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पटना में खतरनाक नाले लील चुके हैं कइयों की जिंदगी, न्यूज़ 18 की रिएलिटी टेस्ट में सरकार के दावों की खुली पोल

पटना शहर के अलग-अलग इलाके में कई ऐसे खतरनाक नाले हैं जिनमें गिरकर या डूबकर अक्सर लोगों की मौत हो जाती है

पटना शहर के अलग-अलग इलाके में कई ऐसे खतरनाक नाले हैं जिनमें गिरकर या डूबकर अक्सर लोगों की मौत हो जाती है

सरकार का एलान है कि पटना को स्मार्ट सिटी (Smart City) बनाया जाएगा, सारे नालों को पाटकर चकाचक सड़कें बनाई जाएंगी. लेकिन हकीकत कुछ और ही है, और यह तब है जब इन नालों में कई लोगों की जानें जा चुकी हैं. इन खतरनाक नालों में कई परिवार के चिराग बुझ गए हैं

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पटना. बिहार की राजधानी पटना (Patna) के चौहद्दी में खुले नालों का घेरा बना हुआ है. शहर के जिस ओर जाइए आपको खुले नाले दिख जाएंगे. अगर तनिक भी चूक हुई तो फिर पल भर में जिंदगी नाले में दफन हो जाएगी. हमारा मकसद आपको डराना हरगिज नहीं है लेकिन जो हकीकत है वो वाकई भयावह है. इन खतरनाक नालों (Drainage System) ने अब तक कइयों को लील लिया है. न्यूज़ 18 ने ठाना है कि आमलोगों की परेशानियों और सरकार के दावों की सच्चाई सबके सामने लाने के लिए एक विशेष पड़ताल करेंगे.

इसी कड़ी में हमने पटना के तीन इलाकों में सबसे खतरनाक नालों की पड़ताल की. इन नालों में अब तक कई लोगों की जानें जा चुकी हैं बावजूद इसके अब भी हालत जस के तस है. नालों में डूबकर लोग मर रहे हैं लेकिन प्रशासन इस कदर बेपरवाह है कि लोगों की जान की भी फिक्र नहीं है. सरकार की घोषणा है कि पटना को स्मार्ट सिटी बनाया जाएगा, सारे नालों को पाटकर चकाचक सड़कें बनाई जाएंगी. लेकिन हकीकत कुछ और ही है, और यह तब है जब इन नालों में कई लोगों की जानें जा चुकी हैं. इन खतरनाक नालों में कई परिवार के चिराग बुझ गए हैं.

जानलेवा है मंदिरी नाला, हर कुछ महीने लेता है किसी की जान



न्यूज़ 18 इन नालों की हकीकत आपके सामने रखेगा जो सरकार के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है. सबसे पहले किदवईपुरी से सटे मंदिरी नाले की बात जहां अभी दो दिन पहले एक शख्स की मौत नाले में डूबने से हो गई थी. मृतक गरीब रिक्शा चालक था. इससे भी बड़ी घटना दो महीने पहले 31 दिसंबर की रात को घटी जब एक स्कार्पियो गाड़ी रात के अंधेरे में नाले में समा गया. उस गाड़ी में तीन लोग सवार थे जिसमें एक शख्स की मौत हो गई. ना जाने ऐसी कितनी घटनाएं घट चुकी हैं मगर जिला प्रशासन और नगर निगम अब भी गहरी नींद में सोए हुए हैं. इन घटनाओं के बाद से स्थानीय लोगों में जिला प्रशासन और मौजूदा विधायक-सांसद से बहुत नाराजगी है. मंदिरी इलाके के निवासी देवनारायण यादव का कहना है कि प्रशासन और सरकार तभी आते हैं जब किसी की जान जाती है. स्थानीय लोगों की नाराजगी ऐसी है कि लोगों ने पोस्टर लगाकर स्थानीय विधायक और सांसद को इस रास्ते से आने-जाने पर रोक लगा दी है.
मंदिरी के बाद हम पहुंचे पुनाईचक जहां खुले नालों में आए दिन दुर्घटनाएं होती है. स्थानीय लोग जिला प्रशासन और नगर निगम को चिट्ठी लिख-लिखकर अब थक गए हैं. पुनाईचक के अजीत कुमार कहते हैं कि अबतो प्रशासन और नगर निगम को पत्र लिखते लिखते थक गए हैं लेकिन नाले को अब तक ढका नहीं गया केवल आश्वासन ही मिलता है.

2018 में एस.के पुरी नाले में डूबने से 10 वर्षीय लड़के की हुई थी मौत

इसके बाद हम उस पड़ाव पर जा पहुंचे जहां दो साल पहले सबसे दर्दनाक हादसा हुआ था जहां एक मासूम को मौत के नाले ने लील लिया था. दस वर्षीय दीपक अपने घर का अकेला चिराग था. वर्ष 2018 में दीपक एस.के पुरी नाले में डूब गया था. सारी कोशिशों के बावजूद दीपक की लाश नहीं मिल सकी थी. अंत में थक-हारकर ज़िला प्रशासन ने दीपक के परिवारवालों को मुआवजा दे दिया. दीपक जैसी भयावह घटना बीतने के बाद भी आज सिस्टम आम जनता के प्रति लापरवाह है तभी तो मौत के उसे नाले को अब तक ढका नहीं गया.

न्यूज़ 18 अपनी पड़ताल के जरिये सरकार को केवल आगाह करना चाहता है क्योंकि सिस्टम की लापरवाही के चलते यहां मासूम लोगों की जाने जा रही हैं. इस कड़वी हकीकत को देखकर सरकार के तमाम दावे और स्मार्ट सिटी का सपना बेमानी लगता है. जरूरत है कि सरकार इन तश्वीरों को देखकर संज्ञान ले ताकि दीपक जैसा कोई मासूम ऐसे मौत के नालों का कभी शिकार ना बन सके.
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