फ्लाइट हाइजैक या आग लगने पर कार्रवाई के लिए पटना एयरपोर्ट को मिला कमांड पोस्ट वैन, जानें खासियत

पटना एयरपोर्ट पर मोबाइल कमांड पोस्ट वैन
पटना एयरपोर्ट पर मोबाइल कमांड पोस्ट वैन

इस माेबाइल कमांड पाेस्ट वैन में प्राेजेक्टर के साथ डिजिटल बाेर्ड लगा हुआ है. चार घंटे बैकअप देने के लिए जेनरेटर लगा है साथ ही रोशनी के लिए चार सेट मास्ट लाइट लगा है.

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पटना. विमान के हाईजैक, दुर्घटना या फिर आग लगने के बाद के हालात पर नजर रखने और काबू पाने के लिए पटना एयरपाेर्ट पर माेबाइल कमांड पाेस्ट तैनात कर दिया गया है. यह एक तरह का वैन है जिसकी लागत करीब 44 लाख है. इस वैन में कई खासियत हैं. वैन में 500 पीटीजेड का एक हाई रेज्यूलेशन कैमरा लगा है. इस कैमरे की क्लियर विजिबिलिटी क्षमता 500 मीटर है, वैसे यह किलाेमीटर दूर के फुटेज काे कैद कर इसमें लगे 42 इंच के एलइर्डी माॅनिटिर में डिस्पले कर सकता है.

44 लाख है कीमत

यह वैन पूृरी तरह से एसी है और इसमें एक साथ आठ लाेग रांउड टेबल पर बैठकर हालत पर नजर रखने के साथ ही बातचीत कर सकते हैं. इसमें फाेटाेग्राफी के लिए कैमरा भी लगा है साथ ही यूपीएस लगा है जाे दाे घंटे तक बैकअप दे सकता है. पटना एयरपाेर्ट के निदेशक भूपेश नेगी ने बताया कि 44 लाख की लागत से इस वैन को मंगाया गया है. किसी भी आपातकालीन स्थिति में यह मददगार साबित हाेगा. इमरजेंसी ऑपरेशन के दाैरान इसमें एक साथ काेऑडिनेशन, कमांड और कम्युनिकेशन की सुविधा है. इसमें वाटर डिस्पंसर भी लगा है जो विमान में आग लगने पर 90 मीटर दूर से बुझा सकता है.



क्या-क्या है खासियत
इस माेबाइल कमांड पाेस्ट वैन में प्राेजेक्टर के साथ डिजिटल बाेर्ड लगा हुआ है. चार घंटे बैकअप देने के लिए जेनरेटर लगा है साथ ही रोशनी के लिए चार सेट मास्ट लाइट लगा है. हरेक सेट 240 वाट का है. वाकीटाॅकी, काेडलेस माइक, एटीसी फ्रिक्वेंसी काे माॅनिटर करने के लिए वीएचएफ सेट लगे हैं। साथ ही ब्लूटूथ, मेगा फाेन भी लगा हुआ है. इस वैन में बचाव टीम के लिए नाइटविजन बाइनाेकूलर लगा है जिसकी क्षमता 120 मीटर है. इसमें चार फाेल्डेबल स्ट्रेचर, 10 साइन बाेर्ड, दाे शामियाना भी है.

आठ लाेग एक साथ कर सकेंगे काम

इस वैन में बैठककर एक साथ आठ लोग विमान के दुघर्टना हाेने पर संबंधित एयरलाइंस के अधिकारियाें के साथ संपर्क कर सकते हैं. जाे यात्री जख्मी नहीं हुए हैं उन्हें सर्वाइवर रिसेप्शन सेंटर तक ले जा सकते हैं, साथ ही क्राइसिस मैनेजमेंट सेंटर और एयरपाेर्ट ऑरेशन कंट्राेल सेंटर से बातचीत कर सकते हैं. इस वैन के जरिये डाॅक्टर की जाे जरूरतें हाेगी उसे सहायता देना, घायल काे जल्द से जल्द निकालवाना और उसे अस्पताल तक भेजवाने का काम किया जा सकता है.
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