...तो RJD में खत्म हो गया 'लालू युग'! पार्टी ऑफिस की दीवार पर लगे पोस्टर के क्या हैं संकेत?

लालू प्रसाद यादव. ((फाइल फोटो)
लालू प्रसाद यादव. ((फाइल फोटो)

RJD के पोस्टर पर सिर्फ और सिर्फ तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ही छाए हुए हैं. आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और तेज प्रताप यादव पोस्टर से पूरी तरह गायब हो चुके हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 24, 2020, 2:51 PM IST
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पटना. बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) को लेकर इन दिनों बिहार में सरगर्मी काफी तेज हो गई है. सियासी दल एक दूसरे पर पोस्टर-बैनर के जरिये जमकर हमला बोल रहे हैं. जेडीयू (JDU) की ओर से जहां पटना के अलग-अलग चौक चौराहों पर लालू परिवार पर तंज कसते हुए पोस्टर लगाया गया है, दूसरी तरफ एक पोस्टर में PM नरेंद्र मोदी और CM नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) की जुगलबंदी को दिखाया गया है. इसी तरह सीएम नीतीश के डीएनए के सवाल को लेकर भी पोस्टर लगाए गए हैं. लेकिन, इन सबमें एक खास पोस्टर आरजेडी (RJD) दफ्तर के बाहर भी लगा है, जिसमें सिर्फ तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ही नजर आ रहे हैं.

RJD के पोस्टर पर सिर्फ और सिर्फ तेजस्वी यादव ही छाए हुए हैं और उनके अलावा कोई और नजर नहीं आ रहा है. यहां तक कि आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) और तेजप्रताप यादव भी पोस्टर से पूरी तरह गायब हो चुके हैं. RJD की तरफ से जो पोस्टर पार्टी कार्यालय के बाहर लगाया गया है, उसमें तेजस्वी को परिवर्तन की छवि लगायी गई है. जाहिर है सवाल उठ रहे हैं कि जो तेजस्वी अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं, उनके ही पोस्टर से पिता लालू यादव क्यों गायब हो गए? सवाल ये भी उठ रहा है कि क्या लालू की छवि से पीछा छुड़ाना चाहते हैं तेजस्वी?

दरअसल, ये सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं, क्योंकि वर्ष 2019 के चुनाव में भी ठीक ऐसे ही हालात थे. लालू प्रसाद यादव की अनुपस्थिति में उनके बेटे तेजस्वी यादव ने आरजेडी की कमान संभाली तो लोगों को लगा कि उनका नेतृत्व कुछ अलग होगा. नई सोच और नए तेवर के साथ वे बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में अपनी अलग पहचान बनाएंगे.



पटना में आरजेडी दफ्तर के बाहर लगा तेजस्वी यादव का पोस्टर.

राजनीतिक जानकारों की मानें तो शुरुआती दौर में उन्होंने तेवर भी दिखाए और सियासी तीर भी चलाए. लोकसभा चुनाव (Lok sabha Election) से पहले तो उन्होंने अपने आपको इस तरह से प्रोजेक्ट किया जिससे लगने लगा था कि वे बिहार के नेतृत्व के लिए तैयार हैं. चुनाव से कुछ महीने पहले तक वे ये कहते रहे कि आरजेडी समाज के सभी लोगों की पार्टी है, लेकिन चुनाव के समय जिस तरह से उन्होंने सवर्ण आरक्षण का विरोध किया, उससे लगा कि वह भी लालू की राह पर ही चल रहे हैं.

इसके बाद तेजस्वी ने चुनाव में अत्यंत पिछड़ा वर्ग, पिछड़ा वर्ग, दलित और मुस्लिमों को उचित भागीदारी देने की बात तो कही, लेकिन सवर्णों को दरकिनार कर दिया था. चुनाव के नतीजे सामने आए तो तेजस्वी के सेट फॉर्मूले को बड़ा झटका लगा और लालू स्टाइल राजनीति को भी 'चूक' गया बताया जाने लगा.

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि इसके बाद से तेजस्वी ने भूल सुधार करने की ठानी और जगदानंद सिंह को पार्टी का अध्यक्ष बनवा दिया. जाहिर है तेजस्वी को सर्वसमाज के नेता के तौर पर छवि बनानी है. ऐसे में लालू यादव का चेहरा वास्तव में बिहार की राजनीति में सामाजिक एका में एक बड़ी अड़चन है.

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि तेजस्वी नहीं चाहते कि लड़ाई  लालू प्रसाद यादव और नीतीश कुमार के चेहरे पर हो. (फाइल फोटो)


राजनीतिक जानकार बताते हैं कि लालू यादव की मुस्लिम-यादव गठजोड़ में भी एक तरह से सेंध लग चुकी है और थोड़ा-थोड़ा हिस्सा ही सही, जेडीयू, ओवैसी और छोटे सियासी दलों में बंटने लगा है. ऐसे में तेजस्वी के सामने सियासत की नई लाइन खींचने की मजबूरी है.

यही नहीं, लालू प्रसाद यादव का चेहरा आने के साथ ही लड़ाई युवा तेजस्वी बनाम नीतीश कुमार के बीच नहीं फिर लालू यादव और नीतीश कुमार की हो जाती. ऐसे में तेजस्वी बदली हुई रणनीति पर आगे बढ़ रहे हैं. राजनीतिक जानकार बताते हैं कि तेजस्वी की आरजेडी पर पूरी पकड़ हो गई है, ऐसे में अब वे सिर्फ और सिर्फ खुद को बिहार का भविष्य बताएंगे और ऐसे में लालू का चेहरा पीछे छूट जाएगा.

हालांकि, BJP का कहना है कि जिस पार्टी में कोई सिद्धांत, कोई नीति नहीं हो तो उस पार्टी में निजी महत्वकांक्षा हो तो ऐसी ही तस्वीर देखने को मिलती है. वहीं, RJD नेताओं का कहना है कि चूंकि तेजस्वी सेनापति हैं, इसलिए उनकी तस्वीर है. लेकिन, पूरी पार्टी लालू यादव के विचारधारा से चल रही है. जिनको जो बोलना है बोलने दीजिये.

राजनीतिक जानकार बताते हैं कि तेजस्वी यादव लालू यादव की राजनीति से आगे भविष्य की राजनीति करना चाहते हैं. फाइल फोटो


राष्ट्रीय जनता दल के पोस्टर से लालू प्रसाद यादव की तस्वीर गायब होने को लेकर कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौर ने कहा कि विधानसभा चुनाव में मुद्दा पोस्टर से बड़े नेताओं की तस्वीर गायब होना नहीं, बल्कि नीतीश कुमार के 15 साल के शासन का है. अपराधिक घटनाओं में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है. किसान त्रस्त हैं और उद्योग-धंधे चौपट हैं.

राजनीतिक टीकाकार यह भी कहते हैं कि सियासत में पोस्टर और सीन से गायब होना कोई बड़ा मुद्दा नहीं रहा है. कभी नीतीश कुमार के पोस्टर में जॉर्ज फर्नांडीस तो पीएम नरेंद्र मोदी की तस्वीर में लालकृष्ण आडवाणी और मुरली मनोहर जोशी जैसे नेता गायब रहे, लेकिन बिहार के संदर्भ में आरजेडी के पोस्टर से लालू प्रसाद का हटना और तेजस्वी का आगे आना 'लालू युग' के खत्म होने का संकेत भी है.
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