2021 तक भिक्षुकमुक्त होगा पटना शहर, रोजगार दिलवाएगी बिहार सरकार

बिहार सरकार की योजना है कि शहर के भिक्षुकों को आर्थिक मदद कर उन्हें रोजगार से जोड़ेगी. (सांकेतिक तस्वीर)

बिहार सरकार की योजना है कि शहर के भिक्षुकों को आर्थिक मदद कर उन्हें रोजगार से जोड़ेगी. (सांकेतिक तस्वीर)

मंत्री अशोक चौधरी ने बताया कि 21 मार्च तक पूरे पटना शहर से भीख मांगने वाले लोगों को मदद पहुंचा कर राहत दी जाएगी. जो सब्जी बेचना चाहें या अन्य कोई रोजगार करना चाहें, उन्हें आर्थिक मदद पहुंचा कर काम दिया जाएगा.

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  • Last Updated: December 7, 2020, 5:20 PM IST
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पटना. पटना शहर में 21 मार्च 2021 के बाद कोई भीख मांगने वाला सड़क पर दिखाई नहीं देगा. समाज कल्याण विभाग (Social Welfare Department) ने मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना के तहत तय सीमा में भीख मांगने वाले लोगों को रोजगार देकर पटना शहर को भिक्षावृत्ति से मुक्त बनाने पर काम शुरू कर दिया है. इसके तहत समाज कल्याण विभाग पटना सभी भीख मांगने वाले लोगों का डेटाबेस तैयार कर रहा है. डेटाबेस तैयार करने के बाद लोगों को आर्थिक मदद पहुंचा कर उसे रोजगार से जोड़ा जाएगा. समाज कल्याण मंत्री अशोक चौधरी ने बताया कि 21 मार्च तक पूरे पटना शहर से भीख मांगने वाले लोगों को मदद पहुंचा कर राहत दी जाएगी. जो सब्जी बेचना चाहें या अन्य कोई रोजगार करना चाहें, उन्हें आर्थिक मदद पहुंचा कर काम दिया जाएगा ताकि वह भीख मांगने के बजाय रोजगार कर अपने परिवार का भरण पोषण कर सकें.

महावीर मंदिर पटना से शुरू होगा अभियान

पटना को भिक्षावृत्ति मुक्त बनाने की शुरुआत पटना के हनुमान मंदिर से शुरू की जाएगी. पटना जंक्शन के पास बने हनुमान मंदिर के पास भिक्षुकों का जमावड़ा रहता है. इन सारे लोगों को आर्थिक मदद की जाएगी और उनके लिए कोई न कोई रोजगार सृजन किया जाएगा. पटना के हनुमान मंदिर के पास बेली रोड, गांधी मैदान, पटना सिटी कंकड़बाग जैसे तमाम इलाकों में भीख मांगने वाले लोगों को इस काम से मुक्त कराया जाएगा.

मंदिर के पास समाज कल्याण विभाग लगाएगा दानपेटी
वैसे सभी लोग जो गरीबों की मदद करना चाहते हैं, उनके लिए मंदिर के सामने एक बड़ी दान पेटी रखी जाएगा ताकि लोग इसमें अपना दान करें. इसका इस्तेमाल उन भीख मांगने वाले लोगों को मदद पहुचाने में किया जाएगा.

आश्रयस्थल का भी होगा जीर्णोद्धार

समाज कल्याण मंत्री अशोक चौधरी ने बताया कि भीख मांगने वाले लोगों को न सिर्फ रोजगार दिया जाएगा, बल्कि उनके रहने के लिए आश्रयस्थल का भी निर्माण कराया जाएगा. पहले से बने सभी आश्रयस्थलों को अवैध कब्जे से मुक्त कराकर उनका जीर्णोद्धार करवाया जाएगा.

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