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NACC ग्रेडिंग: 'पूरब का ऑक्सफोर्ड' कहे जाने वाले 156 साल पुराने पटना कॉलेज ने बनाया अनचाहा रिकॉर्ड

Rajneesh Kumar | News18 Bihar
Updated: November 20, 2019, 11:01 AM IST
NACC ग्रेडिंग: 'पूरब का ऑक्सफोर्ड' कहे जाने वाले 156 साल पुराने पटना कॉलेज ने बनाया अनचाहा रिकॉर्ड
बिहार का पटना कॉलेज

नैक (NACC) ने पटना कॉलेज के जहां रिसर्च, प्लेसमैंट पर सवाल खड़े किए हैं तो वहीं शिक्षकों की भारी कमी को लेकर भी सवाल उठाया है.

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  • Last Updated: November 20, 2019, 11:01 AM IST
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पटना. किसी जमाने में 'पूरब का ऑक्सफोर्ड' नाम से मशहूर और बिहार का 156 साल पुराने पटना कॉलेज (Patna College) इन दिनों सुर्खियों में है. सुर्खियों में रहने का कारण सुनहरा वर्तमान नहीं बल्कि नैक (NACC) की ग्रेडिंग में मिला ग्रेड है. नैक ने पटना में स्थित 156 साल पुराने पटना कॉलेज को अपनी जांच में सी ग्रेड दिया है जिसके बाद चारों तरफ इस संस्थान की शैक्षणिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं. खास बात है कि नैक ने सात मानकों पर ग्रेडिंग किया है जिसमें किसी में भी बी प्लस ग्रेड नहीं मिला है.

विश्वविद्याल के इतिहास में पहली बार सी ग्रेड

पटना विश्वविद्यालय के इतिहास में अब तक किसी भी कॉलेज को सी ग्रेड नहीं मिला था लेकिन पटना कॉलेज ने पहली बार ही ग्रेडिंग करवाई और कुल चार सीजीपीए में महज 1.62 अंक प्राप्त किया. नैक की खराब ग्रेडिंग का असर सेंट्रल एजेंसियों से मिलने वाले फंड पर भी पड़ेगा. कॉलेज ने आइआइक्यू 29 मार्च को सबमिट किया था,जबकि सेल्फ स्टडी रिपोर्ट (एसएसआर) 24 मई को जमा किया था. एक्रिडेशन के लिए 18 व 19 अक्टूबर को पीयर टीम ने कॉलेज का निरीक्षण किया था जिसके बाद ग्रेडिंग की गई है.

किस कटेगरी में मिले कितने अंक

सभी मानकों के लिए चार सीजीपीए निर्धारित थे जिसमें तीन से अधिक अंक प्राप्त करने पर 'ए' ग्रेड दिया जाता. सबसे अधिक चार में 2.35 अंक टीचिंग-लर्निंग एंड इवैल्यूएशन में मिला है जबकि कैरिकुलर एस्पेक्ट्स में 1.82 अंक, रिसर्च, इनोवेशन व विस्तार में 0.4 अंक, ढांचागत सुविधा व शिक्षण संसाधन में 1.58, स्टूडेंट सपोर्ट एंड प्रोग्रेस में 0.82, गवर्नेंस, लीडरशिप एंड मैनेजमेंट में 1.37 तथा इंस्टीट्यूशन वैल्यू एंड बेस्ट प्रैक्टिसेज में 1.67 प्वाइंट मिले हैं.

जेपी से लेकर रविशंकर प्रसाद तक ने की है पढ़ाई

पटना विश्वविद्यालय में सी ग्रेड प्राप्त करने वाला यह पहला कॉलेज है. इस कॉलेज का अतीत किसे पता नहीं जहां से पूर्व सीएम डॉ श्री कृष्ण सिंह, रामधारी सिंह दिनकर, लोक नायक जय प्रकाश नारायण, रविशंकर प्रसाद समेत ना जाने कितने राजनीतिज्ञ और ब्यूरोक्रेट्स ने पढाई कर राष्ट्रीय फलक पर पटना कॉलेज का नाम रौशन किया था. वर्तमान की हालात ने हर किसी को मायूस कर दिया. नैक ने जहां रिसर्च, प्लेसमैंट पर सवाल खड़े किए हैं वहीं शिक्षकों की भारी कमी को लेकर भी सवाल उठाया है.
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32 शिक्षकों के बूते 2500 छात्र

आलम यह है कि लगभग 2500 छात्रों पर मात्र 32 स्थायी शिक्षक कार्यरत हैं जबकि बाकि गेस्ट फैकल्टी के सहारे ही कॉलेज चल रहा है. पूरे मामले पर जहां छात्रों में मायूसी और नाराजगी है वहीं प्रभारी प्राचार्य सुरेंद्र कुमार सिंह ने को अब भी भरोसा है कि अपील में जाने के बाद ग्रेडिंग में सुधार होगा. प्राचार्य ने सफाई देते हुए कहा कि कॉलेज में भले ही 32 स्थायी शिक्षक हैं लेकिन गेस्ट फैकल्टी कमियों को पूरा कर रहे हैं.

वीसी बोले- हम शर्मिंदा हैं

आखिर किन वजहों से सी ग्रेड मिला ये अपील के बाद ही पता चलेगा जबकि वीसी रासबिहारी सिंह भी इसी कॉलेज के छात्र रहे हैं उन्होंने कहा कि सुनकर हम खुद निराश हैं और शर्मिंदा हैं. उन्होंने जिम्मेवारी लेते हुए कहा कि हमने अपने दायित्व का निर्वहन नहीं किया क्योंकि शिक्षकों ने सही से सेवा नहीं दी वर्ना ये हश्र नहीं होता. ऐसे में सवाल उठता है कि अपील में जाने के बाद क्या ग्रेडिंग में सुधार हो पाएगा. क्या बुलंद इतिहास और इस ऐतिहासिक धरोहर का भविष्य सुनहरा होगा क्योंकि नैक की ग्रेडिंग ने वर्तमान पर ना सिर्फ सवाल खड़े किए हैं बल्कि छात्रों को भी भविष्य का डर सताने लगा है.

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First published: November 19, 2019, 11:44 AM IST
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