Opinion: भारत के कोरोनावायरस नौकरशाहों की वैक्सीन कब बनेगी !
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Opinion: भारत के कोरोनावायरस नौकरशाहों की वैक्सीन कब बनेगी !
नौकरशाही ब्रिटेन के द्वारा दिया गया सबसे खतरनाक मिसाइल और हथियार है.

हरित क्रांति कहां आई? पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश में. बिहार के खेतिहर मज़दूर नक़दी कमाने पंजाब और हरियाणा चले गए. हरित क्रांति के नाम पर बिहार को उसके सबसे महत्वपूर्ण leguminous खेसारी की खेती से बाहर कर दिया गया.

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मनोज मलयानिल

हरित क्रांति कहां आई? पंजाब, हरियाणा और दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश में. बिहार के खेतिहर मज़दूर नक़दी कमाने पंजाब और हरियाणा चले गए. हरित क्रांति के नाम पर बिहार को उसके सबसे महत्वपूर्ण leguminous खेसारी की खेती से बाहर कर दिया गया. खेसारी इतनी अधिक मात्रा में nitrogen फिक्स करता था कि पूरे साल इसकी chemical nitrogen की ज़रुरत नहीं होती. और तब सरकार को हर साल एक लाख करोड़ रुपये का आयात करना नहीं पड़ता. घाटा किसका तो किसानों का और बिहार में नफा किसका तो नौकरशाही का.

सबसे ज़्यादा उद्योग धंधे कहां लगे? सबसे ज़्यादा कल कारख़ाने दक्षिण और पश्चिमी राज्यों में लगे. बिहार, यूपी, एमपी के मज़दूर कमाने खटाने गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश चले गए. तब सारे समृद्ध राज्यों ने विपत्ति के समय इन मज़दूरों के साथ क्या किया. अपने-अपने राज्यों से इन्हें चले जाने देने में अपनी भलाई समझी.



'सरकारों ने मजदूरों को भाग्य पर मरने के लिए छोड़ा'



मैंने कुछ हफ़्ते पहले इसी मंच पर कहा था कि देश की सरकारों ने मज़दूरों को उनके भाग्य पर मरने को छोड़ दिया. प्रवासी मज़दूरों ने अभी पलायन करना शुरू नहीं किया था. उसी दौरान केंद्र और राज्य की सरकारों ने उनके वास्ते मदद के पैकेज का ऐलान किया. इस सबके बाद भी प्रवासी मज़दूरों ने बड़ी संख्या में पलायन करना शुरू कर दिया. सरकारी मदद और योजनाओं के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी नौकरशाहों पर थी. मज़दूर जब सड़कों से होते हुए जिन ज़िला दर ज़िला होकर चलते मरते पिटते गुज़र रहे थे. वहां के प्रशासन ने अपने-अपने एरिया में क्यों नहीं पुख़्ता व्यवस्था की. हां कई जगहों पर पुलिस का रुख़ प्रवासियों के लिए सहानुभूतिपूर्वक देखने को भी मिला. पर ब्यूरोक्रेट की उस तरह की सक्रियता नज़र नहीं आई जिसकी ऐसे मौक़ों पर उनसे दरकार होती है और उनकी ये ज़िम्मेदारी भी है. अगर तमाम जगहों का प्रशासन सक्रिय होता. ईमानदारी के साथ अपने प्रशासनिक तंत्र के साथ इस विकराल समस्या के समाधान के लिए काम कर रहा होता तो हालात उतने ख़राब नहीं होते जितने देखने को मिल रहे.

