Senari Masscare: पटना HC ने किया सभी आरोपियों को बरी, पढ़ें नरसंहार की उस काली रात की कहानी

पटना हाईकोर्ट ने जहानाबाद नरसंहार केस में सभी 13 आरोपियों को बरी कर दिया है.

पटना हाईकोर्ट ने जहानाबाद नरसंहार केस में सभी 13 आरोपियों को बरी कर दिया है.

बिहार के जहानाबाद जिले के चर्चित सेनारी हत्याकांड में पटना हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आज सभी 13 आरोपियों को रिहा कर दिया. हाईकोर्ट ने जहानाबाद के जिला कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया, जिसमें जिला कोर्ट ने 10 आरोपियों को फांसी और 3 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी.

  • Last Updated: May 21, 2021, 7:39 PM IST
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पटना. बिहार के जहानाबाद के चर्चित सेनारी नरसंहार (Senari massacre) में पटना हाईकोर्ट (Patna High Court) ने आज बड़ा फैसला सुनाया. हाईकोर्ट ने सभी 13 आरोपियों को रिहा करने का आदेश दिया है. हाईकोर्ट ने जहानाबाद के जिला कोर्ट के उस फैसले को पलटते हुए फैसला दिया है, जिसमें जिला कोर्ट ने 10 आरोपियों को फांसी और 3 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी. पटना हाईकोर्ट के न्यायधीश अश्विनी कुमार सिंह और अरविंद श्रीवास्तव की खंडपीठ ने फैसला सुनाते हुए सभी आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया.

सेनारी में नरसंहार की उस काली रात की कहानी

जहानाबाद के सेनारी में हुए हत्याकांड से पूरा देश दहल गया था. 90 के दशक में होने वाले अपराधों के दौर में सेनारी नरसंहार दिल दहला देने वाली घटना थी. वो वक्त ऐसा था जब हर महीने हत्या और हर साल कोई न कोई बड़ा हत्याकांड होना आम बात थी. यह हत्याकांड नारायणपुर बाथे नरसंहार का बदला माना गया था. 18 मार्च 1999 की रात के करीब 7 से 8 बजे के बीच अपराधियों ने जहानाबाद के सेनारी गांव को चारों तरफ से घेर लिया गया था. इसके बाद गांव में विशेष जाति के लोगो को चुन-चुन कर बाहर निकाला गया. सभी लोगों को पास के ही ठाकुरबाड़ी के पास ले जाकर सभी के हाथ और पैर बांधे गए. इसके बाद बारी-बारी से गला काटा गया था. यह घटना रात 7 से 10 के बीच की बताई जाती है. इस नरसंहार के लिए प्रतिबंधित संगठन एमसीसी (माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ) को बताया गया.

सेनारी नरसंहार को बदला कहा गया था
सेनारी में हुए 34 लोगों के नरसंहार को अरवल के नारायणपुर बाथे और शंकर बिगहा में हुए नरसंहार का बदला माना गया था. उस समय एमसीसी और रणवीर सेना के बीच टकराव आम बात थी. 30 दिसंबर 1997 की आधी रात को नारायणपुर बाथे में 58 लोगों को बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया था, जिसमें सभी दलित थे. इस हत्याकांड में बड़े संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे. कई परिवार ऐसे थे जिसके पास कोई नही बचा था. इस घटना के लिए रणवीर सेना को दोषी माना गया था.

बाद में 2013 में पटना हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए सबूतों के अभाव में सभी 26 आरोपियों को बरी कर दिया था. ऐसे ही घटना जहानाबाद के शंकर बिगहा में 25 जनवरी 1999 को हुए नरसंहार में 24 दलितों की हत्या कर दी गई थी. 16 सालो के सुनवाई के बाद 2015 में सबूतों के अभाव में सभी आरोपियों को रिहा कर दिया गया था.

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