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गांधीवादी का दर्द...इस देश ने गांधी को ही भुला दिया
Patna News in Hindi

Amit Singh | News18Hindi
Updated: January 27, 2020, 8:03 AM IST
गांधीवादी का दर्द...इस देश ने गांधी को ही भुला दिया
प्रो रामजी सिंह का जन्म 1927 में मुंगेर जिले के जमालपुर के इंदुख गांव में हुआ था. वे तिलकामांझी भागलपुर विश्विद्यालय में फिलॉसफी के प्रोफेसर रहे हैं. बाद में वे राजस्थान के जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय के कुलपति भी बने.

न्यूज 18 से बातचीत के दौरान रामजी सिंह ने कहा कि गांधीवाद पर चलना तो दूर अब तो लोग उन्हें याद भी नहीं करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि आज मुझे शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए पद्मश्री दिया जा रहा है इसकी खुशी बहुत है लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि देश में शिक्षा व्यवस्‍था चौपट हाे गई है.

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  • Last Updated: January 27, 2020, 8:03 AM IST
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पटना. गांधी के इस देश के लोगों ने उन्हें ही भुला दिया. यह दर्द है एक गांधीवादी का. जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी गांधीवाद पर ही बिताई और अभी भी वे उनके ही आदर्शों पर चल रहे हैं. प्रोफेसर रामजी सिंह जिन्हें पद्मश्री पुरस्कार से नवाजे जाने की घोषणा की गई है, इस सम्मान को पाने की बात पर खुश तो हैं लेकिन कहीं न कहीं यह दर्द भी है कि देश में अब महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) के आदर्शों पर कोई नहीं चल रहा है.

याद तक नहीं करना चाहते लोग
न्यूज 18 से बातचीत के दौरान रामजी सिंह ने कहा कि गांधीवाद पर चलना तो दूर अब तो लोग उन्हें याद भी नहीं करना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि आज मुझे शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर काम करने के लिए पद्मश्री दिया जा रहा है इसकी खुशी बहुत है लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि देश में शिक्षा व्यवस्‍था चौपट हाे गई है. बापू ने भारत में शिक्षा को लेकर जो सपना देखा था वह चकनाचूर हो गया है. रामजी ने लोगों से अपील की है कि वे गांधी जी के सोच और उनकी विचारधारा को अपने जीवन में जरूर शामिल करें.

60 किताबें‌ लिख चुके हैं

प्रो रामजी सिंह का जन्म 1927 में मुंगेर जिले के जमालपुर के इंदुख गांव में हुआ था. वे तिलकामांझी भागलपुर विश्विद्यालय में फिलॉसफी के प्रोफेसर रहे हैं. बाद में वे राजस्थान के जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय के कुलपति भी बने. देश के बड़े गांधीवादियों में से एक रामजी सिंह की अलग पहचान है, उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी में करीब 60 किताबें लिखी हैं. उन्होंने जैनिज्म में पीएचडी के अलावा गांधी विचार और हिंदुइज्म में डी. लिट की उपाधि भी हासिल की है. शिक्षा के क्षेत्र में और गांधी के विचारों को लेकर उन्होंने बहुत काम किया है.

प्रो. श्यामा को भी पद्म श्री
प्रो रामजी सिंह के साथ ही प्रो श्याम शर्मा को भी पद्म श्री अवार्ड देने की घोषणा की गई है. खबर सुनते ही श्याम शर्मा का पूरा परिवार खुश है. बिहार के एक कलाकार को इतना बड़ा सम्मान मिलने से प्रो. श्याम शर्मा बेहद भावुक भी हैं. कहते हैं कि हमारे जैसे साधारण कलाकार को अगर देश की सरकार ने इस सम्मान का हकदार माना है तो हम उन्हें तहे दिल से शुक्रिया अदा करते हैं. श्याम शर्मा कहते हैं कि यह सम्मान बिहार के सैकड़ों कलाकारों की और प्रतिष्ठा बढ़ाएगा. उल्लेखनीय है कि श्याम शर्मा को कला के क्षेत्र महारथ हासिल है. उन्हें बिहार सरकार ने साल 2012 में उन्हें अबुल कलाम शिक्षा सम्मान भी दिया था. अंतराष्ट्रीय छापाकला प्रदर्शनी में इनकी पेंटिंग पुरस्कृत भी हो चुकी है. वैसे तो प्रो श्याम शर्मा मूलतः उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के गोवर्धन गांव के रहनेवाले हैं लेकिन पिछले कई दशकों से वो बिहार में ही रह रहे हैं. ये कला और शिल्प महाविद्यालय पटना के प्राचार्य भी रह चुके हैं. साल 1998 में प्रो श्याम शर्मा को राष्ट्रीय ललित कला अकादमी का भी पुरस्कार मिल चुका है.

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First published: January 26, 2020, 7:04 PM IST
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