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'कोरोना बम' साबित हो सकती हैं पैसेंजर ट्रेनें, भेड़-बकरियों की तरह यात्रा कर रहे लोग

कोरोना विस्फोट के खतरे के बीच फतुहा स्टेशन पर ये नजारे रोज देखे जा सकते हैं.
कोरोना विस्फोट के खतरे के बीच फतुहा स्टेशन पर ये नजारे रोज देखे जा सकते हैं.

पटना के फतुहा स्टेशन पर ऐसा नजारा रोज देखा जा सकता है. यहां से खुलने वाली मोकामा-दानापुर पैसेंजर ट्रेन (Passenger Train) में यात्री कोविड-19 (Corona) के नियमों की अनदेखी कर भेड़-बकरियों की तरह यात्रा करते हैं.

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पटना. कोरोना महामारी (Corona Pandemic) का भारत में दस्तक दिए लगभग 10 माह बीत चुके हैं. इससे बचने के लिए केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा समय-समय पर गाइडलाइन जारी की जा रही है. पूरे देश में लॉकडाउन भी लगाया गया. लेकिन बिहारवासी हैं कि इन सबके बावजूद कोरोना को लेकर घोर लापरवाही बरत रहे हैं. कम से कम बिहार में चलने वाली लोकल ट्रेनों (Local Trains) को देखकर ऐसा ही लगता है. इन पैसेंजर ट्रेनों में लोग कोरोना संक्रमण के खतरे से बेखौफ होकर भेड़-बकरियों की तरह सफर कर रहे हैं.

दरअसल भारत सरकार ने नियमों और शर्तों के साथ कई एक्सप्रेस ट्रेनों का परिचालन शुरू कराया. बाद में रेल मंत्रालय ने कई रूटों पर लोकल-पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन को मंजूरी दी. लेकिन इन ट्रेनों पर सफर करने वाले लोग कोरोना गाइडलाइन की धज्जियां उड़ा रहे हैं. राजधानी पटना के फतुहा स्टेशन पर ऐसा नजारा रोज देखा जा सकता है. यहां से खुलने वाली मोकामा-दानापुर पैसेंजर ट्रेन में यात्री कोविड-19 के नियमों की अनदेखी कर भेड़-बकरियों की तरह यात्रा करते हैं. वहीं रेल प्रशासन, आरपीएफ और जीआरपी इस स्थिति पर चुप रहना ही सही समझ रहे हैं.

हालांकि इस ट्रेन में यात्रा करने वाले यात्रियों की भी अपनी मजबूरी है. यात्रियों में 90 फीसदी लोग ऐसे होते हैं जो रोजी-रोटी के लिए पटना आते हैं. बस और अन्य गाड़ियों पटना जाने में खर्च ज्यादा होता है, इसलिए लोग कोरोना संक्रमण के खतरे के बावजूद ट्रेन से यात्रा करते हैं.



पैसेंजर ट्रेन में भीड़-भाड़ का एक कारण ये भी है कि एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव छोटे-छोटे स्टेशनों पर नहीं होता है, जबिक पैसेंजर ट्रेनें हर छोटे-बड़े स्टेशनों पर रुकती हैं. लिहाजा लोकल यात्री पैसेंजर ट्रेन का सफर पसंद करते हैं.
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