'सरकार ने किया पैकेज का ऐलान, लेकिन...'
केंद्र सरकार ने क़रीब बीस लाख करोड़ रुपये के पैकेज का पिछले दिनों ऐलान किया. ज़ाहिर है इसे लागू करने की ज़िम्मेदारी नौकरशाहों की है. कौन ब्यूरोक्रेसी जो भ्रष्ट है, लालची है जिसके पास ना इमैजिनेशंस बचे हैं और ना ही इनोवेशन. बहुसंख्यक सिर्फ़ माल बनाने के बारे में दिन रात सोचते रहते हैं तो नया आइडिया कहां से आयेगा. नौकरशाहों ने ही बड़े सुनियोजित तरीक़े से इस तरह से योजना बनाई कि बिहार को freight equalisation का सबसे अधिक खामियाज़ा भुगतना पड़े. भारत की विकेन्द्रीकृत विकास प्रणाली, विकेन्द्रीकृत कृषि प्रणाली, विकेन्द्रीकृत और लोकल विजडम पर आधारित पर्यावरणीय प्रबंधन प्रणाली को नष्ट करने का काम भी नौकरशाहों ने ही किया.

Air India का आज जो हालात बन रहा है उसमें भी नौकरशाहों का बड़ा हाथ रहा है. Elon Musk ने अपने यूनिट को खोलने के लिए भारत में ही आग्रह भेजा था पर उनके ईमेल पर एक महीना तक नौकरशाह बैठे रह गए. नौकरशाहों की निष्क्रियता देख Elon भारत से निकल लिए.

'नौकरशाहों के कारण छिटक रहे देश औऱ दिखा रहे हैं तेवर'
आज अगर मालदीव भारत से छिटका है तो नौकरशाहों के कारण. श्रीलंका और नेपाल तेवर दिखा रहे हैं तो इसकी वजह भी नौकरशाह ही हैं. अगर प्रधानमंत्री का इस तरह का प्रभावशाली व्यक्तित्व नहीं होता तो भारत आज पूरे विश्व के देशों के बीच अलग-थलग पड़ गया होता. इसमें कोई शक नहीं है कि भारत ने ख़ूब तरक़्क़ी की है पर इसमें आमलोगों का ज़्यादा बड़ा हाथ है.

'बाधा बन कर सामने खड़े हो जायेंगे'
अगर नौकरशाहों ने इस तरक़्क़ी को बढ़ाया होता देश आज बहुत आगे बढ़ गया होता. पर वो अक्सर बाधा बनकर आपके सामने खड़े हो जायेंगे. अगर आप किसी नौकरशाह के पास किसी नये विचार के साथ जायें तो देखिये उसका क्या हाल होता है. सरकार की अकाउंटिबिलिटी भी होती है. उसे पांच साल बाद चुनाव में जाना होता है. नहीं काम करने पर जनता उसे हरा भी देती है. पर नौकरशाहों की क्या अकाउंटिबिलिटी है. कुछ भी नहीं. बहुत नाराज़ होने के बाद भी सरकार उनका कुछ नहीं कर सकती है. वह भारतीय संविधान के आर्टिकल 311 और 312 द्वारा पूरी तरह से संरक्षित हैं.

'नौकरशाही ब्रिटेन का खतरनाक मिसाइल और हथियार'
नौकरशाही ब्रिटेन के द्वारा दिया गया सबसे खतरनाक मिसाइल और हथियार है. यह उसी रूप में काम करता है जैसे भारत अभी भी ब्रिटेन का उपनिवेश हो. दरअसल भारत के नौकरशाह कोरोनावायरस से कम ख़तरनाक नहीं हैं. ये वायरस पूरी व्यवस्था को चटक कर रहा है. कोरोनावायरस की वैक्सीन मुमकिन है अगले साल मिल जाएगी पर ब्यूरोक्रेसी नाम के वायरस के इलाज के लिए मोदी को अब अगले साल का भी इंतज़ार नहीं करना चाहिए. वरना जितने भी प्रधानमंत्री ने सपने देखे हैं वे 2024 आते आते ध्वस्त हो जायेंगे.

(डिस्क्लेमरः लेखक बिहार-झारखंड न्यूज 18 के एडिटर हैं. ये उनके निजी विचार हैं)

 

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