में सदन का महत्वपूर्ण समय यूं ही खत्म हो जा रहा है. गौरतलब है कि सदन के एक दिन की कार्यवाही चलाने में 8 लाख रुपए खत्म होते हैं. जनता के टैक्स के पैसे से ही सदन चलता है. जरूरत है  सदन की कार्यवाही चले और जनता की समस्याएं पटल पर उठाई जाएं.


 सदन नहीं चलने पर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप

विधानसभा की कार्यवाही नहीं चलने के मामले में जहां विपक्ष जहां सत्ता पक्ष पर सवाल खड़े कर रहा है वहीं, सत्ता पक्ष विपक्ष को दोषी मान रहा है. आरजेडी नेता भोला यादव ने सत्ता पक्ष पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सरकार चाहती ही नहीं है की जनता के मुद्दे सदन में उठे. विपक्ष बढ़ते अपराध और महंगाई के सवालों को कार्य स्थगन के माध्यम से पटल पर ला रही है पर सभी कार्य स्थगन प्रस्ताव रद्द कर दिए जा रहे हैं.


दूसरी तरफ संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने विपक्ष को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विपक्ष को जनता की समस्याओं और परेशानियों से कोई लेना-देना नहीं. विपक्ष अपना कोई सवाल नियमावली के अनुसार पटल पर उठाएगा तो सारे प्रश्नों का जवाब देने के लिए सरकार तैयार है. विपक्ष सवाल उठाने से डरता है.


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First published: November 27, 2019, 2:22 PM IST
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