ब‍िहार में लटक सकते हैं पंचायत चुनाव, ऐसा हुआ तो जानें क्‍या है नीतीश सरकार का प्‍लान?


बिहार में पंचायत चुनाव फिलहाल अधर में लटकता हुआ दिख रहा है.

बिहार में पंचायत चुनाव फिलहाल अधर में लटकता हुआ दिख रहा है.

Bihar News: यही नहीं 2016 में पहले चरण के चुनाव के लिए अभ्यर्थियों का नामांकन 2 मार्च को शुरू हो गया था, लेकिन इस बार प्रथम चरण के चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया कब शुरू होगी. यह बता पाना मुश्किल है

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बिहार में पंचायत चुनाव फिलहाल अधर में लटकता हुआ दिख रहा है. 15 जून तक पंचायतों के निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो जाएगा. इसके पहले नया निर्वाचन नहीं होने पर मुखिया और प्रमुख समेत सभी जनप्रतिनिधियों के अधिकार भी छीन जाएंगे. सूत्रों की माने तो ऐसे में नीतीश सरकार ने पंचायती राज अधिनियम 2006 में अध्यादेश के माध्यम से संशोधन की तैयारी शुरू कर दी है.

दरअसल, ग्राम पंचायत के चुनाव अगर समय पर नहीं हुए तो पंचायतें अवक्रमित हो जाएंगी. इसके बाद पंचायती राज व्यवस्था के तहत होने वाले कार्य को अफसरों के जिम्मे देने की तैयारी बिहार सरकार कर रही है. जब तक नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों का शपथ ग्रहण नहीं हो जाता तब तक अफसर ही योजनाओं का क्रियान्वयन अपने स्तर पर करवा सकेंगे. अधिनियम में संशोधन होने के बाद इसको लेकर गाइडलाइन जारी कर दिए जाएंगे.

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पंचायती राज का कार्य जिलाधिकारियों के माध्यम से अधीनस्थ पदाधिकारियों को दिया जाएगा वार्ड ग्राम पंचायत और पंचायत समिति के माध्यम से होने वाले कार्य प्रखंड विकास पदाधिकारियों के माध्यम से कराए जाने की योजना है. जिला परिषद के माध्यम से होने वाले कार्य को डीडीसी यानी उपविकास आयुक्त द्वारा अपने स्तर पर संपन्न करवाया जाएगा. उन्हीं के पास जिला परिषद सारे अधिकार केंद्रित होंगे. 2016 में पंचायत चुनाव को लेकर 28 फरवरी को अधिसूचना जारी हो गई थी, लेकिन 2 अप्रैल बीत जाने के बावजूद 2021 में पंचायत चुनाव अधिसूचना जारी नहीं हो पाई है.
यही नहीं 2016 में पहले चरण के चुनाव के लिए अभ्यर्थियों का नामांकन 2 मार्च को शुरू हो गया था, लेकिन इस बार प्रथम चरण के चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया कब शुरू होगी. यह बता पाना मुश्किल है लिहाजा सरकार ने अफसरों को जिम्मेदारियों को देने का मन बनाया है. अगर अध्यादेश के माध्यम से अधिनियम में संशोधन किया जाता है, तो बाद में विधानमंडल सत्र से इसे पारित कराने की योजना सरकार की है.
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