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बिहार: 25 बेड का ICU और 200 मरीज इंतजार में, IGIMS में फुटपाथ पर कटती है गरीबों की रात

News18 Bihar
Updated: November 28, 2019, 3:54 PM IST
बिहार: 25 बेड का ICU और 200 मरीज इंतजार में, IGIMS में फुटपाथ पर कटती है गरीबों की रात
बिहार के IGIMS अस्पताल में उपलब्ध बेड से अधिक मरीज पहुंचते हैं, इस कारण मरीजों और परिजनों की रात फुटपाथ पर कटती है.

IGIMS के अधीक्षक मनीष मंडल बताते हैं कि पहले इस अस्पताल की क्षमता 560 बेड की थी, जिसे बढाकर 1070 कर दिया गया. लेकिन, बीमारियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है और मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है.

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पटना. इंदिरा गांधी आर्युविज्ञान संस्थान (IGIMS को हाईटेक बनाने में सरकार भले ही जी जान जान से लगी हो, लेकिन वर्तमान हालात सरकारी सिस्टम पर सवाल खडे कर रही है. यहां मरीजों को बेड मिलना किसी जंग जीतने से कम नहीं होता है. आलम यह है कि 50 से ज्यादा मरीज (Patient) ऐसे हैं जो कई दिनों से खुले आसमान के नीचे भर्ती होने की बाट जोह रहे हैं. वहीं, बड़ी हकीकत ये भी है कि रोज कई गंभीर मरीजों को यहां से पलायन करना पड़ जाता है.


इसे एम्स की तर्ज पर विकसित करने का काम भी चल रहा है, लेकिन पिछले 4 सालों में कई नई सुविधाएं भी शुरू की गई और किडनी ट्रांसप्लांट,आई ट्रांसप्लांट के मामले में बिहार का इकलौता अस्पताल बन गया. लेकिन, मरीजों की तुलना में बेड इतने कम पड़ रहे हैं कि अस्पताल मरीजों को भर्ती करने से इनकार कर रहा है.



भर्ती होने के लिए करना पड़ता है इंतजार 

आलम ये है कि सुबह से रात तक मरीजों के आने का सिलसिला शुरू रहता है और बेड की मारामारी भी जारी रहती है. गंभीर मरीजों को सबसे ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, जिन्हें कई रात खुले आसमान के नीचे गुजारने के बाद बेड नसीब हो पाता है. कोई महीने भर से यहां इंतजार कर रहा है तो कोई सप्ताह भर से. किसी को कैंसर है तो कोई टीबी की वजह से सुबह से रात तक खांसते-खांसते दम तोड़ दे रहा है.


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25 बेड का आईसीयू और 200 मरीज इंतजार में 

दरअसल ज्यादातर गरीब मरीजों को यही पता होता है कि आयुष्मान भारत का कार्ड साथ है तो फिर इलाज तो होगा ही. यही सोचकर सीधे IGIMS पहुंचता है, लेकिन यहां आकर निराशा ही हाथ लग रही है.

मोतिहारी से अपने पति का इलाज कराने पहुंची लक्ष्मी देवी पिछले 7 दिनों से पति को भर्ती करने की गुहार लगाकर थक चुकी है, लेकिन कामयाबी हाथ नहीं लगी. पति की हालत लगातार बिगड़ती ही जा रही है. लक्ष्मी देवी और उसके पति सत्यनारायण ने डॉक्टरों से आयुष्मान भारत का कार्ड भी दिखाया, लेकिन बेड नहीं है कहकर भर्ती नहीं किया गया.




IGIMS कैम्पस में फुटपाथ पर सोते मरीज व उनके परिजन



फुटपाथ पर ही कटती है गरीबों की रात

कई ऐसे भी मरीज आते हैं जिनको एंबुलेंस पर लेटे लेट घंटों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन भर्ती नहीं लेने पर वापस हो जाना पड़ता है. बेगसूराय से अपने बच्चे को लेकर IGIMS पहुंची नूतन देवी के साथ भी ऐसा ही हुआ. तेज बुखार में डॉक्टरों ने बेगूसराय से आईजीआईएमएस रेफर तो कर दिया, लेकिन यहां से प्रबंधन ने बिना भर्ती किए लौटा दिया. जबकि बच्चे की हालत खराब थी, लेकिन उसे एंबुलेंस से उतारा तक नहीं गया.


क्षमता से 4 गुणा ज्यादा मरीजों का रहता है दबाव 

एंबुलेंस चालक मो वाहिद रोज ऐसी घटना का गवाह बनता है क्योंकि यहां मरीजों को लाने के बाद इसे ज्यादातर वापस ही ले जाना पड़ता है. टीबी, कैंसर, ब्रेन हैमरेज, लकवा, किडनी रोग, हार्ट अटैक, डेंगू समेत कई गंभीर बीमारियों के मरीजों को भी अस्पताल में भर्ती होने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है.



अपना आयुष्मान कार्ड दिखाते मरीज व उसके परिजन.



वर्तमान में 1070 बेड का है पूरा अस्पताल 

इस स्थिति को लेकर जब अस्पताल के अधीक्षक डॉ मनीष मंडल ने न्यूज 18 ने बात करते हुए उन्होंने स्पष्ट कहा कि अस्पताल की क्षमता से तीन गुणा ज्यादा मरीजों का दबाव अस्पताल पर है. इसकी वजह से हर मरीज को भर्ती कर पाना संभव नहीं हो पा रहा है. अधीक्षक बताते हैं कि पहले इस अस्पताल की क्षमता 560 बेड की थी, जिसे बढाकर 1070 कर दिया गया. लेकिन, बीमारियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है और मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है.


उन्होंने कहा कि अगले डेढ़ साल में स्थिति सामान्य हो जाएगी क्योंकि एक 500 बेड का नया अस्पताल बनेगा जिसमें 100 बेड का आईसीयू बनेगा. इसके साथ ही 1200 बेड का सुपरस्पेशलिटी अस्पताल भी बन रहा है, जिसके बाद स्थिति सामान्य होगी. अब सवाल उठता है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं आखिर कब तक मुकम्मल होंगी? कब तक गरीब मरीज इलाज के लिए इंतजार करते रहेंगे?


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First published: November 28, 2019, 3:42 PM IST
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