Bihar Panchayat News: आखिर CM नीतीश ने पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल क्यों नहीं बढ़ाया? जानें कहां फंसा था पेंच

बिहार कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार.

बिहार कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार.

Bihar Panchayat: पंचायती राज विभाग के मंत्री ने कहा कि संविधान में यह नियम है कि पांच साल से अधिक पंचायतों का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जा सकता. विभाग के प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल ने सहमति दे दी. कैबिनेट ने परामर्शी समिति बनाने का निर्णय लिया है.

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पटना. बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने किसी की बात नहीं सुनी.  न तो सहयोगी जीतन राम मांझी  और मुकेश सहनी की और न एनडीए में सबसे बड़ी पार्टी बीजेपी के नेताओं की. सीएम नीतीश कुमार  ने विपक्ष की मांग पर भी कोई ध्यान नहीं दिया. उन्होंने एक साथ सबकी मांग खारिज करते हुए बीच का रास्ता निकाल लिया. मुख्यमंत्री ने न तो पंचायतों का कार्यकाल ही बढ़ाया और न प्रशासक की ही नियुक्ति की. चुनाव नहीं होने की स्थिति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वार्ड , पंचायत समिति, पंचायत और जिला परिषद में परामर्श समिति तैनात करने का निर्णय लिया.

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को बिहार कैबिनेट की बैठक बुलाई थी. दोपहर 12.15 बजे से वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से कैबिनेट की बैठक शुरू हुई. सभी मंत्री विभागीय सचिव के चैंबर से वीसी के माध्यम से कैबिनेट की बैठक से जुड़े. बिहार कैबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण लिये गए. बिहार सरकार ने पंचायती राज व्यवस्था के खत्म हो रहे कार्यकाल को बढ़ाने से इंकार कर दिया. कैबिनेट ने पंचायतों का चुनाव नहीं होने की स्थिति में परामर्शी समिति गठन का निर्णय लिया.

कमिटी देखेगी पंचायतों के कामकाज

मंगलवार की कैबिनेट बैठक में पंचायती राज विभाग के उस प्रस्ताव को हरी झंड़ी दे दी.जिससे पंचायतों में परामर्शी समिति की नियुक्ति होना है. पंचायती राज विभाग ने माना कि यदि किसी कारण से ग्राम पंचायत का आम निर्वाचन कराना संभव नहीं हो तो उक्त अवधि के अवसान पर ग्राम पंचायत भंग हो जाएंगी. ग्राम पंचायत में निहित सभी शक्ति का प्रयोग या संपादन ऐसी परामर्श समिति द्वारा की जाएगी जिसे राज्य सरकार अधिसूचना द्वारा गठित करे. मतलब राज्य सरकार पंचायतों में प्रशासक की नियुक्ति नहीं करेगी बल्कि एक कमिटी बनाएगी जो पंचायतों का काम देखेगी.
पंचायती  विभाग के मंत्री ने कही यह बात

पंचायती राज विभाग के मंत्री ने कहा कि संविधान में यह नियम है कि पांच साल से अधिक पंचायतों का कार्यकाल नहीं बढ़ाया जा सकता. विभाग के प्रस्ताव पर मंत्रिमंडल ने सहमति दे दी. कैबिनेट ने परामर्शी समिति बनाने का निर्णय लिया है. अब इस प्रस्ताव को राज्यपाल के पास भेजा जायेगा. समिति में कौन-कौन लोग होंगे इस पर बाद में निर्णय होगा.

सत्तापक्ष-विपक्ष के नेताओं ने की थी यह मांग



बता दें कि बिहार में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से 15 जून से खत्म हो रहे त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने की मांग की थी. बीजेपी के कई विधान पार्षद से लेकर BJP सांसद रामकृपाल यादव ने इस संबंध में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को पत्र लिखा था. सरकार के सहयोगी दल वीआईपी और हम ने भी नीतीश कुमार को पत्र लिखा था.

मांझी-सहनी ने पुरजोर तरीके से उठाई थी मांग

नीतीश कैबिनेट में मंत्री मुकेश सहनी और पूर्व सीएम जीतनराम मांझी तो खुलकर पंचायत का कार्यकाल बढ़ाने की मांग कर रहे थे. दोनों ने सीएम से मांग करते हुए कहा कि राज्य में पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाया जाए और उनके पावर को न सीज किया जाए. लेकिन सीएम नीतीश कुमार ने राजनीतिक सूझ-बूझ का परिचय देते हुए बीच का रास्ता निकाल लिया. अब राजद को छोड़ कोई भी दल इस फैसले के विरोध में नहीं दिख रहा है.

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